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बिगड़ैल हाथियों के लिए सुधार गृह बना दुधवा टाइगर रिजर्व

Wed, 10 Nov 2021 12:24 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 12:24 AM IST
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Dudhwa Tiger Reserve became a correction home for spoiled elephants
दुधवा में हाथी जय सिंह - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर-खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व हाथियों का संरक्षक और सुधार गृह बन गया है। मौजूदा समय में अलग-अलग जगहों से रेस्क्यू किए गए तीन हाथियों को यहां संरक्षित किया जा रहा है। इनमें एक हाथी बच्ची भी शामिल है जिसे एक तरह से दुधवा टाइगर रिजर्व ने गोद लिया है। इसका लालन पालन बड़े ही दुलार के साथ किया जा रहा है। इसके साथ ही दो बिगड़ैल नर हाथियों को सुधारा जा रहा है।
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करीब तीन साल पहले अपनी मां से बिछड़कर एक हथिनी की बच्ची बिजनौर जिले के जंगल में भूखी प्यासी भटक रही थी। वन विभाग ने इसे रेस्क्यू किया। इसके पालन पोषण की जिम्मेदारी दुधवा टाइगर रिजर्व को सौंपी गई है। दुधवा को यह हाथी की बच्ची नौ अक्तूबर 2018 को मिली थी। उस समय नवरात्र चल रहे थे। इसलिए इसका नाम दुर्गा रखा गया। दुर्गा के दुधवा में आते ही वह अपनी बाल सुलभ क्रिया कलापों से टाइगर रिजर्व के अधिकारियों, कर्मचारियों और महावतों की ही नहीं दुधवा के पालतू हाथियों की भी लाड़ली बन गई। यहीं नहीं पिछले तीन साल से हथिनी की यह बच्ची दुधवा आने वाले सैलानियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
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इसी तरह चंदौली जिले से एक नर हाथी को रेस्क्यू किया गया। इसका नाम मिट्ठू रखा गया। मिट्ठू एक साधु के स्वामित्व में था। मिट्ठू ने चंदौली में एक व्यक्ति को पटककर मार डाला था। इस अपराध के लिए पुलिस ने इस हाथी को वाराणसी वन प्रभाग की सुपुर्दगी में दिया था। इसके बाद अदालत ने इसे दुधवा टाइगर रिजर्व भेजने का आदेश जारी किया। मिट्ठू को 14 जून 2021 को दुधवा लाया गया। तब से इसके चाल चलन और व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है, जिसमें काफी हद तक कामयाबी भी मिली है। अब यह जेंटिल एनीमल की तरह व्यवहार कर रहा है। इसकी उम्र करीब 45 साल है।
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हाल ही चित्रकूट जिले से करीब 25 साल के एक नर हाथी को दुधवा लाया गया। यह हाथी कुख्यात डकैत ददुआ के कब्जे में था। इसके बाद ददुआ के विधायक भाई के स्वामित्व में आया। इसका न पंजीकरण था और न ही इसे संभालने वाला कोई महावत। वन विभाग ने जब इसे रेस्क्यू किया उस समय यह काफी बिगड़ैल था। चित्रकूट में कई घरों को तहस नहस कर चुका है। इसे सुधारने की जिम्मेदारी भी दुधवा टाइगर रिजर्व ने उठाई। 18 अक्तूबर 2021 को इसे दुधवा लाया गया, इस हाथी का नाम जयसिंह रखा गया है। इसे छह माह के लिए आइसोलेशन पर रखा गया है। अयूब और शानू नामक दो महावत इनकी सेवा में लगे हैं। अब यह महावतों से घुलने मिलने लगा है। (संवाद)
मनौवैज्ञानिक ढंग से बिगड़ैल हाथियों को सुधार रहे डॉ. दया
दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर हाथियों के सेहत की नियमित देखभाल तो कर ही रहे हैं। साथ ही बिगड़ैल हाथियों को सुधारने में मनोवैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। परिणाम स्वरूप मिट्ठू तो पूरी तरह आज्ञाकारी हाथी बन चुका है। जबकि जयसिंह के स्वभाव में सार्थक बदलाव आ रहा है। डॉ. दया शंकर को विश्वास है कि आने वाले कुछ ही दिनों में जय सिंह पूरी तरह सुधार कर सामान्य व्यवहार करने लगेगा।

पिछले तीन वर्षों में अलग-अलग जगहों से रेस्क्यू कर तीन हाथी दुधवा लाए गए हैं। इनमें एक हाथी बच्ची शामिल है। दो बिगडै़ल नर हाथियों को सुधारने का प्रयास चल रहा है। इस प्रयास के सार्थक परिणाम आ रहे हैं।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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