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बच्चों के लिए मुसीबत बना बुखार, एईएस की भी दस्तक

Mon, 05 Sep 2022 12:45 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 05 Sep 2022 12:45 AM IST
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Fever became trouble for children, AES also knocked
आईसीयू वार्ड में भर्ती एईएस से पीड़ित बच्चा।
चिल्ड्रेन वार्ड में बुखार एवं डायरिया पीड़ित 12 बच्चे भर्ती
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लखीमपुर खीरी। जिले में एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) की भी दस्तक हो गई है। इससे पीड़ित एक बच्चे का इलाज जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में चल रहा है। उधर, चिल्ड्रन वार्ड में बुखार पीड़ित आठ और डायरिया पीड़ित चार बच्चों का इलाज चल रहा है। हालांकि इन बच्चों की हालत में सुधार होना बताया जा रहा है। वहीं मेडिकल महिला एवं पुरुष वार्ड में भी 16 लोग बुखार आने पर भर्ती हैं।
बुखार आने पर लगुचा निवासी शिवम ढाई वर्षीय पुत्र युग, लखनापुर निवासी सतेंद्र साढ़े चार वर्षीय पुत्र आयुष, बिलरिया निवासी योगेश छह वर्षीय पुत्री तान्या, निघासन निवासी लखविंदर सिंह डेढ़ वर्षीय पुत्र सुखवीर, ईसानगर निवासी श्रीराम पांच वर्षीय पुत्री शिवानी, मितौली निवासी उमाशंकर सात वर्षीय पुत्र शिवपूजन, अटकोहना निवासी नौ वर्षीय पुत्री पारूल, सीतापुर निवासी कैलाश दस वर्षीय पुत्री वंदना एवं उल्टी दस्त शुरू होने पर सीतापुर निवासी साकिर अली 14 वर्षीय पुत्र कलामू, गोटैयाबाग निवासी नुरुल छह वर्षीय पुत्र आमिर, बेगमबाग निवासी मुस्तफा 11 वर्षीय पुत्र मुशीर एवं सिंगाही निवासी मंगरे ढाई वर्षीय पुत्र मिथलेश को लेकर जिला अस्पताल आए। हालत गंभीर होने पर इन सभी को चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। वहीं मिथलेश में एईएस के लक्षण लगने पर उसे आईसीयू वार्ड में शिफ्ट किया गया है। हालांकि इन सबकी हालत में सुधार होना बताया जाता है। उधर, मेडिकल महिला वार्ड में नौ और पुरूष वार्ड में सात लोगों का इलाज चल रहा है।
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अब तक दुरुस्त नहीं हो सका आईसीयू वार्ड
जिला अस्पताल प्रशासन को न तो बच्चों की सेहत की चिंता है और न ही डिप्टी सीएम का उनको खौफ है। शायद यही वजह है कि कार्यक्रम निर्धारित होने के बाद भी आईसीयू वार्ड के दस बेड तैयार नहीं कराए गए। एईएस एवं जेई पीड़ित बच्चों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए दस बेड का आईसीयू वार्ड है, लेकिन जिला अस्पताल के एमसीएच विंग में शिफ्ट होने के दो माह बाद भी जिम्मेदारों ने इसे दुरुस्त नहीं कराया। डिप्टी सीएम के आने की सुगबुगाहट शुरू होने पर छह बेड ही कामचलाऊ दुरुस्त हो सके, जबकि चार बेड रविवार तक ठीक कराए जाते रहे। यह तो गनीमत रही कि उनका कार्यक्रम निरस्त हो गया।
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