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डीएम बोले, बांस बल्लियों का यह पुल तो नेपाल में है
पलियाकलां/गौरीफंटा (लखीमपुर खीरी)।
Updated Mon, 25 Apr 2016 10:11 PM IST
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पुल
- फोटो : अमर उजाला
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अवैध पुल की सूचना पर दौड़े अफसर, सालों पुराना है मोहाना नदी पर बना पुल
अफसर बोले......
साले कटान गांव के लोगों ने आवागमन के लिए बनाया अस्थायी पुल
नेपाली अधिकारी बोले सीमा से पांच सौ मीटर पहले हुआ है निर्माण
भारत नेपाल सीमा पर अचानक से चर्चा में आया मोहाना नदी पर बना पुल रातों रात नहीं बना, बल्कि सालों पुराना है। अवैध पुल की चर्चा पर एसएसबी, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मौका मुआयना किया तो पता चला कि भारत में नहीं है। डीएम का कहना है कि बांस बल्लियों का यह पुल काफी पुराना है और नोमैस लैंड से करीब पांच सौ मीटर भीतर खेत के आगे नेपाल की ओर है। फिलहाल इस पुल से सुरक्षा व्यवस्था को कोई खतरा नहीं है। बार्डर पर एसएसबी, कस्टम, आईबी, सेल्स टैक्स, एलआईयू और सिविल पुलिस मुस्तैद है।
भारत नेपाल सीमा के पिलर संख्या 170 एफ के पास नेपाली नदी मोहाना पर तस्करों द्वारा लकड़ी के पुल का निर्माण रातोरात कर देने का मामला सुर्खियों में आया। इस पर भारत की सुरक्षा एजेंसियों समेत प्रशासनिक अमले में भी खलबली मच गई और अधिकारियों ने नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों समेत प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क साधा। इस पर नेपाल के पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों ने मुआयना किया। उनके मुताबिक मुआयने में यह पुल उन्होंने नेपाल में पाया है जो कि नोमैस लैंड से करीब पांच सौ मीटर पहले नेपाल देश में स्थित है। उन्हीं के मुताबिक यहां पड़ने वाले नेपाली गांव साले कटान के किसानों ने अपनी जरूरतों के हिसाब से इस अस्थाई पुल का निर्माण किया है, जिससे पैदल या फिर साइकिल से गुजरा जा सकता है। हालांकि इस पुल के आसपास कोई सड़क नहीं है लेकिन सीमा के करीब बने पुल के गलत इस्तेमाल को लेकर अधिकारी बेपरवाह हैं।
39वीं वाहिनी एसएसबी, गदनियां के प्रभारी कमांडेंट एसडी शेरखानी कहते हैं कि सीमा पर तस्करों द्वारा बनाए गए अवैध पुल की जानकारी लगते ही वह सोमवार को मौके पर गए, जिसमें पाया कि पुल नेपाल से सीधे भारत को नहीं जोड़ रहा है। बल्कि नेपाल से नेपाल के बीच ही किसानों के काम में आ रहा है। यही बात नेपाल के अधिकारियों ने भी कही है। उनकी मानें तो यह भारत नेपाल सीमा से करीब पांच सौ मीटर पहले नेपाल देश में है और इसका निर्माण नेपाल के साले कटान गांव के किसानों ने अपनी जरूरतों के मुताबिक किया है।
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नो मैस लैंड से यह पुल पांच सौ मीटर भीतर नेपाल में बना है। इससे महज पैदल या साइकिल से ही निकला जा सकता है। यहां के किसानों ने इसे अपनी जरूरतों के हिसाब से बनाया है। बाढ़ आने पर यह पुल स्वत: ही बह जाएगा।
लोकेंद्र भट्ट, डीएसपी- नेपाल शस्त्र पुलिस बल, कैलाली
पिलर संख्या 170 एफ से पांच सौ मीटर भीतर नेपाल की ओर 20 से 25 फिट का एक अस्थाई लकड़ी का पुल बना मिला है। यह नेपाल में है और इसके लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है। दोनो ओर नेपाली गांव हैं और उनके आवागमन इससे होता है। नेपाल पुलिस ने भी लिखित तौर पर कहा है कि यह नेपाल की सीमा में है। हालांकि मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेंगे। एसडी शेरखानी, प्रभारी कमांडेंट, 39वीं वाहिनी एसएसबी, गदनियां
लकड़ी का पुल नेपाल में है और कई साल पुराना है। इसे नेपाली नागरिकों ने निजी उपयोग के लिए बनवाया है। फिलहाल पुल से सुरक्षा खतरे में होने का कोई मसला नहीं है।
अखिलेश चौरसिया, एसपी
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अफसर बोले......
