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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   The young man was shot and killed

युवक ने गोली मारकर जान दी

Fri, 01 May 2015 06:55 PM IST
खमरिया
खमरिया Updated Fri, 01 May 2015 06:55 PM IST
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चौकी क्षेत्र के गांव बसड़िया में गोद भराई की रस्म के एक दिन पूर्व युवक ने तमंचे से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस और परिवार वालों के अनुसार युवक अवसाद से ग्रस्त था, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया।
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थाना क्षेत्र ईसानगर के गांव बसड़िया निवासी जगदीश प्रसाद के 22 वर्षीय पुत्र चंद्रशेखर उर्फ मनोज ने गुरुवार की रात अपने ही घर के कमरे में रात को 315 बोर तमंचे से सीने पर गोली मार ली जिससे मौके पर ही मौत हो गई। जब चंद्रशेखर ने गोली मारी उस समय जगदीश के पड़ोस में एक और शादी थी वहां भी फायरिंग और आतिशबाजी हो रही थी। इसलिए मनोज के कमरे में चली गोली की आवाज पर घर के लोगों का ध्यान नहीं गया। सुबह जब मनोज उठकर नहीं आया तो परिवार वाले उसके कमरे में गए। वहां उसको मृत देखकर घर के लोगों को होश उड़ गए। घर के लोगों ने पुलिस को सूचना दी। मृतक के पिता जगदीश ने बताया कि चंद्र्रशेखर अवसाद से ग्रस्त था, उसका लखीमपुर के एक डॉक्टर के यहां इलाज चल रहा था। शुक्रवार को उसकी गोद भराई थी। इस संबंध में एसओ ईसानगर आरके यादव ने बताया प्रथम दृष्टया मामला अवसाद का ही लग रहा है। तमंचा कब्जे में ले लिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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मातम में बदलीं खुशियां
खमरिया।
जगदीश प्रसाद के चार बेटों में चंद्र्रशेखर दूसरे नंबर का था। जगदीश ने बताया कि बड़े बेटे और चंद्रशेखर से छोटे बेटे की शादी हो चुकी है। चंद्रशेखर की शादी भी क्षेत्र के गांव घुरघुट्टा में तय की गई थी। तीन जून को उसकी शादी थी। मनोज ने घरवालों को बताया भी था कि वह अवसाद से परेशान हैं। चंद्रशेखर ने बताया था कि वह अपने आपको बेहद कमजोर समझता है। हालांकि चंद्रशेखर का लखीमपुर के एक डॉक्टर से इलाज चल रहा था। इससे पहले जब चंद्रशेखर की शादी परिवार वालों ने तय की थी तो उसने मना किया था, लेकिन इधर फिर परिवार वालों ने उसकी शादी तय कर दी तभी से मनोज अंदर ही अंदर परेशान रहता था और किसी से कुछ कह भी नहीं पाता था। परिवार के लोग भी यह बात समझ नहीं पाए परिवार के लोगों ने समझा कि इलाज से मनोज स्वस्थ हो जाएगा। शुक्रवार को उसे गोदभराई में जाना था। इधर कई दिनों से वह  मायूस था। शुक्रवार को जब मनोज के कमरे से उसकी लाश मिली तो घर में खुशी का माहौल अचानक मातम में बदल गया।
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