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तहसीलों से भेजी मनगढ़ंत रिपोर्ट... ओलावृष्टि से फसलों को नहीं हुआ नुकसान
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लखीमपुर खीरी। चार दिन पहले बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट तहसीलों से मांगी गई थी, जिसमें अधिकतर तहसीलों से मनगढ़ंत रिपोर्ट भेजी गई। मोहम्मदी तहसीलदार ने दो लाइनों में रिपोर्ट भेजकर ओलावृष्टि से कोई नुकसान नहीं होने की सूचना दी तो वहीं अन्य तहसीलों से भी 33 प्रतिशत से कम नुकसान होने की रिपोर्ट भेजकर खानापूरी की गई। कार्यालय में ही बैठकर तैयार की गई तहसीलदारों की रिपोर्ट पर नाराजगी जताते हुए एडीएम अरुण कुमार सिंह ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
बृहस्पतिवार की रात से शुक्रवार को दिन भर हुई ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से फसलों को भारी नुकसान हुआ था। ओलावृष्टि से सबसे अधिक नुकसान सरसों, लाही और शाक-भाजी समेत दलहनी फसलों को हुआ। बिगड़े मौसम में हालत खराब होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिसकी रिपोर्ट सभी तहसीालों से मांगी गई थी। लेखपालों की हड़ताल के चलते नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व निरीक्षकों की मदद लेने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि सरकार द्वारा एस्मा लागू कर लेखपालों की हड़ताल को निषेध कर दिया गया था लेकिन अभी भी लेखपालों का कार्य बहिष्कार और धरना प्रदर्शन जारी है। इन्हीं हालतों के बीच जैसे-तैसे तहसीलदारों ने मनमाने तरीके से फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट कागजों पर बनाई और उसे डीएम कार्यालय के आपदा राहत अनुभाग में भेज दिया।
मोहम्मदी तहसीलदार ने दो लाइन की रिपोर्ट में बताया कि हमारे तहसील क्षेत्र में ओलावृष्टि से फसलों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। इसी तरह लखीमपुर तहसीलदार ने बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान की बात स्वीकार की, लेकिन इसे 33 प्रतिशत से कम होना बताया, इस वजह से किसानों को मुआवजा नहीं दिया जा सकता है। गोला तहसीलदार ने रिपोर्ट में बताया है कि बारिश और ओलावृष्टि से फसलों और जान-माल को कोई नुकसान नहीं हुआ है। इसी तरह निघासन तहसीलदार ने भी कहा कि हमारे क्षेत्र में ओलावृष्टि ही नहीं हुई। वहीं मितौली तहसीलदार ने 10 से 12 प्रतिशत तक नुकसान होने की बात कही लेकिन लिखित तौर पर रिपोर्ट नहीं भेजी है। वहीं पलिया तहसील से भी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
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बारिश और ओलावृष्टि में 33 प्रतिशत और इससे अधिक फसलों की क्षति होने पर किसानों को आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। अभी तक प्राप्त रिपोर्ट में 33 प्रतिशत से कम नुकसान की बात कही जा रही है। कुछ तहसीलों की रिपोर्ट ठीक नहीं बनी थी, नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
-अरुण कुमार सिंह, एडीएम
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बृहस्पतिवार की रात से शुक्रवार को दिन भर हुई ओलावृष्टि और अतिवृष्टि से फसलों को भारी नुकसान हुआ था। ओलावृष्टि से सबसे अधिक नुकसान सरसों, लाही और शाक-भाजी समेत दलहनी फसलों को हुआ। बिगड़े मौसम में हालत खराब होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जिसकी रिपोर्ट सभी तहसीालों से मांगी गई थी। लेखपालों की हड़ताल के चलते नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व निरीक्षकों की मदद लेने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि सरकार द्वारा एस्मा लागू कर लेखपालों की हड़ताल को निषेध कर दिया गया था लेकिन अभी भी लेखपालों का कार्य बहिष्कार और धरना प्रदर्शन जारी है। इन्हीं हालतों के बीच जैसे-तैसे तहसीलदारों ने मनमाने तरीके से फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट कागजों पर बनाई और उसे डीएम कार्यालय के आपदा राहत अनुभाग में भेज दिया।
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मोहम्मदी तहसीलदार ने दो लाइन की रिपोर्ट में बताया कि हमारे तहसील क्षेत्र में ओलावृष्टि से फसलों को कोई नुकसान नहीं हुआ है। इसी तरह लखीमपुर तहसीलदार ने बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान की बात स्वीकार की, लेकिन इसे 33 प्रतिशत से कम होना बताया, इस वजह से किसानों को मुआवजा नहीं दिया जा सकता है। गोला तहसीलदार ने रिपोर्ट में बताया है कि बारिश और ओलावृष्टि से फसलों और जान-माल को कोई नुकसान नहीं हुआ है। इसी तरह निघासन तहसीलदार ने भी कहा कि हमारे क्षेत्र में ओलावृष्टि ही नहीं हुई। वहीं मितौली तहसीलदार ने 10 से 12 प्रतिशत तक नुकसान होने की बात कही लेकिन लिखित तौर पर रिपोर्ट नहीं भेजी है। वहीं पलिया तहसील से भी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
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बारिश और ओलावृष्टि में 33 प्रतिशत और इससे अधिक फसलों की क्षति होने पर किसानों को आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। अभी तक प्राप्त रिपोर्ट में 33 प्रतिशत से कम नुकसान की बात कही जा रही है। कुछ तहसीलों की रिपोर्ट ठीक नहीं बनी थी, नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
-अरुण कुमार सिंह, एडीएम