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दुरुस्ती का दावा, फिर भी धुआं उगल रही बसें      

Sun, 18 Jun 2017 11:39 PM IST
श्यामकिशोर अवस्थी       गोला गोकर्णनाथ।
श्यामकिशोर अवस्थी       गोला गोकर्णनाथ। Updated Sun, 18 Jun 2017 11:39 PM IST
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Claim of repairs, still smoke fires
रोडवेज डिपो - फोटो : अमर उजाला

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हाल रोडवेज के गोला डिपो का      
गोला डिपो के बेड़े में निगम की 66 और 45 हैं अनुबंधित बसें      
27 बसें कर चुकीं हैं दस लाख किमी से अधिक का सफर      

  
 रोडवेज डिपो की व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारी भले ही दुरुस्ती का दावा करते हों, किंतु डिपो में एक दर्जन से अधिक बसें मेंटीनेंस के लिए खड़ी रहती हैं। इनकी मरम्मत करने के बजाए ठोक पीटकर बसों के संचालन के लिए सड़क पर उतार दिया जाता है। ऐसे में काला धुआं उड़ाती बसें एक दिन में 438 किलोमीटर सफर करती हैं। इन बसों के नीचे झांककर देखा जाए तो रस्सी के सहारे कंप्रेशर पाइप बंधे दिखाई पड़ते हैं वहीं बसों के अंदर जर्जर फर्श, इंजन से गिरता मोबिल, टूटे डेस बोर्ड में बिखरे तार, टूटी कुर्सियां, गियर डालने पर धड़ाम की आवाज रोडवेज बसों की दशा बयां करती हैं।      
गोला रोडवेज डिपो में अधिकारियों की मानें तो निगम की 66 बसों में से 27 बसें 10 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। अधिकारियों का कहना है कि गोला रोडवेज डिपो के बेड़े में 66 निगम की और 45 अनुबंधित बसें हैं। इन 111 बसों में से सुरक्षा की दृष्टि से 109 बसों में वीटीएस सिस्टम लगा हुआ है और निर्धारित 11 महीने के अंदर प्रत्येक गाड़ी की फिटनेश क्षेत्रीय एआरटीओ कार्यालय हरदोई से कराया जाना अनिवार्य होता है। फिटनेश के बाद ही बस का संचालन कराया जाता है। मई और जून महीने में लगभग 20 बसों की फिटनेश कराई गई है। 13 लाख किलोमीटर चलने के बाद या 10 वर्ष पूरे करने पर बस का प्रस्ताव नीलामी के लिए विभाग को भेज दिया जाता है। प्रक्रिया पूरी होने पर नीलामी योग्य बस को क्षेत्रीय कार्यालय हरदोई के लिए भेजा जाता है। 
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ठोक पीटकर चलाई जा रहीं नीलामी योग्य बसें
गोला डिपो की बस यूपी30ए/9820, 9013, 8962, 9665 सहित कई बसें निर्धारित किलोमीटर पूरे करने के बाद भी ठोक पीटकर चलाई जा रही हैं। इन जर्जर बसों को प्रतिदिन लगभग 400 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ता है। ऐसे में यात्रियों को खतरा भी रहता है। साथ ही समय से गंतव्य तक पहुंचने की संभावनाएं भी कम रहती हैं, वहीं धुआं उगल रही बसें पर्यावरण के लिए खतरा बनी हैं।      
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इस मॉडल की बसों का होता है संचालन      
गोला रोडवेज डिपो में वर्ष 2004 की एक, 2006 की एक, 2007 की दो, 2008 की पांच, 2009 की 16,  2010 की छह, 2011 की एक, 2012 की चार, 2013 की 18, 2014 की दो, 2015 की आठ और 2016 की दो बसों सहित परिवहन निगम की 66 बसों का संचालन हो रहा है।      
 
भगवान भरोसे है बसों की साफ सफाई
रोडवेज की सफाई और धुलाई भगवान भरोसे है। बसों की धुलाई वर्षा पर निर्भर है। जबकि बसों के अंदर सफाई कर्मी झाड़ू से बस की सफाई करता है। रोडवेज के एक अधिकारी ने बताया कि बसों की धुलाई की मशीन छह माह से खराब है। जिसे चालू कराने के लिए क्षेत्रीय कार्यालय हरदोई सूचना भेजी गई। मशीन खराब होने से 66 बसों की धुलाई नहीं हो पा रही है। एक सफाईकर्मी इन बसों की सफाई झाड़ू पोंछकर और बाल्टी में पानी भरकर करता है। इससे बसों की साफ सफाई का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।       
 
अधिकांश बसों में नहीं हैं फस्ट एड बाक्स      
रोडवेज की अधिकांश बसों में फर्स्ट एड बाक्स नहीं लगा है और न ही अग्निशमन यंत्र लगाया गया है। जिससे दुर्घटनाओं के समय यात्रियों को राहत नहीं मिल सकती है।      

 
जो बसें 10 साल से अधिक पुरानी हैं। उन बसों की नीलामी के लिए विभाग से लिखापढ़ी चल रहीं है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियमानुसार ढंग से नीलामी कराई जाएगी। वहीं बसों का समय से फिटनेस कराया जाता है।
आरके श्रीवास्तव, एआरएम-गोला
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