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लखीमपुर-गोला हाईवे पर जगह-जगह कट और गड्ढे करा सकते हैं हादसा
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पुलिया निर्माण को खोदी जा रही सड़क। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। लखीमपुर-गोला हाईवे पर जगह-जगह छोटे-बड़े कट और बड़े-बड़े गड्ढे हैं। यदि इस मार्ग को हाईवे समझकर वाहन तेज गति से दौड़ाया तो हादसे का शिकार हो सकते हैं। यहां खास यह है कि मार्ग पर न तो निर्माण कार्य के कोई संकेतक लगे हैं और न ही रोड डायवर्ट के। यहां बता दें कि यह मार्ग पीलीभीत बस्ती नेशनल हाईवे (एनएच-730) के तहत है, जिसका चौड़ीकरण हो रहा है, लेकिन कार्यदायी संस्था की ओर से बरती जा लापरवाही लोगों के लिए मुसीबत बन रही है।
एनएच-730 का निर्माण करीब तीन साल पहले शुरू हुआ था, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में लखीमपुर से 35 किलोमीटर दूर गोला तक का सफर मुश्किलों भरा साबित हो रहा है। इस बीच में तमाम जगह पर कट बने हैं, जिसमें कुछ दो से तीन मीटर के तो कुछ 25 से 30 मीटर तक के हैं। इनकी वजह से दो और चार पहिया वाहन से लेकर बस का सफर करना तक मुश्किल हो रहा है। रोजाना गोला से लखीमपुर अप-डाउन करने वाले लोगों को इन कट और गड्ढों के झटके से गर्दन, रीढ़ और कमर की दिक्कतें बढ़ रही हैं। उधर, पुलिया निर्माण के पास सांकेतिक बोर्ड का न होना हादसों का दावत दे रहा है।
हाईवे का निर्माण एक तरफ से होना चाहिए। मगर, गोला-लखीमपुर के बीच अजीबोगरीब तरीके से निर्माण हो रहा है। 35 किलोमीटर की दूरी में दो से लेकर 25 से 30 मीटर तक के करीब 15 से 20 टुकड़े ऐसे हैं, जिनका बनना अभी शेष है। इनकी वजह से बनी ठोकरें दर्द दे रही हैं।
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- नरेश कुमार, प्रोग्राम मैनेजर, क्वालिटी एश्योरेंस सीएमओ कार्यालय
कई साल से हाईवे बन रहा है, देखो कब बनकर तैयार हो। जिम्मेदारों की अनदेखी से जगह-जगह पर कट छोड़ रखे गए हैं। इनके कारण बस का सफर तक मुश्किल हो रहा है। कट की वजह से जो ठोकरें बनी हैं उससे बस में पीछे बैठने पर शरीर की दुर्गत तक हो जाती है।
- हरेराम शर्मा, सीटी स्कैन टेक्नीशियन, जिला अस्पताल
सड़क पर अचानक गड्ढा आने से दुर्घटना होने की संभावना रहती है। बाइक व कार में तेज गति से निकलने पर झटका लगता है। इससे स्पाइनल फैक्चर होने का भी डर रहता है। वहीं सर्वाइकल के साथ झटकों की वजह से सिर दर्द की समस्या होने की संभावना रहती है।
-डॉ. अनुराग त्रिवेदी, फरधान
रोजाना लखीमपुर आना-जाना होता है। इस बीच तमाम जगह पर कट हैं। जहां पर ठोकरें हैं। रात में इनका पता तक नहीं लगता। इनकी वजह से कई बार गिरते बची हूं। वहीं कई जगह पुलिया बन रही है। इसके संकेतक तक नहीं लगे हैं। देखो कब तक हाइवे बनकर तैयार हो पाता है।
- एकता वर्मा, सीएचओ फरधान
हाईवे निर्माण कार्य 31 मार्च 2022 तक पूरा होना है। इसके लिए तेजी से काम चल रहा है। हालांकि बारिश की वजह से कुछ व्यवधान हुआ है। पुलिया निर्माण के पास संकेतक बोर्ड न होना और जगह-जगह पर रोड अधबनी छोड़ देने के बाबत जानकारी नहीं है। इसके लिए ठेकेदार से जवाब तलब होगा और बोर्ड लगाने के लिए कहा जाएगा।
- देवेंद्र सिंह, अधिशाषी अभियंता, पीडब्ल्यूडी, नेशनल निर्माण खंड सिसैया से खुटार तक
रीढ़ के लिए मुसीबत बन सकते हैं ये गड्ढे
