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दुधवा: संवारे जा रहे घास के मैदान... ताकि मजबूत हो खाद्य शृंखला
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दुधवा टाइगर रिजर्व का ग्रासलैंड
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व की खाद्य शृंखला को और मजबूत करने के लिए फाटा प्रबंधन का काम तेज कर दिया गया है। दुधवा में पिछले दो तीन वर्षों में कई चरणों में कार्यशालाओं के बाद विशेषज्ञों की सिफारिश के मुताबिक घास के मैदानों का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जा रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बी. प्रभाकर ग्रास लैंड मैनेजमेंट की मॉनीटरिंग खुद कर रहे हैं। उनका कहना है कि अनुपयोगी घास को हटाकर पौष्टिक घास का विस्तार किया जा रहा है।
दुधवा टाइगर रिजर्व में 66 फीसदी वुडलैंड यानि घने जंगल, 21 फीसदी घास के मैदान और 13 प्रतिशत वेटलैंड हैं, जो वन्यजीवों के लिए अनुकूल प्राकृतवास का निर्माण करते हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व में घास के मैदानों के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि दुधवा में गन्ना प्रजाति की नरकुल के अलावा थेमेडा, वेटवेरिया, एप्लूडिका म्यूटिका, इंपरेरा आदि लंबी घास बहुतायत हैं। इन घासों को हाथी और गैंडा जैसे बड़े जानवर बड़े चाव से खाते हैं।
इनके अलावा ये घास के मैदान टाइगर का सबसे अच्छा हैबिटेट माने जाते हैं। इनके अलावा यहां होने वाली मुलायम घास को हिरन और दूसरे छोटे शाकाहारी जीव बड़े चाव से खाते हैं। अध्ययन में यह पाया गया कि छोटे शाकाहारी वन्यजीवों के लिए सबसे ज्यादा पौष्टिक और नर्म डाइकैन्थियम घास दुधवा में कम मात्रा में है। विशेषज्ञों ने इस घास को विकसित करने पर बल दिया है। इस घास के लिए दुधवा की जलवायु उपयुक्त पाई गई है।
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इस घास की विशेषता यह है कि यह अधिक दिनों तक जीवित रहती है। पशुओं के चरने के बाद यह जल्दी ही बढ़ जाती है। इस घास को बारासिंगा, चीतल, पाढ़ा, कांकड़ हिरन, खरगोश आदि छोटे जानवर बड़े चाव से खाते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि इस घास के विस्तार के प्रयास होने चाहिए। ताकि दुधवा की खाद्य शृंखला और अधिक मजबूत हो। साथ ही जैवविविधता समृद्ध करने में मदद मिले।
बढ़ रही हैं हानिकारक वनस्पतियों की प्रजातियां
दुधवा टाइगर रिजर्व में जहां गैंडों और हाथियों के अलावा छोटे शाकाहारी जीवों के लिए उपयोगी और पौष्टिक घास मौजूद है वहीं लेंटाना, गाजर घास और जराकुश जैसी घासें भी हैं, जिन्हें जानवर पसंद नहीं करते। यह घासें और वनस्पतियां बहुत तेजी से फैलती हैं। यह वनस्पतियां अपना विस्तार इतनी तेजी से करती हैं कि उपयोगी वनस्पतियों को नष्टकर उनकी जगह ले लेती हैं। इनसे जंगल का ईकोसिस्टम खराब हो रहा है।
इस तरह किया जा रहा फाटा प्रबंधन
यहां के घास के मैदानों से चरणबद्घ ढंग से अनुपयोगी घासों को समूल नष्ट करके उन्हें जलाया जा रहा है। उसकी जगह उपयोगी घासों का प्राकृतिक विकास किया जा रहा है। अब तक दुधवा के आधे घास के मैदानों से यह हानिकारक घास हटाई जा चुकी है। अन्य घास के मैदानों में यह कार्य तेजी से किया जा रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने पिछले दिनों फाटा प्रबंधन के कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा में उन्होंने पाया कि दुधवा में घास मैदानों का प्रबंधन बेहतर ढंग से प्रबंधन हो रहा है।
