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बाघों को जंगल से ज्यादा रास आ रहा खेतों में बसेरा
अशोक निगम/लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 22 Aug 2016 10:05 PM IST
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जंगल में नहीं रहा भोजन, इंसानों पर बढ़ रहे हैं हमले
जंगल और जंगली जीवों के संरक्षण और रखरखाव में कहीं न कहीं चूक जरूर है। इसके चलते जंगली जानवरों को अपना घर छोड़ कर जंगल से बाहर का रुख करना पड़ रहा है। यह स्थिति कोई पहली बार नहीं आई है। पिछले 20-25 वर्षों में बाघ और तेंदुओं के जंगल से बाहर निकलकर हमलावर होने की घटनाओं में इजाफा हुआ है। अब इस मुद्दे पर लीक से हटकर नए सिरे से अध्ययन की जरूरत महसूस की जा रही है।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज की गदनिया और खरेहटा बीट में बाघ-बाघिन के हमले में पांच दिनों के अंदर एक किशोरी समेत तीन लोगों के मारे जाने के बाद वन विभाग सक्रिय हुआ और बाघ को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ने की कवायद शुरू की है, जबकि प्रयास इस बात के होने चाहिए कि बाघों के जंगल से बाहर निकलने की स्थिति न पैदा हो। बाघों के जंगल से बाहर आने के कारणों पर भी गहन रूप से विचार मंथन करने की जरूरत है।
आबादी बढ़ने के साथ जंगलों का संकुचन और जंगल में बढ़ती इंसानी दखलंदाजी तो वन्यजीवों के जंगल से बाहर निकलने का एक बड़ा कारण है। पिछले 20-25 वर्षों में नेपाली नदियों में आने वाली बाढ़ ने भी जंगल का बड़ा नुकसान किया है। इससे जंगलों का स्वरूप बदल रहा है। घास के मैदानों की कमी से हिरन समेत कई शाकाहारी जानवरों की आबादी घटी है। इससे जंगली जानवरों की खाद्य शृंखला ही छिन्न भिन्न हो गई। भोजन की कमी होने से बाघ और तेंदुओं को जंगल से बाहर खेतों में अपना भोजन तलाशना पड़ रहा है।
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हर साल बाढ़ आने और जंगलों में लंबे समय तक जलभराव रहने के कारण भी हिरन, जंगली सुअर आदि जानवर जंगल से बाहर आते हैं तो उनके पीछे बाघ भी खेतों में शिकार की तलाश में डेरा डाल देते हैं। आम तौर पर बाघों के जंगल से बाहर आने की घटनाएं सर्दियों के मौसम में होती हैं जब जंगल से सटे खेतों में गन्ने की फसल खड़ी होती है। ऐसे समय में जंगली सुअर गन्ने के खेतों में आ जाते हैं। तब बाघों को छिपने के लिए गन्ने की फसल के साथ पर्याप्त भोजन भी मिल जाता है। बरसात के मौसम में बाघों के जंगल से बाहर आने की घटनाएं पहली बार हुई हैं। इसका कारण जंगल में जलभराव को माना जा रहा है।
बाघों के जंगल से बाहर आने के हैं ये हैं कारण
-जंगल भूमि पर अतिक्रमण, जंगलों का संकुचन
-आबादी बढ़ने से जंगलों पर बढ़ता जैविक दबाव
-जंगलों पर इंसानी निर्भरता और बाघ के घर में दखल
-घास के मैदानों की कमी से खाद्य शृंखला का टूटना
-नेपाली नदियों से आने वाली बाढ़ और जलभराव
नेपाली नदियों से आने वाली बाढ़ के कारण जंगल की खाद्य शृंखला छिन्न भिन्न हो रही है। कभी भोजन की तलाश में तो कभी अपनी सुरक्षा के लिए बाघ और तेंदुए जंगल से बाहर आ रहे हैं। बाघों का जंगल से बाहर आना न तो इंसानों के हित में है न जंगली जानवरों के। तराई में वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से अध्ययन कर उपाय किए जाने की जरूरत है।