जिला अस्पताल के आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. एके द्विवेदी बताते हैं कि गड्ढों के कारण कमर में झटका लगता है, जो गर्दन, रीढ़ एवं कमर के लिए नुकसान देय साबित हो सकता है। ऊबड़ खाबड़ सड़कों पर गाड़ी चलते समय झटका लगने से रीढ़ की डिस्क बाहर निकल आती है और स्पाइनल कॉड दबने लगता है। इससे पैरों में झनझनाहट होने के साथ सुन्न होने की भी स्थिति बन सकती है। तेज झटका लगने से कमर में भी दिक्क्त बढ़ सकती है। यदि जरूरी हो तो बाइक चलाते समय गति बेहद नियंत्रित रखें, जिससे झटका लगने की संभावना कम रहे।
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एनएच-730 का निर्माण करीब तीन साल पहले शुरू हुआ था, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में लखीमपुर से 35 किलोमीटर दूर गोला तक का सफर मुश्किलों भरा साबित हो रहा है। इस बीच में तमाम जगह पर कट बने हैं, जिसमें कुछ दो से तीन मीटर के तो कुछ 25 से 30 मीटर तक के हैं। इनकी वजह से दो और चार पहिया वाहन से लेकर बस का सफर करना तक मुश्किल हो रहा है। रोजाना गोला से लखीमपुर अप-डाउन करने वाले लोगों को इन कट और गड्ढों के झटके से गर्दन, रीढ़ और कमर की दिक्कतें बढ़ रही हैं। उधर, पुलिया निर्माण के पास सांकेतिक बोर्ड का न होना हादसों का दावत दे रहा है।
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हाईवे का निर्माण एक तरफ से होना चाहिए। मगर, गोला-लखीमपुर के बीच अजीबोगरीब तरीके से निर्माण हो रहा है। 35 किलोमीटर की दूरी में दो से लेकर 25 से 30 मीटर तक के करीब 15 से 20 टुकड़े ऐसे हैं, जिनका बनना अभी शेष है। इनकी वजह से बनी ठोकरें दर्द दे रही हैं।
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- नरेश कुमार, प्रोग्राम मैनेजर, क्वालिटी एश्योरेंस सीएमओ कार्यालय
कई साल से हाईवे बन रहा है, देखो कब बनकर तैयार हो। जिम्मेदारों की अनदेखी से जगह-जगह पर कट छोड़ रखे गए हैं। इनके कारण बस का सफर तक मुश्किल हो रहा है। कट की वजह से जो ठोकरें बनी हैं उससे बस में पीछे बैठने पर शरीर की दुर्गत तक हो जाती है।
- हरेराम शर्मा, सीटी स्कैन टेक्नीशियन, जिला अस्पताल
सड़क पर अचानक गड्ढा आने से दुर्घटना होने की संभावना रहती है। बाइक व कार में तेज गति से निकलने पर झटका लगता है। इससे स्पाइनल फैक्चर होने का भी डर रहता है। वहीं सर्वाइकल के साथ झटकों की वजह से सिर दर्द की समस्या होने की संभावना रहती है।
-डॉ. अनुराग त्रिवेदी, फरधान
रोजाना लखीमपुर आना-जाना होता है। इस बीच तमाम जगह पर कट हैं। जहां पर ठोकरें हैं। रात में इनका पता तक नहीं लगता। इनकी वजह से कई बार गिरते बची हूं। वहीं कई जगह पुलिया बन रही है। इसके संकेतक तक नहीं लगे हैं। देखो कब तक हाइवे बनकर तैयार हो पाता है।
- एकता वर्मा, सीएचओ फरधान
हाईवे निर्माण कार्य 31 मार्च 2022 तक पूरा होना है। इसके लिए तेजी से काम चल रहा है। हालांकि बारिश की वजह से कुछ व्यवधान हुआ है। पुलिया निर्माण के पास संकेतक बोर्ड न होना और जगह-जगह पर रोड अधबनी छोड़ देने के बाबत जानकारी नहीं है। इसके लिए ठेकेदार से जवाब तलब होगा और बोर्ड लगाने के लिए कहा जाएगा।
- देवेंद्र सिंह, अधिशाषी अभियंता, पीडब्ल्यूडी, नेशनल निर्माण खंड सिसैया से खुटार तक
रीढ़ के लिए मुसीबत बन सकते हैं ये गड्ढे
जिला अस्पताल के आर्थोपैडिक सर्जन डॉ. एके द्विवेदी बताते हैं कि गड्ढों के कारण कमर में झटका लगता है, जो गर्दन, रीढ़ एवं कमर के लिए नुकसान देय साबित हो सकता है। ऊबड़ खाबड़ सड़कों पर गाड़ी चलते समय झटका लगने से रीढ़ की डिस्क बाहर निकल आती है और स्पाइनल कॉड दबने लगता है। इससे पैरों में झनझनाहट होने के साथ सुन्न होने की भी स्थिति बन सकती है। तेज झटका लगने से कमर में भी दिक्क्त बढ़ सकती है। यदि जरूरी हो तो बाइक चलाते समय गति बेहद नियंत्रित रखें, जिससे झटका लगने की संभावना कम रहे।