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Lakhimpur Kheri News: मेहमान परिंदों की चहचहाहट से गुलजार दुधवा के जलाशय
Wed, 05 Nov 2025 11:59 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 05 Nov 2025 11:59 PM IST
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दुधवा के प्राकृतिक सौंदर्य को निहारते प्रवासी पक्षी। स्रोत : वन विभाग
- फोटो : katra news
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व (डीटीआर) के जलाशय मेहमान परिंदों की चहचहाहट से गुलजार हैं। सर्दियों की दस्तक के साथ ही ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर विदेशी पक्षियों ने यहां दस्तक दी है। पर्यटकों को यहां का नजारा खूब भा रहा है।
प्रवासी पक्षियों ने किशनपुर अभयारण्य के झादीताल के अलावा दुधवा के भादीताल को अपना बसेरा बना लिया है। वन विभाग ने इन मेहमानों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए हैं। वन कर्मियों की टीम गठित कर निगरानी की जा रही है।
सर्दियों के मौसम में झादीताल चार महीने तक रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों से गुलजार रहता है। ये परिंदे झील के चारों तरफ लगे घने पेड़ों पर अपने घोंसले बनाकर प्रजनन करते हैं और अंडे देते हैं। ठंड खत्म होने तक इनके चूजे उड़ने लायक हो जाते हैं, तब यह झुंड में अपने वतन लौट जाते हैं।
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डीटीआर के एफडी डॉ. एच राजामोहन का कहना है कि दुधवा की सभी नदियों, झीलों और जलाशयों में प्रवासी पक्षियों की निगरानी के लिए वन कर्मियों की दो टीमें गठित की गई हैं, जो बारी-बारी से चौबीस घंटे तक निगाह रखेगी।
यहां मिलता है अनुकूल वातावरण
किशनपुर अभयारण्य का विशालकाय जलाशय, घना जंगल और घास के मैदान इन्हें प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराता है। यहां इन्हें पर्याप्त और पसंदीदा भोजन के साथ ही घोंसले बनाने के लिए घने पेड़ मिल जाते हैं। मौसम भी सर्दियों में इनके अनुकूल रहता है। यही कारण है कि प्रवासी पक्षी हर साल बड़ी संख्या में यहां आते हैं।
इन देशों से होता है आगमन
किशनपुर अभयारण्य के झादीताल में मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, लद्दाख, तिब्बत से खूबसूरत पक्षी आते हैं। इसमें स्पॉट बिल्ड, डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, ग्रे लेग गूस, बार हेडेड गूस, टस्टेड डक, कामन टील, पिन टील, बाम्हमनी डक, कूट, मूर हेन, अबलक कुर्चिया बत्तख समेत बीसों प्रजाति के पक्षी होते हैं।
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प्रवासी पक्षियों ने किशनपुर अभयारण्य के झादीताल के अलावा दुधवा के भादीताल को अपना बसेरा बना लिया है। वन विभाग ने इन मेहमानों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए हैं। वन कर्मियों की टीम गठित कर निगरानी की जा रही है।
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सर्दियों के मौसम में झादीताल चार महीने तक रंग-बिरंगे प्रवासी पक्षियों से गुलजार रहता है। ये परिंदे झील के चारों तरफ लगे घने पेड़ों पर अपने घोंसले बनाकर प्रजनन करते हैं और अंडे देते हैं। ठंड खत्म होने तक इनके चूजे उड़ने लायक हो जाते हैं, तब यह झुंड में अपने वतन लौट जाते हैं।
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डीटीआर के एफडी डॉ. एच राजामोहन का कहना है कि दुधवा की सभी नदियों, झीलों और जलाशयों में प्रवासी पक्षियों की निगरानी के लिए वन कर्मियों की दो टीमें गठित की गई हैं, जो बारी-बारी से चौबीस घंटे तक निगाह रखेगी।
यहां मिलता है अनुकूल वातावरण
किशनपुर अभयारण्य का विशालकाय जलाशय, घना जंगल और घास के मैदान इन्हें प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराता है। यहां इन्हें पर्याप्त और पसंदीदा भोजन के साथ ही घोंसले बनाने के लिए घने पेड़ मिल जाते हैं। मौसम भी सर्दियों में इनके अनुकूल रहता है। यही कारण है कि प्रवासी पक्षी हर साल बड़ी संख्या में यहां आते हैं।
इन देशों से होता है आगमन
किशनपुर अभयारण्य के झादीताल में मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, लद्दाख, तिब्बत से खूबसूरत पक्षी आते हैं। इसमें स्पॉट बिल्ड, डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, ग्रे लेग गूस, बार हेडेड गूस, टस्टेड डक, कामन टील, पिन टील, बाम्हमनी डक, कूट, मूर हेन, अबलक कुर्चिया बत्तख समेत बीसों प्रजाति के पक्षी होते हैं।

दुधवा के प्राकृतिक सौंदर्य को निहारते प्रवासी पक्षी। स्रोत : वन विभाग- फोटो : katra news