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कोरोना से जंग..न हारे हैं न हारेंगे

Wed, 30 Dec 2020 12:57 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 30 Dec 2020 12:57 AM IST
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corona affect
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लखीमपुर खीरी। साल- 2020 स्वास्थ्य महकमे के लिए बेहद चुनौतियों भरा रहा। देश के कई हिस्सों में तबाही मचाने के बाद मार्च के अंत में जिले के एक व्यापारी में कोरोना की पुष्टि हुई। हालांकि उनका इलाज लखनऊ के मेडिकल कॉलेज में हुआ, लेकिन इसके बाद से स्वास्थ्य महकमे की परीक्षा का दौर शुरू हो गया। न कोरोना की कोई दवा और न ही जिले में जांच के इंतजाम। इसके बाद भी डॉक्टर और पैरामैडिकल स्टाफ ने कोरोना को हराने के लिए जिस जंग की शुरुआत की थी वह अब तक निरंतर जारी है। विदेशों के साथ गैर राज्यों से आए संदिग्धों की जांच करने के दौरान कई डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ संक्रमित हो गया। मगर, कोरोना से किसी ने हार नहीं मानी और क्वारंटीन के बाद स्वस्थ होकर फिर एक कुशल योद्धा की तरह कोरोना को हराने के लिए जंग ए मैैदान में उतर पड़े।
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कोरोना ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह से चरमरा दिया। लॉकडाउन के कारण न तो ओयल में निर्माणाधीन 200 बेड का मदर एंड चाइल्ड अस्पताल बनकर तैयार हो पाया और न ही ट्रामा सेंटर में स्टाफ की तैनाती ही हो सकी। हालांकि स्वास्थ्य कर्मी जान जोखिम में डालकर संदिग्धों की जांच करने से लेकर संक्रमित मिलने वालों तक का इलाज करते रहे। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना योद्धा से नामकरण हुआ। तमाम दिक्कत और दुश्वारियों के बावजूद स्वास्थ्य कर्मी कोरोना को हराने के लिए जी जान से जंग लड़ते रहे। इसी का परिणाम रहा कि कोरोना जिले में पांव पसारकर तबाही मचाने में नाकामयाब रहा।
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साल 2020 डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की सेवा भावना के लिए भी जाना जाएगा। कोरोना से जंग जीतने के लिए तमाम संसाधनों का उपयोग करने के बाद भी ये संक्रमित होने से नहीं बच पाए। जिला अस्पताल से लेकर महिला अस्पताल के कई डॉक्टर, स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय कोरोना वायरस की चपेट में आए, लेकिन कोरोना से हार नहीं मानी।
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नए साल में उम्मीदें
-जिला अस्पताल में बंद हुए जन औषधि केंद्र खुलेंगे।
- देवकली रोड पर मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल परिसर में 300 बेड का अस्पताल बनेगा।
- मोतीपुर में निर्माणाधीन 200 बेड का मदर एंड चाइल्ड अस्पताल शुरू होगा।
- स्टाफ मिलने से ट्रामा सेंटर शुरू होगा।
- महिला अस्पताल मोतीपुर में शिफ्ट होगा।
इस साल यह मिला
- बेलरायां में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की शुरुआत
-राजापुर में ड्रग वेयर हाउस खुला
-जिले को मेडिकल कॉलेज
-चंदन चौकी में सीएचसी के बिशेनपुरी में पीएचसी
-223 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर
महिला अस्पताल में बढ़ी प्रसव संख्या
कोरोना काल से पहले महिला अस्पताल में जहां हर माह 400 से 500 तक सामान्य और करीब 20 से 25 प्रसव ऑपरेशन से होते थे। कोरोना के कारण लॉकडाउन में निजी अस्पताल एवं नर्सिंग होम बंद रहे। ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए महिला अस्पताल ही सहारा बना। मार्च से लेकर 27 दिसंबर तक महिला अस्पताल में 6717 सामान्य और 776 प्रसव ऑपरेशन से हुए।
पीपीई किट न मिलने पर जब डॉक्टर ने दिया इस्तीफा
विदेश या फिर दूसरे राज्य से पलायन कर जिले में आ रहे संदिग्धों की जांच के लिए डॉक्टर एवं पैरामेडिकल स्टाफ को लगाया गया। मगर, जांच के दौरान पहनने को पीपीई किट न मिलने से नाराज धौरहरा पीएचसी में तैनात डॉ. नीलेश मौर्या ने अपने को क्वारंटीन करते हुए इस्तीफा दे दिया। उस दौरान यह मामला बेहद सुर्खियों में रहा।
(दो अप्रैल को पेज नंबर दो प्रकाशित खबर- पीपीई किट न मिलने पर डॉक्टर ने अपने को क्वारंटीन कर दिया इस्तीफा )
कोरोना के आंकड़े
जिले में कुल मिले संक्रमित- 7445
स्वस्थ हुए- 7229
एक्टिव केस- 129
कोरोना से मौत-87
कुल लिए गए सैंपल- 2,94452
कोरोना से पहली मौत- 25 जुलाई
पहला संक्रमित=
तुर्की से लौट कर आए मैगलगंज के व्यापारी को कुछ दिन बाद सांस लेने में दिक्कत हुई। इस पर सीतापुर के बाद लखनऊ में इलाज कराया तो वहां से 30 मार्च को आई जांच रिपोर्ट में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई।
फर्ज के आगे दर्द और खुशियां सब कर दी कुर्बान
जिला अस्पताल के आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. विजय प्रकाश वर्मा की ड्यूटी फ्लू वार्ड में लगाई गई। जहां पर गैर जिला एवं राज्य से आने वालों की लक्षण के आधार पर जांच करना था। लोगों की जांच करते करते वह स्वंय संक्रमित हो गए। कोरोना से जंग जीतकर आने के बाद वह फिर से लोगों को स्वास्थ्य लाभ देने में लग गए।

जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला को लॉकडाउन के दिनों में क्वारंटीन सेंटर में रहने वालों तनाव से बचाने के लिए काउंसलिंग की जिंदगी सौंपी गई। इस पर वह टीम के साथ सेंटरों पर जाकर काउंसलिंग करने लगे। मगर, इस दौरान वह खुद संक्रमित हो गए। करीब 15 दिन क्वारंटीन रहकर स्वस्थ होने के बाद फिर से काउंसलिंग करने में लग गए।
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