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डोमेसिल क्रेन ने बढ़ाई झादीताल की रौनक
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किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल पर उड़ान भरती डेमोसिल क्रेन।
- फोटो : LAKHIMPUR
अनिल मिश्र
बांकेगंज। बाघ, गैंडा, हिरन जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के दीदार की लालसा में दुधवा नेशनल पार्क आने वाले सैलानियों को किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल में कलरव करते रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों की खूबसूरत दुनिया भी आकर्षित करती है। इस बार ठंड देर से शुरू होने के बावजूद पिछले सालों की अपेक्षा प्रवासी परिंदों की संख्या में कमी नहीं आई है। प्रवासी पक्षियों में सबसे आकर्षण का केंद्र होने वाली (डेमोसिल क्रेन) इस बार काफी अधिक संख्या में दिखलाई पड़ने से पक्षी विशेषज्ञ और सैलानी बेहद खुश हैं।
पक्षी विशेषज्ञ दुधवा नेशनल पार्क के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर सतपाल सिंह, प्रियांशु आदि का कहना है कि किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल में सर्दियों के मौसम में ठंडे देशों से आने वाले विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों में डोमेसिल क्रेन सबसे खूबसूरत पक्षियों में से एक है। यह हर साल दुधवा नेशनल पार्क के भादीताल समेत दक्षिण खीरी वन प्रभाग की सेमरई झील सहित जिले के विभिन्न जलाशयों में आकर कुछ दिन प्रवास करने के बाद राजस्थान की ओर चले जाते हैं।
राजस्थान में इसे कुरजां के नाम से जाना जाता है। इसका प्रवास यहां 10 से 15 दिन का होता है। हर साल किशनपुर सेंक्चुरी जाने वाले सैलानियों और पक्षी प्रेमियों विनोद गोयल, हरीकिशन अग्रवाल, अर्जुन गोयल आदि का कहना है कि झादीताल में हर साल की तरह इस साल भी काफी बड़ी संख्या में डोमेसिल क्रेन दिखलाई पड़ने से झील की रौनक ही अलग है। पिछले दस सालों में वन विभाग की लिस्टिंग और पक्षी विशेषज्ञों के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर तराई के जलाशयों में आने वाले प्रवासी परिंदों की संख्या और प्रजातियों में बढ़ोतरी हो रही है। (संवाद)
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किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल में पिछले सालों की तरह इस साल भी डोमेसिल क्रेन काफी अधिक संख्या में आई है। यहां आने वाले प्रवासी परिंदों की सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। वन कर्मियों की टीमें चौबीस घंटे बारी-बारी से झील के चारों ओर विदेशी मेहमानों की निगरानी कर रहीं हैं।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/फील्ड निदेशक, दुधव टाइगर रिजर्व।
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बांकेगंज। बाघ, गैंडा, हिरन जैसे दुर्लभ वन्यजीवों के दीदार की लालसा में दुधवा नेशनल पार्क आने वाले सैलानियों को किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल में कलरव करते रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों की खूबसूरत दुनिया भी आकर्षित करती है। इस बार ठंड देर से शुरू होने के बावजूद पिछले सालों की अपेक्षा प्रवासी परिंदों की संख्या में कमी नहीं आई है। प्रवासी पक्षियों में सबसे आकर्षण का केंद्र होने वाली (डेमोसिल क्रेन) इस बार काफी अधिक संख्या में दिखलाई पड़ने से पक्षी विशेषज्ञ और सैलानी बेहद खुश हैं।
पक्षी विशेषज्ञ दुधवा नेशनल पार्क के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर, वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर सतपाल सिंह, प्रियांशु आदि का कहना है कि किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल में सर्दियों के मौसम में ठंडे देशों से आने वाले विभिन्न प्रजातियों के रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों में डोमेसिल क्रेन सबसे खूबसूरत पक्षियों में से एक है। यह हर साल दुधवा नेशनल पार्क के भादीताल समेत दक्षिण खीरी वन प्रभाग की सेमरई झील सहित जिले के विभिन्न जलाशयों में आकर कुछ दिन प्रवास करने के बाद राजस्थान की ओर चले जाते हैं।
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राजस्थान में इसे कुरजां के नाम से जाना जाता है। इसका प्रवास यहां 10 से 15 दिन का होता है। हर साल किशनपुर सेंक्चुरी जाने वाले सैलानियों और पक्षी प्रेमियों विनोद गोयल, हरीकिशन अग्रवाल, अर्जुन गोयल आदि का कहना है कि झादीताल में हर साल की तरह इस साल भी काफी बड़ी संख्या में डोमेसिल क्रेन दिखलाई पड़ने से झील की रौनक ही अलग है। पिछले दस सालों में वन विभाग की लिस्टिंग और पक्षी विशेषज्ञों के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर तराई के जलाशयों में आने वाले प्रवासी परिंदों की संख्या और प्रजातियों में बढ़ोतरी हो रही है। (संवाद)
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किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल में पिछले सालों की तरह इस साल भी डोमेसिल क्रेन काफी अधिक संख्या में आई है। यहां आने वाले प्रवासी परिंदों की सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। वन कर्मियों की टीमें चौबीस घंटे बारी-बारी से झील के चारों ओर विदेशी मेहमानों की निगरानी कर रहीं हैं।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक/फील्ड निदेशक, दुधव टाइगर रिजर्व।