-डॉ. वीपी सिंह
पूर्व सदस्य-राज्य वन्य जीव सलाहकार परिषद उत्तर प्रदेश
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जंगल और जंगली जीवों के संरक्षण और रखरखाव में कहीं न कहीं चूक जरूर है। इसके चलते जंगली जानवरों को अपना घर छोड़ कर जंगल से बाहर का रुख करना पड़ रहा है। यह स्थिति कोई पहली बार नहीं आई है। पिछले 20-25 वर्षों में बाघ और तेंदुओं के जंगल से बाहर निकलकर हमलावर होने की घटनाओं में इजाफा हुआ है। अब इस मुद्दे पर लीक से हटकर नए सिरे से अध्ययन की जरूरत महसूस की जा रही है।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज की गदनिया और खरेहटा बीट में बाघ-बाघिन के हमले में पांच दिनों के अंदर एक किशोरी समेत तीन लोगों के मारे जाने के बाद वन विभाग सक्रिय हुआ और बाघ को ट्रेंकुलाइज कर पकड़ने की कवायद शुरू की है, जबकि प्रयास इस बात के होने चाहिए कि बाघों के जंगल से बाहर निकलने की स्थिति न पैदा हो। बाघों के जंगल से बाहर आने के कारणों पर भी गहन रूप से विचार मंथन करने की जरूरत है।
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आबादी बढ़ने के साथ जंगलों का संकुचन और जंगल में बढ़ती इंसानी दखलंदाजी तो वन्यजीवों के जंगल से बाहर निकलने का एक बड़ा कारण है। पिछले 20-25 वर्षों में नेपाली नदियों में आने वाली बाढ़ ने भी जंगल का बड़ा नुकसान किया है। इससे जंगलों का स्वरूप बदल रहा है। घास के मैदानों की कमी से हिरन समेत कई शाकाहारी जानवरों की आबादी घटी है। इससे जंगली जानवरों की खाद्य शृंखला ही छिन्न भिन्न हो गई। भोजन की कमी होने से बाघ और तेंदुओं को जंगल से बाहर खेतों में अपना भोजन तलाशना पड़ रहा है।
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हर साल बाढ़ आने और जंगलों में लंबे समय तक जलभराव रहने के कारण भी हिरन, जंगली सुअर आदि जानवर जंगल से बाहर आते हैं तो उनके पीछे बाघ भी खेतों में शिकार की तलाश में डेरा डाल देते हैं। आम तौर पर बाघों के जंगल से बाहर आने की घटनाएं सर्दियों के मौसम में होती हैं जब जंगल से सटे खेतों में गन्ने की फसल खड़ी होती है। ऐसे समय में जंगली सुअर गन्ने के खेतों में आ जाते हैं। तब बाघों को छिपने के लिए गन्ने की फसल के साथ पर्याप्त भोजन भी मिल जाता है। बरसात के मौसम में बाघों के जंगल से बाहर आने की घटनाएं पहली बार हुई हैं। इसका कारण जंगल में जलभराव को माना जा रहा है।
बाघों के जंगल से बाहर आने के हैं ये हैं कारण
-जंगल भूमि पर अतिक्रमण, जंगलों का संकुचन
-आबादी बढ़ने से जंगलों पर बढ़ता जैविक दबाव
-जंगलों पर इंसानी निर्भरता और बाघ के घर में दखल
-घास के मैदानों की कमी से खाद्य शृंखला का टूटना
-नेपाली नदियों से आने वाली बाढ़ और जलभराव
नेपाली नदियों से आने वाली बाढ़ के कारण जंगल की खाद्य शृंखला छिन्न भिन्न हो रही है। कभी भोजन की तलाश में तो कभी अपनी सुरक्षा के लिए बाघ और तेंदुए जंगल से बाहर आ रहे हैं। बाघों का जंगल से बाहर आना न तो इंसानों के हित में है न जंगली जानवरों के। तराई में वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर नए सिरे से अध्ययन कर उपाय किए जाने की जरूरत है।
-डॉ. वीपी सिंह
पूर्व सदस्य-राज्य वन्य जीव सलाहकार परिषद उत्तर प्रदेश