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Lakhimpur Kheri News: बच्ची की हत्या में पूछताछ को हिरासत में लिए गए संदिग्ध की मौत... बवाल
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मितौली (लखीमपुर खीरी)। पकरिया जलालपुर में पांच साल की बच्ची की हत्या के मामले में पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत में लिए गए इसी गांव के आसाराम (48) की सात घंटे बाद मौत हो गई। परिजनों ने थर्ड डिग्री से मौत का आरोप लगाते हुए शनिवार सुबह लखीमपुर-मैगलगंज मार्ग पर कस्ता चौराहे पर शव रखकर जाम लगा दिया। छह घंटे बाद मामले में पिपरझला पिकेट प्रभारी समेत दो पुलिसकर्मियों पर हत्या और अवैध रूप से हिरासत में रखने का मुकदमा दर्ज होने के बाद ही भीड़ मौके से हटी।
अनूप कुमार की बेटी अंशु दो अप्रैल की शाम लापता हो गई थी, अगले दिन घर से सौ मीटर दूर झाड़ियों में उसका शव मिला था। पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई थी। इस मामले में क्राइम ब्रांच समेत पुलिस की तीन टीमें हत्यारे की सुरागरसी में लगी हुई थीं। इसी सिलसिले में पिपरझला पिकेट के इंचार्ज लाल चंद और हेड कांस्टेबल बृजलाल शुक्रवार दोपहर दो बजे आसाराम को थाने ले आए।
आसाराम के बेटे केपी सिंह ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे उसके पास थाने से कई बार फोन आया। उससे अपने पिता को ले जाने के लिए कहा गया। छोटा बेटा अंकित अपने रिश्तेदार के साथ जब तक थाने पहुंचा तब तक पुलिस ने आसाराम को मितौली सीएचसी भेज दिया था। वहां पहुंचे अंकित को आसाराम बेहोशी की हालत में भर्ती मिले। कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने आसाराम को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां पहुंचने पर डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस पर परिजन शव घर ले आए।
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आसाराम की पीठ पर चोटों और जांघ पर करंट के निशान देख परिजनों व ग्रामीणों का आक्रोश भड़क गया। सैकड़ों की भीड़ शनिवार सुबह आठ बजे ट्रैक्टर-ट्रॉली में शव रखकर पकरिया जलालपुर गांव से करीब पांच किमी दूर कस्ता चौराहे पर पहुंची और शव सड़क पर रखकर हंगामा करने लगी। सूचना पर पहुंचे पुलिसकर्मियों के समझाने के दौरान उनकी कई बार उनसे नोकझोंक हुई। जाम लगता देखकर छह थानों के फोर्स के साथ-साथ पीएसी की एक कंपनी भी बुला ली गई। सीडीओ अनिल कुमार सिंह, एएसपी नैपाल सिंह के समझाने पर परिजन माने। तब दोपहर करीब ढाई बजे शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। बाद में पुलिस ने मृतक के बेटे रोहित की तहरीर पर पिपरझला पिकेट प्रभारी और हेड कांस्टेबल बृजलाल के विरुद्ध हत्या और अवैध रूप से कैद में रखने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया। हालांकि मुकदमे में पिकेट प्रभारी के नाम का खुलासा नहीं किया गया है।
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अनूप कुमार की बेटी अंशु दो अप्रैल की शाम लापता हो गई थी, अगले दिन घर से सौ मीटर दूर झाड़ियों में उसका शव मिला था। पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या की पुष्टि हुई थी। इस मामले में क्राइम ब्रांच समेत पुलिस की तीन टीमें हत्यारे की सुरागरसी में लगी हुई थीं। इसी सिलसिले में पिपरझला पिकेट के इंचार्ज लाल चंद और हेड कांस्टेबल बृजलाल शुक्रवार दोपहर दो बजे आसाराम को थाने ले आए।
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आसाराम के बेटे केपी सिंह ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे उसके पास थाने से कई बार फोन आया। उससे अपने पिता को ले जाने के लिए कहा गया। छोटा बेटा अंकित अपने रिश्तेदार के साथ जब तक थाने पहुंचा तब तक पुलिस ने आसाराम को मितौली सीएचसी भेज दिया था। वहां पहुंचे अंकित को आसाराम बेहोशी की हालत में भर्ती मिले। कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने आसाराम को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां पहुंचने पर डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस पर परिजन शव घर ले आए।
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आसाराम की पीठ पर चोटों और जांघ पर करंट के निशान देख परिजनों व ग्रामीणों का आक्रोश भड़क गया। सैकड़ों की भीड़ शनिवार सुबह आठ बजे ट्रैक्टर-ट्रॉली में शव रखकर पकरिया जलालपुर गांव से करीब पांच किमी दूर कस्ता चौराहे पर पहुंची और शव सड़क पर रखकर हंगामा करने लगी। सूचना पर पहुंचे पुलिसकर्मियों के समझाने के दौरान उनकी कई बार उनसे नोकझोंक हुई। जाम लगता देखकर छह थानों के फोर्स के साथ-साथ पीएसी की एक कंपनी भी बुला ली गई। सीडीओ अनिल कुमार सिंह, एएसपी नैपाल सिंह के समझाने पर परिजन माने। तब दोपहर करीब ढाई बजे शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। बाद में पुलिस ने मृतक के बेटे रोहित की तहरीर पर पिपरझला पिकेट प्रभारी और हेड कांस्टेबल बृजलाल के विरुद्ध हत्या और अवैध रूप से कैद में रखने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया। हालांकि मुकदमे में पिकेट प्रभारी के नाम का खुलासा नहीं किया गया है।