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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Turn out of the contracted bus depot driver

डिपो से निकलते ही बदल जाते  हैं अनुबंधित बसों के चालक 

Fri, 04 Nov 2016 10:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। Updated Fri, 04 Nov 2016 10:43 PM IST
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Turn out of the contracted bus depot driver
scania buses
जान जोखिम में डालकर सफर करते हैं लोग
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चालक परिचालक की मिलीभगत से होता है खेल
संबंधित अधिकारी जानकर भी बने रहते हैं अनजान

रोडवेज की अनुबंधित बसों में यात्रा करना खतरनाक होता जा रहा है, क्योंकि डिपो से निकलने के बाद बस की स्टेयरिंग ऐसे लोगों को सौंप दी जाती हैं, जिनके पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस होता है और न ही वे बस चलाने को पूरी तरह से फिट। इस कारनामे को चालक, परिचालक और बस मालिक की मिलीभगत से अंजाम दिया जाता है। इसका खुलासा गुरुवार को गोला की एक बस के पलट जाने पर हुआ। डिपो से निकलने के बाद यह बस एक ऐसे युवक को सौंप दी गई, जो एक पैर से विकलांग था और उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था।
गुरुवार को लखीमपुर डिपो से 30 सवारियां लेकर शाहजहांपुर के लिए रवाना हुई गोला डिपो की बस संख्या यूपी 31 टी 4418 लालपुुर बैरियर से कुछ दूर आगे जाकर एक पेट्रोल पंप के पास पलट गई थी। इस घटना में कई यात्री घायल हो गए थे, उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस घटना में भी विभागीय अधिकारियों की लापरवाही और चालक परिचालक की साठगांठ उजागर हुई है। बस के परिचालक इशरत हुसैन ने बस पलट जाने का कारण स्टेयरिंग का फेल होना बताते हुए चालक का नाम चंदन बताया था। जबकि डिपो कर्मचारियों का कहना है कि ड्यूटी स्लिप पर चालक का नाम तरसेम सिंह और परिचालक का नाम इशरत हुसैन दर्ज है।
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छुट्टी को लेकर होता है ये खेल 
जब किसी चालक को छुट्टी पर जाना होता है तो वह अपने बदले किसी और को बस की स्टेयरिंग थमा देता है। अधिकतर यह खेल बस मालिक को अंधेरे में रखकर खेला जाता है, लेकिन कभी कभार मालिक द्वारा बस के किलोमीटर पूरे कराने को लेकर चालक के सामने एक लड़का देकर छ्ट्टी पर जाने की शर्त रख दी जाती है।
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परिचालक की होती है साठगांठ
बस से चालक के बदल जाने में परिचालकों की भी साठगांठ होती है। ड्यूूटी स्लिप लेेने के दौरान परिचालक अपना और चालक का नाम उस पर दर्ज करवा देता है और बस के डिपो से बाहर निकलते  ही उसका चालक बदल जाता है। वहीं कभी कभार चेकिंग स्टाप के दौरान परिचालक चालक का वहीं नाम बता देता है जो ड्यूटी स्लिप पर अंकित होता है।

अधिकारियों की लापरवाही से होता है खेल
चेकिंग के दौरान यातायात अधीक्षक एवं सहायक यातायात निरीक्षक सिर्फ यात्रियों की संख्या का मिलान ही मशीन में अंकित यात्री संख्या से करते हैं, लेकिन बस कौन चला रहा है, उसके पास डीएल है कि नहीं, इस बारे में जानकारी नहीं की जाती है। यहां तक कि चालक से उसका नाम तक पूछना उचित नहीं समझा जाता है, जिससे बसों के चालक बदल जाने की प्रवृत्ति पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।


मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों ने नहीं दी। अब जानकारी हुई है इसकी जांच कराऊंगा। चेकिंग के दौरान चालक की भी पुष्टि की जानी चाहिए। इस मामले में जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-मनोज कुमार त्रिवेदी, आरएम, हरदोई क्षेत्र
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