दुधवा के घास के मैदानों के प्रबंधन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इसके तहत हानिकारक घासों को हटाकर उनकी जगह उपयोगी घासों का विस्तार किया जा रहा है। इससे दुधवा की खाद्य शृंखला मजबूत होगी।
बी. प्रभाकर, फील्ड डायरेक्टर लखीमपुर खीरी
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दुधवा टाइगर रिजर्व में 66 फीसदी वुडलैंड यानि घने जंगल, 21 फीसदी घास के मैदान और 13 प्रतिशत वेटलैंड हैं, जो वन्यजीवों के लिए अनुकूल प्राकृतवास का निर्माण करते हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व में घास के मैदानों के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि दुधवा में गन्ना प्रजाति की नरकुल के अलावा थेमेडा, वेटवेरिया, एप्लूडिका म्यूटिका, इंपरेरा आदि लंबी घास बहुतायत हैं। इन घासों को हाथी और गैंडा जैसे बड़े जानवर बड़े चाव से खाते हैं।
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इनके अलावा ये घास के मैदान टाइगर का सबसे अच्छा हैबिटेट माने जाते हैं। इनके अलावा यहां होने वाली मुलायम घास को हिरन और दूसरे छोटे शाकाहारी जीव बड़े चाव से खाते हैं। अध्ययन में यह पाया गया कि छोटे शाकाहारी वन्यजीवों के लिए सबसे ज्यादा पौष्टिक और नर्म डाइकैन्थियम घास दुधवा में कम मात्रा में है। विशेषज्ञों ने इस घास को विकसित करने पर बल दिया है। इस घास के लिए दुधवा की जलवायु उपयुक्त पाई गई है।
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इस घास की विशेषता यह है कि यह अधिक दिनों तक जीवित रहती है। पशुओं के चरने के बाद यह जल्दी ही बढ़ जाती है। इस घास को बारासिंगा, चीतल, पाढ़ा, कांकड़ हिरन, खरगोश आदि छोटे जानवर बड़े चाव से खाते हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि इस घास के विस्तार के प्रयास होने चाहिए। ताकि दुधवा की खाद्य शृंखला और अधिक मजबूत हो। साथ ही जैवविविधता समृद्ध करने में मदद मिले।
बढ़ रही हैं हानिकारक वनस्पतियों की प्रजातियां
दुधवा टाइगर रिजर्व में जहां गैंडों और हाथियों के अलावा छोटे शाकाहारी जीवों के लिए उपयोगी और पौष्टिक घास मौजूद है वहीं लेंटाना, गाजर घास और जराकुश जैसी घासें भी हैं, जिन्हें जानवर पसंद नहीं करते। यह घासें और वनस्पतियां बहुत तेजी से फैलती हैं। यह वनस्पतियां अपना विस्तार इतनी तेजी से करती हैं कि उपयोगी वनस्पतियों को नष्टकर उनकी जगह ले लेती हैं। इनसे जंगल का ईकोसिस्टम खराब हो रहा है।
इस तरह किया जा रहा फाटा प्रबंधन
यहां के घास के मैदानों से चरणबद्घ ढंग से अनुपयोगी घासों को समूल नष्ट करके उन्हें जलाया जा रहा है। उसकी जगह उपयोगी घासों का प्राकृतिक विकास किया जा रहा है। अब तक दुधवा के आधे घास के मैदानों से यह हानिकारक घास हटाई जा चुकी है। अन्य घास के मैदानों में यह कार्य तेजी से किया जा रहा है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ने पिछले दिनों फाटा प्रबंधन के कार्यों की समीक्षा की। समीक्षा में उन्होंने पाया कि दुधवा में घास मैदानों का प्रबंधन बेहतर ढंग से प्रबंधन हो रहा है।
दुधवा के घास के मैदानों के प्रबंधन का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इसके तहत हानिकारक घासों को हटाकर उनकी जगह उपयोगी घासों का विस्तार किया जा रहा है। इससे दुधवा की खाद्य शृंखला मजबूत होगी।
बी. प्रभाकर, फील्ड डायरेक्टर लखीमपुर खीरी