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बवाल के बाद हरकत में आया प्रशासन, हटवाया अवैध कब्जा

Fri, 26 May 2017 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो              निघासन।
अमर उजाला ब्यूरो              निघासन। Updated Fri, 26 May 2017 11:24 PM IST
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After the battle, the administration came under control, illegal possession
बवाल - फोटो : अमर उजाला
बीस साल से घर बनाकर रह रहे लोगों को किया घर से बेघर             
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करीब तीन घंटे चली जेसीबी, सामान निकालने का भी नहीं दिया मौका    
           
 गांव बिनौरा में हुए बवाल के बाद आखिरकार प्रशासन शुक्रवार को हरकत में आ ही गया। भारी पुलिस की मौजूदगी में एसडीएम ने जेसीबी चलवाकर करीब बीस साल से घर और घारी बनाकर आबादी की भूमि पर रह रहे लोगों को बेघर कर दिया। यहां तक प्रशासन ने किसी को घरों से सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया। एसडीएम धौरहरा रामप्रकाश और सीओ उमाशंकर सिंह ने आबादी की भूमि पर किसी को भी कब्जा न करने के आदेश दिए हैं। 
एसडीएम रामप्रकाश ने बताया कि गांव बिनौरा में गाटा संख्या 385 भूमि गांव के बीच में पड़ती है। इस भूमि पर छत्रपाल समेत मोहल्ले के लोग घूरा आदि डालते थे। मकसूद खां के घर के सामने भूमि पड़ने के कारण उसने वर्ष 2001 में अपना घर बना लिया। इससे पहले इसी भूमि पर गोधन खां, महबूब, याकूब, कल्लू, आबिद अली, रहमत अली भी अपनी घारी और दो लोग अपने घर बनाकर करीब बीस सालों से रह रहे थे। 25 मार्च 17 को मकसूद और छत्रपाल से इसी भूमि को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि मामला एसडीएम कोर्ट चला गया। एसडीएम के आदेश पर पंद्रह डी की कार्रवाई भी हुई। गुरुवार को मकसूद के घर में आग लग गई। दंगा न भड़क जाए इसलिए एसडीएम शुक्रवार को मयफोर्स के साथ गांव बिनौरा पहुंचे और वहां पर बनें लोगों के घर, घारी, छप्पर आदि जेसीबी से हटवाकर किनारे कर दिया। आरोप है कि निघासन पुलिस ने घर से सामान, भूसा आदि तक निकालने का मौका नहीं दिया।             
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16 साल से चल रहा है विवाद             
मकसूद का आरोप है कि उसका घर करीब से बना हुआ है। इस भूमि पर छत्रपाल का परिवार घूरा आदि डाल रहा था। मकसूद के घर के सामने घूरा पड़ने के कारण उसने उस भूमि पर 16 साल पहले अपना घर बना लिया था। उसके बाद से विवाद शुरू हो गया।
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डेढ़ महीने पहले आग लगी नहीं और दर्ज हो गई रिपोर्ट             
मकसूद ने बताया कि 12 अप्रैल को घर में आग लगाने की रिपोर्ट विपक्षी लोगों ने मेहनाज, भुल्लू, मेेराज, महमूद के खिलाफ दर्ज कराई थी। मोहल्ले के सरताज, आशिका, शबनम आदि ने बताया कि करीब दस सालों से मोहल्ले में आग नहीं लगी, लेकिन पुलिस ने सत्ता पक्ष के दबाव मेें आकर फर्जी रिपोर्ट लिख ली थी। आरोप है कि तत्कालीन कोतवाल डीसी मिश्रा ने भूमि खाली करने पर रिपोर्ट वापस लेने की बात भी कही थी।
 
आबादी की भूमि पर ही बसें है लगभग गांव             
ग्रामीणों का आरोप है कि जिले के कोई भी गांव हों अधिकतर गांव आबादी में ही बसे हैं। आरोप है कि आबादी की भूमि पर लोग घर नहीं बनाएंगे तो कहां रहेंगे।             

     
विवादित भूमि पर पंद्रह डी की कार्रवाई की गई थी। इसी के चलते उस पर बसे लोगों को हटाया गया है। फिलहाल गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सिंगाही, निघासन, तिकुनियां की पुलिस को तैनात किया गया है।             
रामप्रकाश, धौरहरा एसडीएम             
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