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12 घरों को भी जद में लिया शारदा ने
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धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। तहसील क्षेत्र में शारदा और घाघरा नदियों की विनाश लीला जारी है। रैनी गांव में अब तक 71 घर निगल चुकी शारदा नदी ने 24 घंटे में शेष बचे 12 घरों को भी जद में ले लिया। वहीं घाघरा नदी बाछेपारा गांव में भी तेजी से कटान कर रही है, जिससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी मची है।
शारदा नदी रैनी गांव के 71 घर उजाड़ने के बाद शेष बचे गांवों की ओर आगे बढ़ती चली आ रही है। 24 घंटे में शारदा नदी ने 21 मीटर भूमि का कटान कर गांव में 12 बचे शेष घरों का भी लीलना शुरू कर दिया है। गांव के रमाकांत वर्मा, रमाशंकर, देशराज, नरेंद्र, शैलेंद्र, सोनू, सतीश, अच्छेलाल, शिवांश वर्मा सहित नौ लोगों के आधे से ज्यादा घर कट चुके हैं, जो किसी भी समय नदी में समा सकते हैं। इसके बाद तीन घरों के कटने का नंबर लग सकता है, क्योंकि नदी तेजी से कटान करती जा रही है। इससे पूरे गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। गांव को बचाने में लगा बाढ़ खंड विभाग बस खानापूर्ति करने में लगा है। वही घाघरा नदी बाछेपारा गांव में तेजी से कटान करती आगे बढ़ती चली आ रही है। यहां सोमवार को कोई घर तो नदी में नहीं कटा, लेकिन गांव की लहलहाती फसलों सहित करीब 100 बीघा जमीन नदी में समा गई है। इसके अलावा घाघरा नदी गुलरिया तालुके अमेठी, रामनगर, बगहा, गोडिय़नपुरवा, लालापुर, पोखरा, संतरामपुरवा, गनापुर, जंगलमटेरा में भू-कटान कर रही है।
‘समय पर बचाव कार्य कराते तो बच जाता गांव’
रैनी गांव के कटान पीड़ित सीधे बाढ़ खंड विभाग पर आरोप लगाते हैं कि समय रहते यदि विभाग बचाव कार्य करता तो हमारे घर नहीं कटते और गांव भी बच जाता। अब बाढ़ खंड विभाग बचाव कार्य का दिखावा कर सरकारी धन का बंदरबांट करने में लगा है।
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नदी की गहराई 40 फुट हो गई है। छह फुट के बंबू कैरेट बना कर डाले जा रहे हैं, जो नदी के तेज धारा में बह जाते हैं। हमारी टीम बचाव कार्य कर रही है।
-धर्मेंद्र सिंह, जेई बाढ़ खंड
प्रतिदिन राजस्व कर्मचारियों से रिपोर्ट ले रहा हूं। बचाव कार्य चल रहा है। बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता ने आश्वासन दिया है कि शेष बचे हुए घर बचा लेंगे।
-एस सुधाकरन, एसडीएम, धौरहरा
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शारदा नदी रैनी गांव के 71 घर उजाड़ने के बाद शेष बचे गांवों की ओर आगे बढ़ती चली आ रही है। 24 घंटे में शारदा नदी ने 21 मीटर भूमि का कटान कर गांव में 12 बचे शेष घरों का भी लीलना शुरू कर दिया है। गांव के रमाकांत वर्मा, रमाशंकर, देशराज, नरेंद्र, शैलेंद्र, सोनू, सतीश, अच्छेलाल, शिवांश वर्मा सहित नौ लोगों के आधे से ज्यादा घर कट चुके हैं, जो किसी भी समय नदी में समा सकते हैं। इसके बाद तीन घरों के कटने का नंबर लग सकता है, क्योंकि नदी तेजी से कटान करती जा रही है। इससे पूरे गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। गांव को बचाने में लगा बाढ़ खंड विभाग बस खानापूर्ति करने में लगा है। वही घाघरा नदी बाछेपारा गांव में तेजी से कटान करती आगे बढ़ती चली आ रही है। यहां सोमवार को कोई घर तो नदी में नहीं कटा, लेकिन गांव की लहलहाती फसलों सहित करीब 100 बीघा जमीन नदी में समा गई है। इसके अलावा घाघरा नदी गुलरिया तालुके अमेठी, रामनगर, बगहा, गोडिय़नपुरवा, लालापुर, पोखरा, संतरामपुरवा, गनापुर, जंगलमटेरा में भू-कटान कर रही है।
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‘समय पर बचाव कार्य कराते तो बच जाता गांव’
रैनी गांव के कटान पीड़ित सीधे बाढ़ खंड विभाग पर आरोप लगाते हैं कि समय रहते यदि विभाग बचाव कार्य करता तो हमारे घर नहीं कटते और गांव भी बच जाता। अब बाढ़ खंड विभाग बचाव कार्य का दिखावा कर सरकारी धन का बंदरबांट करने में लगा है।
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नदी की गहराई 40 फुट हो गई है। छह फुट के बंबू कैरेट बना कर डाले जा रहे हैं, जो नदी के तेज धारा में बह जाते हैं। हमारी टीम बचाव कार्य कर रही है।
-धर्मेंद्र सिंह, जेई बाढ़ खंड
प्रतिदिन राजस्व कर्मचारियों से रिपोर्ट ले रहा हूं। बचाव कार्य चल रहा है। बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता ने आश्वासन दिया है कि शेष बचे हुए घर बचा लेंगे।
-एस सुधाकरन, एसडीएम, धौरहरा