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नैनापुर गुलरीपुरवा में बस्ती के करीब दिखे तीन तेंदुए
Updated Fri, 04 Aug 2017 05:00 PM IST
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धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। वनरेंज धौरहरा के गांव गुलरीपुरवा, नैनापुर, मैलापुरवा, जोधापुरवा में बीते सोमवार से तीन तेंदुए देखे जा रहे हैं जिससे ग्रामीण खेतों में जाने से डर रहे हैं। गुलरीपुरवा निवासी परौरी ग्रामसभा के पूर्व प्रधान झब्बू लाल मौर्य ने बताया कि वह अपने खेत गए थे। तभी तीन तेंदुए गन्ने के खेत में जाते दिखाई दिए। इसकी सूचना यूपी 100 पर दी लेकिन कोई नहीं पहुंचा।
जोधापुरवा के रामलखन मौर्या, भैया लाल, जगदीश प्रसाद, छोटू, संजय राजू ने भी बस्ती के पास तेंदुए होने की बात स्वीकारते हुए बताया कि यहां आए दिन तेंदुए देखे जा रहे हैं। हालांकि अब तक तेंदुओं ने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। मालूम हो कि फरवरी माह में मैलापुरवा में शिकारियों की खाबड़ जाल में एक तेंदुआ फंस गया था जिसे 15 घंटों बाद ट्रेंकुलाइज करके वन विभाग की टीम ने पकड़ा था। फिर से तीन तेंदुए देखे जाने से ग्रामीणों में दहशत है। रेंजर आरपी दीक्षित ने बताया सूचना मिली है दिखवाता हूं। ग्रामीण रात में खेतों तरफ न जाएं। अपनी और अपने मवेशियों की सुरक्षा के लिए सावधानी बरतें।
बाक्स.....
बाढ़ के चलते ऊंची जगहों पर जा रहे वन्यजीव
घाघरा नदी में भीषण बाढ़ के चलते धौरहरा रेंज से सटा मोतीपुर बहराइच कर्तनिया जंगल के जंगली जानवर ऊंचाई वाले स्थान पर आ रहे है। तराई इलाके में गन्ने की लहलहाती फसलें वन्यजीवों के लिए आरामगाह साबित हो रही हैं। इस इलाके से इन पशुओं की जंगल वापसी की राह भी काफी आसान है।
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जोधापुरवा के रामलखन मौर्या, भैया लाल, जगदीश प्रसाद, छोटू, संजय राजू ने भी बस्ती के पास तेंदुए होने की बात स्वीकारते हुए बताया कि यहां आए दिन तेंदुए देखे जा रहे हैं। हालांकि अब तक तेंदुओं ने किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया है। मालूम हो कि फरवरी माह में मैलापुरवा में शिकारियों की खाबड़ जाल में एक तेंदुआ फंस गया था जिसे 15 घंटों बाद ट्रेंकुलाइज करके वन विभाग की टीम ने पकड़ा था। फिर से तीन तेंदुए देखे जाने से ग्रामीणों में दहशत है। रेंजर आरपी दीक्षित ने बताया सूचना मिली है दिखवाता हूं। ग्रामीण रात में खेतों तरफ न जाएं। अपनी और अपने मवेशियों की सुरक्षा के लिए सावधानी बरतें।
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बाढ़ के चलते ऊंची जगहों पर जा रहे वन्यजीव
घाघरा नदी में भीषण बाढ़ के चलते धौरहरा रेंज से सटा मोतीपुर बहराइच कर्तनिया जंगल के जंगली जानवर ऊंचाई वाले स्थान पर आ रहे है। तराई इलाके में गन्ने की लहलहाती फसलें वन्यजीवों के लिए आरामगाह साबित हो रही हैं। इस इलाके से इन पशुओं की जंगल वापसी की राह भी काफी आसान है।
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