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अफसरों का डंडा लेकिन हाथ नहीं आ रहा मोहन
Updated Sat, 15 Jul 2017 04:06 PM IST
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लखीमपुर खीरी। फरार बंदी की तलाश में लखनऊ और हरिद्वार गई टीम को निराशा हाथ लगी है। इससे सदर कोतवाली पुलिस की परेशानी बढ़ गई है। उधर बंदी की तलाश में हरिद्वार में एक टीम ने डेरा जमा रखा है, जबकि लखनऊ में होटलों, निर्माणाधीन इमारतें आदि की खाक छान चुकी एक टीम वापस लौट आई है।
बतादें कि आठ वर्षीय बालिका की रेप के बाद हत्या करने के मामले में जिला कारागार में निरुद्ध बंदी मोहन कश्यप 31 अक्तूबर 16 को जेल से फरार हो गया था। करीब महीने भर पुलिस और जेल प्रशासन ने उसे पकड़ने के लिए दिलचस्पी दिखाई। कई जगहों पर छापेमारी की, लेकिन वह हाथ नहीं लगा। काफी प्रयासों के बाद जब वह नहीं मिला तो पुलिस उसकी गिरफ्तारी को लेकर सुस्त पड़ गई और कोई खास प्रयास नहीं किए। सूत्रों की मानें तो इसी बीच बालिका के परिवार वाले हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट की दखल के बाद अफसरों के चले डंडे पर सदर कोतवाली पुलिस हरकत में आ गई। तीन दिन पहले आनन-फानन में पुलिस आरोपी मोहन कश्यप के परिवार के कई लोगों, रिश्तेदार और दोस्तों को उठाकर कोतवाली लाई और उनसे पूछताछ की थी। उसके कहीं हरिद्वार, लखनऊ तो कहीं शिमला में मजदूरी करने की बात सामने आई। इस पर पुलिस की दो टीमें दो रिश्तेदारों को लेकर गुरुवार की रात में ही लखनऊ और हरिद्वार रवाना हो गईं थी। टीमों ने वहां निर्माणाधीन भवनों, होटलों आदि पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर छापेमारी की, लेकिन मोहन का पता नहीं लगा सकी। थक हारकर लखनऊ गई क्राइम ब्रांच की टीम शनिवार की दोपहर खाली हाथ वापस लौट आई है, जबकि हरिद्वार में टीम ने डेरा जमा रखा है। टीम में शामिल एक सूत्र ने बताया कि टीम ने हरिद्वार में 20 से अधिक संभावित स्थानों पर छापेमारी की है, लेकिन मोहन कश्यप का कोई पता नहीं लगा है। पुलिस अभी हरिद्वार में ही डेरा जमाए हुए हैं। अफसरों के आदेश पर ही टीम आगे बढ़ेगी।
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बतादें कि आठ वर्षीय बालिका की रेप के बाद हत्या करने के मामले में जिला कारागार में निरुद्ध बंदी मोहन कश्यप 31 अक्तूबर 16 को जेल से फरार हो गया था। करीब महीने भर पुलिस और जेल प्रशासन ने उसे पकड़ने के लिए दिलचस्पी दिखाई। कई जगहों पर छापेमारी की, लेकिन वह हाथ नहीं लगा। काफी प्रयासों के बाद जब वह नहीं मिला तो पुलिस उसकी गिरफ्तारी को लेकर सुस्त पड़ गई और कोई खास प्रयास नहीं किए। सूत्रों की मानें तो इसी बीच बालिका के परिवार वाले हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट की दखल के बाद अफसरों के चले डंडे पर सदर कोतवाली पुलिस हरकत में आ गई। तीन दिन पहले आनन-फानन में पुलिस आरोपी मोहन कश्यप के परिवार के कई लोगों, रिश्तेदार और दोस्तों को उठाकर कोतवाली लाई और उनसे पूछताछ की थी। उसके कहीं हरिद्वार, लखनऊ तो कहीं शिमला में मजदूरी करने की बात सामने आई। इस पर पुलिस की दो टीमें दो रिश्तेदारों को लेकर गुरुवार की रात में ही लखनऊ और हरिद्वार रवाना हो गईं थी। टीमों ने वहां निर्माणाधीन भवनों, होटलों आदि पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर छापेमारी की, लेकिन मोहन का पता नहीं लगा सकी। थक हारकर लखनऊ गई क्राइम ब्रांच की टीम शनिवार की दोपहर खाली हाथ वापस लौट आई है, जबकि हरिद्वार में टीम ने डेरा जमा रखा है। टीम में शामिल एक सूत्र ने बताया कि टीम ने हरिद्वार में 20 से अधिक संभावित स्थानों पर छापेमारी की है, लेकिन मोहन कश्यप का कोई पता नहीं लगा है। पुलिस अभी हरिद्वार में ही डेरा जमाए हुए हैं। अफसरों के आदेश पर ही टीम आगे बढ़ेगी।
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