{"_id":"59271e014f1c1ba93e537877","slug":"drama-for-hours-in-the-district-hospital-for-survival-and-death-of-old-man","type":"story","status":"publish","title_hn":"वृद्धा के जीवित और मृत होने को लेकर जिला अस्प्ताल में घंटों चला ड्रामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वृद्धा के जीवित और मृत होने को लेकर जिला अस्प्ताल में घंटों चला ड्रामा
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 25 May 2017 11:40 PM IST
विज्ञापन
हंगामा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया मृत तो पड़ोस के क्लीनिक पर बता दिया जीवित
कई डॉक्टरों ने जब बताया मृत तब जाकर माने घरवाले
गुरुवार को जिला अस्पताल में पहुंची एक वृद्धा को डॉक्टरों ने मृत बता दिया, जबकि घर वाले उसे जीवित बता रहे थे। जब घर वालों को विश्वास नहीं हुआ तो वह उन्हें पड़ोस के क्लीनिक लेकर पहुंचे जहां पर एक युवक ने उन्हें जीवित बताया। इस पर वृद्धा जीवित है या मृत इस बात को लेकर जिला अस्पताल में काफी देर तक बवाल हुआ। वृद्धा को जीवित बता रहे घरवाले उन्हें एक निजी चिकित्सक के यहां लेकर पहुंचे और उनके मृत बताने पर ही घरवालों को विश्वास हुआ।
मामला शहर के मोहल्ला नई बस्ती का है। मोहल्ला निवासी गिरीश गुप्ता ने बताया कि उनकी मां शकुंतला की तबियत खराब चल रही थी, जिनका इलाज कानपुर में हो रहा था। जहां गुरुवार को उनकी मौत हो गई और उन्हें घर ले आए। उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार की तैयारियों के दौरान शरीर गर्म लगा और मुठ्ठी भी खुल गई, इस पर जीवित होने का एहसास हुआ, तब उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन मौजूद डॉक्टर ने उन्हें मृत बता दिया। इस पर पास के एक क्लीनिक पर जब ले गए तो वहां पल्स 87 बताई गई, फिर दुबारा उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टर मृत ही बताते रहे। एक ओर जहां डॉक्टर वृद्धा को मृत बता रहे थे। वहीं घरवाले जीवित होने की जिद कर रहे थे। काफी देर तक जीवित और मृत होने को लेकर अस्पताल में हंगामा होता रहा। इसके बाद घरवाले वृद्धा को लेकर एक अन्य निजी चिकित्सक के पास गए और जब उन्होंने भी मृत बताया तब जाकर घरवालों ने मृत माना।
कुछ लोग एक वृद्घा को लेकर आए थे जो मृत थी, लेकिन घरवाले नहीं मान रहे थे। इस दौरान घरवाले वृद्घा लेकर पड़ोस के क्लीनिक पर तो वहां पल्स 87 बताई गई, इस पर उन्हें फिर से अस्पताल लेकर आए। जब घरवालों का विश्वास नहीं हुआ तो डॉ. राजपूत को बुलाकर उन्हें भी दिखवाया, उन्होंने भी मृत बताया, लेकिन घरवाले मृत ना मानकर अस्पताल से लेकर चले गए।
विज्ञापन
डॉ.डी कुमार जिलाअस्पताल
विज्ञापन
कई डॉक्टरों ने जब बताया मृत तब जाकर माने घरवाले
गुरुवार को जिला अस्पताल में पहुंची एक वृद्धा को डॉक्टरों ने मृत बता दिया, जबकि घर वाले उसे जीवित बता रहे थे। जब घर वालों को विश्वास नहीं हुआ तो वह उन्हें पड़ोस के क्लीनिक लेकर पहुंचे जहां पर एक युवक ने उन्हें जीवित बताया। इस पर वृद्धा जीवित है या मृत इस बात को लेकर जिला अस्पताल में काफी देर तक बवाल हुआ। वृद्धा को जीवित बता रहे घरवाले उन्हें एक निजी चिकित्सक के यहां लेकर पहुंचे और उनके मृत बताने पर ही घरवालों को विश्वास हुआ।
मामला शहर के मोहल्ला नई बस्ती का है। मोहल्ला निवासी गिरीश गुप्ता ने बताया कि उनकी मां शकुंतला की तबियत खराब चल रही थी, जिनका इलाज कानपुर में हो रहा था। जहां गुरुवार को उनकी मौत हो गई और उन्हें घर ले आए। उन्होंने बताया कि अंतिम संस्कार की तैयारियों के दौरान शरीर गर्म लगा और मुठ्ठी भी खुल गई, इस पर जीवित होने का एहसास हुआ, तब उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन मौजूद डॉक्टर ने उन्हें मृत बता दिया। इस पर पास के एक क्लीनिक पर जब ले गए तो वहां पल्स 87 बताई गई, फिर दुबारा उन्हें अस्पताल ले गए, लेकिन डॉक्टर मृत ही बताते रहे। एक ओर जहां डॉक्टर वृद्धा को मृत बता रहे थे। वहीं घरवाले जीवित होने की जिद कर रहे थे। काफी देर तक जीवित और मृत होने को लेकर अस्पताल में हंगामा होता रहा। इसके बाद घरवाले वृद्धा को लेकर एक अन्य निजी चिकित्सक के पास गए और जब उन्होंने भी मृत बताया तब जाकर घरवालों ने मृत माना।
विज्ञापन
कुछ लोग एक वृद्घा को लेकर आए थे जो मृत थी, लेकिन घरवाले नहीं मान रहे थे। इस दौरान घरवाले वृद्घा लेकर पड़ोस के क्लीनिक पर तो वहां पल्स 87 बताई गई, इस पर उन्हें फिर से अस्पताल लेकर आए। जब घरवालों का विश्वास नहीं हुआ तो डॉ. राजपूत को बुलाकर उन्हें भी दिखवाया, उन्होंने भी मृत बताया, लेकिन घरवाले मृत ना मानकर अस्पताल से लेकर चले गए।
विज्ञापन
डॉ.डी कुमार जिलाअस्पताल