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तैंतीस साल बाद शहर ने फिर झेला कर्फ्यू
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 03 Mar 2017 11:30 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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शहर में सांप्रदायिक तनाव और बवाल के बाद बृहस्पतिवार की रात लगे कर्फ्यू ने 33 साल पहले की याद ताजा कर दी। सांप्रदायिक सौहार्द के लिए अपनी पहचान रखने वाले खीरी जिले में इससे पहले कभी कोई सांप्रदायिक बवाल नहीं हुआ। यदि कभी कोई तनाव की स्थिति आई भी तो मामले को दोनों पक्षों ने मिल बैठ कर सुलझा लिया। इस बार यह पहला मौका है जब सांप्रदायिक तनाव के लिए कर्फ्यू लगा है।
इससे पहले 1984 मेें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश भर में भड़की हिंसा और दंगों के बावजूद लखीमपुर पूरी तरह शांत रहा था लेकिन एहतियातन लखीमपुर में कर्फ्यू लगाया गया था। तीन दिन चले इस कर्फ्यू के दौरान जिले में पूरी तरह शांति बनी रही और यहां की जनता ने शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया। हालांकि कर्फ्यू के दौरान अफवाहों का बाजार गर्म रहा लेकिन शांति बनी रही।
शहर में बहुत से ऐसे युवा हैं जिनका जन्म 1984 के बाद हुआ। उन्होंने इससे पहले कभी कर्फ्यू के हालात नहीं देखे थे। तो बहुत से ऐसे भी युवा हैं जो 1984 में काफी छोटे थे उन्हें कर्फ्यू की याद भी नहीं है। ऐसे लोगों को कर्फ्यू झेलने का यह पहला कटु अनुभव है। एक दिन के कर्फ्यू में ही लोग चाय पान तक को तरस गए। बच्चों को भी एक दिन बिना दूध के ही रहना पड़ा।
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इससे पहले 1984 मेें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश भर में भड़की हिंसा और दंगों के बावजूद लखीमपुर पूरी तरह शांत रहा था लेकिन एहतियातन लखीमपुर में कर्फ्यू लगाया गया था। तीन दिन चले इस कर्फ्यू के दौरान जिले में पूरी तरह शांति बनी रही और यहां की जनता ने शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया। हालांकि कर्फ्यू के दौरान अफवाहों का बाजार गर्म रहा लेकिन शांति बनी रही।
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शहर में बहुत से ऐसे युवा हैं जिनका जन्म 1984 के बाद हुआ। उन्होंने इससे पहले कभी कर्फ्यू के हालात नहीं देखे थे। तो बहुत से ऐसे भी युवा हैं जो 1984 में काफी छोटे थे उन्हें कर्फ्यू की याद भी नहीं है। ऐसे लोगों को कर्फ्यू झेलने का यह पहला कटु अनुभव है। एक दिन के कर्फ्यू में ही लोग चाय पान तक को तरस गए। बच्चों को भी एक दिन बिना दूध के ही रहना पड़ा।
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