साले कटान गांव के लोगों ने आवागमन के लिए बनाया अस्थायी पुल
नेपाली अधिकारी बोले सीमा से पांच सौ मीटर पहले हुआ है निर्माण
भारत नेपाल सीमा पर अचानक से चर्चा में आया मोहाना नदी पर बना पुल रातों रात नहीं बना, बल्कि सालों पुराना है। अवैध पुल की चर्चा पर एसएसबी, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने मौका मुआयना किया तो पता चला कि भारत में नहीं है। डीएम का कहना है कि बांस बल्लियों का यह पुल काफी पुराना है और नोमैस लैंड से करीब पांच सौ मीटर भीतर खेत के आगे नेपाल की ओर है। फिलहाल इस पुल से सुरक्षा व्यवस्था को कोई खतरा नहीं है। बार्डर पर एसएसबी, कस्टम, आईबी, सेल्स टैक्स, एलआईयू और सिविल पुलिस मुस्तैद है।
भारत नेपाल सीमा के पिलर संख्या 170 एफ के पास नेपाली नदी मोहाना पर तस्करों द्वारा लकड़ी के पुल का निर्माण रातोरात कर देने का मामला सुर्खियों में आया। इस पर भारत की सुरक्षा एजेंसियों समेत प्रशासनिक अमले में भी खलबली मच गई और अधिकारियों ने नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों समेत प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क साधा। इस पर नेपाल के पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों ने मुआयना किया। उनके मुताबिक मुआयने में यह पुल उन्होंने नेपाल में पाया है जो कि नोमैस लैंड से करीब पांच सौ मीटर पहले नेपाल देश में स्थित है। उन्हीं के मुताबिक यहां पड़ने वाले नेपाली गांव साले कटान के किसानों ने अपनी जरूरतों के हिसाब से इस अस्थाई पुल का निर्माण किया है, जिससे पैदल या फिर साइकिल से गुजरा जा सकता है। हालांकि इस पुल के आसपास कोई सड़क नहीं है लेकिन सीमा के करीब बने पुल के गलत इस्तेमाल को लेकर अधिकारी बेपरवाह हैं।
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39वीं वाहिनी एसएसबी, गदनियां के प्रभारी कमांडेंट एसडी शेरखानी कहते हैं कि सीमा पर तस्करों द्वारा बनाए गए अवैध पुल की जानकारी लगते ही वह सोमवार को मौके पर गए, जिसमें पाया कि पुल नेपाल से सीधे भारत को नहीं जोड़ रहा है। बल्कि नेपाल से नेपाल के बीच ही किसानों के काम में आ रहा है। यही बात नेपाल के अधिकारियों ने भी कही है। उनकी मानें तो यह भारत नेपाल सीमा से करीब पांच सौ मीटर पहले नेपाल देश में है और इसका निर्माण नेपाल के साले कटान गांव के किसानों ने अपनी जरूरतों के मुताबिक किया है।
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नो मैस लैंड से यह पुल पांच सौ मीटर भीतर नेपाल में बना है। इससे महज पैदल या साइकिल से ही निकला जा सकता है। यहां के किसानों ने इसे अपनी जरूरतों के हिसाब से बनाया है। बाढ़ आने पर यह पुल स्वत: ही बह जाएगा।
लोकेंद्र भट्ट, डीएसपी- नेपाल शस्त्र पुलिस बल, कैलाली
पिलर संख्या 170 एफ से पांच सौ मीटर भीतर नेपाल की ओर 20 से 25 फिट का एक अस्थाई लकड़ी का पुल बना मिला है। यह नेपाल में है और इसके लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है। दोनो ओर नेपाली गांव हैं और उनके आवागमन इससे होता है। नेपाल पुलिस ने भी लिखित तौर पर कहा है कि यह नेपाल की सीमा में है। हालांकि मुख्यालय को रिपोर्ट भेजेंगे। एसडी शेरखानी, प्रभारी कमांडेंट, 39वीं वाहिनी एसएसबी, गदनियां
लकड़ी का पुल नेपाल में है और कई साल पुराना है। इसे नेपाली नागरिकों ने निजी उपयोग के लिए बनवाया है। फिलहाल पुल से सुरक्षा खतरे में होने का कोई मसला नहीं है।
अखिलेश चौरसिया, एसपी