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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   And two former officers convicted

तत्कालीन अफसर समेत दो दोषी

Tue, 23 Feb 2016 06:32 PM IST
लखीमपुर खीरी।
लखीमपुर खीरी। Updated Tue, 23 Feb 2016 06:32 PM IST
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विकास भवन स्थित कृषि विभाग के कार्यालय से एक मुकदमे से संबंधित पत्रावली गायब होने के मामले में डीएम के आदेश पर उपनिदेशक कृषि को मिली जांच 11 माह में पूरी हुई है। उपनिदेशक ने जांच रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी को सौंप दी है, जिसमें तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी और सेवानिवृत्त उर्वरक लिपिक को दोषी मानते हुए डीजीसी क्रिमिनल की राय लेने की सलाह दी गई है।
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बता दें कि फरधान थाने में दर्ज एक मुकदमे के सिलसिले में एएसपी ने 2015 में कृषि विभाग से मूल पत्रावली मांगी थी, जिसके बाद पत्रावली न मिलने पर मामला तूल पकड़ गया। जिला कृषि अधिकारी अमर सिंह ने डीजीसी (जिला शासकीय अधिवक्ता) की सलाह लेकर मामले की जानकारी सीडीओ और डीएम को दी थी, जिसके बाद सीडीओ नितीश कुमार की संस्तुति पर डीएम किंजल सिंह ने 27 मार्च 2015 को जांच उपनिदेशक कृषि डॉ शिवकुमार केसरी को सौंपी थी, जिन्होंने करीब 11 माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी को भेजी है। सूत्र बताते हैं कि पत्रावली का कस्टोडियन होने के नाते तत्कालीन उर्वरक लिपिक और अब रिटायर हो चुके रमेश चंद्र सक्सेना और तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी राममिलन को दोषी ठहराया गया। दोनों के खिलाफ आरोप तय करने के साथ ही जांच अधिकारी ने डीजीसी क्रिमिनल की राय लेकर आगे की कार्रवाई करने की सलाह भी दी। इसके अलावा कई अन्य बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों की माने तो जांच रिपोर्ट के आधार पर डीजीसी क्रिमिनल ने अपनी राय देते हुए दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी है।
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ये था मामला
29 मई 2009 को तत्कालीन जिला कृषि अधिकारी राममिलन ने फरधान थाना क्षेत्र के गांव गौरिया स्थित आरएस केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर फैक्ट्री में छापा मारकर विभिन्न उर्वरकों के तीन नमूने लिए थे। जांच में नमूने फेल होने की लैब रिपोर्ट आने पर जिला कृषि अधिकारी ने 13 अक्तूबर 2010 को फैक्ट्री के प्रोपाइटर रमेश वर्मा के खिलाफ फरधान थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 में मुकदमा दर्ज कराया था। सूत्रों की माने तो मुकदमा दर्ज होने के कुछ समय बाद ही मूल पत्रावली को गायब करा दिया गया, ताकि मुकदमे में आरोपी को राहत मिल सके।
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आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच में थोड़ा अधिक समय लग गया, लेकिन पारदर्शिता बरतते हुए जांच की गई है। प्राप्त तथ्य और सबूतों के आधार पर विभाग के दो लोगों की लापरवाही सामने आई है, जिसकी रिपोर्ट संबंधित अधिकारी को भेज दी गई हैै।
-डॉ शिवकुमार केसरी, उपनिदेशक कृषि

डीजीसी की राय लेकर जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। दिशा-निर्देश मिलने के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-अमर सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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