{"_id":"623f6222f7fbf521201c0e45","slug":"caste-equations-burning-issues-failed-the-district-did-not-get-any-minister-lakhimpur-news-bly479360337","type":"story","status":"publish","title_hn":"जातीय समीकरण, ज्वलंत मुद्दे रहे फेल, नहीं मिला जिले को कोई मंत्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जातीय समीकरण, ज्वलंत मुद्दे रहे फेल, नहीं मिला जिले को कोई मंत्री
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में तीन ओबीसी, दो दलित, एक ब्राह्मण, एक क्षत्रिय व एक पंजाबी खत्री विधायक
जिले में कुल 28.7 लाख मतदाता में सबसे ज्यादा करीब नौ लाख ओबीसी मतदाता
पसगवां से लेकर तिकुनिया कांड तक का नहीं दिखा कोई असर
लखीमपुर खीरी। जिले की आठों विधानसभा सीटों पर लगातार भाजपा की प्रचंड जीत के बावजूद किसी भी विधायक को मंत्री पद न मिलने की ख़बर योगी सरकार के शपथग्रहण के बाद दूसरे दिन शनिवार को भी खूब चर्चा में रही। किसी भी विधायक को मंत्री पद न मिलने के लोग तरह-तरह के कारण गिनाते रहे, जबकि भाजपा इस पर खुलकर कुछ भी बोलने से बचती रही। उधर, जानकारों का कहना है कि चूंकि जिले में जातीय समीकरण और ज्वलंत मुद्दों की तासीर चुनाव में काफी ठंडी रही, लिहाजा खीरी को सरकार में कुछ नहीं मिला। हालांकि 2024 में लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए संगठन अगले चुनाव के दौरान मंत्रिमंडल में जरूर फेरबदल कर सकता है।
जिले में तीन ओबीसी विधायक निघासन से शशांक वर्मा, सदर से योगेश वर्मा और गोला से अरविंद गिरि हैं, तो दो दलित समाज से श्रीनगर (सु) से मंजू त्यागी और कस्ता (सु) से सौरभ सिंह सोनू विधायक हैं। धौरहरा से एक ब्राह्मण विधायक विनोद अवस्थी व मोहम्मदी से क्षत्रिय विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह के नाम शामिल हैं। वहीं, पलिया विधायक रोमी साहनी पंजाबी खत्री समाज से आते हैं।
उधर, पार्टी से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि योगी सरकार 2.0 का मंत्रिमंडल का गठन 2024 में आने वाले चुनावों की लकीर खींचता है और जिले में भाजपा को अभी तक कोई खतरा दिखाई नहीं दिया। लिहाजा संगठन ने सरकार में उन जगहों को महत्व दिया है। जहां से 2024 में वोटों की फसल लहलहा सके। क्योंकि, लोकसभा चुनाव में संबंधित मंत्री को अपने क्षेत्र में काम करना पड़ेगा।
विज्ञापन
ओबीसी समाज के नौ लाख वोटर में तीन विधायक, एक सांसद ओबीसी
लखीमपुर खीरी। जिले में 28.7 लाख वोटर में सबसे ज्यादा ओबीसी समाज का करीब नौ लाख मतदाता है। इसमें ओबीसी नौ लाख, दलित 5 लाख 71 हजार, मुस्लिम चार लाख 20 हजार, ब्राह्मण करीब तीन लाख, वैश्य 2 लाख 80 हजार, सिख 1,12,000, क्षत्रिय 1,20,000 जाति के वोटर हैं। ओबीसी समाज से यहां एक सांसद और तीन विधायक शामिल हैं। ऐसे में भाजपा को जातीय समीकरण के हिसाब से अभी माहौल सुरक्षित लगता है। क्योंकि, धौरहरा से सांसद रेखा वर्मा जहां पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। वहीं, सदर विधायक योगेश वर्मा, निघासन विधायक शशांक वर्मा और गोला विधायक अरविंद गिरि भी ओबीसी समाज से आते हैं।
दूसरे नंबर पर दलित समाज से जुड़ा वोटर है, जो कि बसपा के ठीक से न लड़ने के कारण भाजपाई हो गया है। भाजपा को भरोसा है कि दलित समाज का वोटर उनसे नहीं छिटकेगा। ऐसे में दलित समाज के दो विधायकों को तवज्जो नहीं मिली। तीसरे नंबर पर मुस्लिम समाज का 4.2 लाख वोटर है, जो ध्रुवीकरण के चलते सपा को वोट करता है, जबकि, चौथ नंबर पर करीब तीन लाख ब्राह्मण समाज का मतदाता है। इस समाज से केंद्र में अजय मिश्र टेनी जहां मंत्री हैं, वहीं धौरहरा से विनोद अवस्थी विधायक। टेनी के केंद्र में मंत्री होने से भाजपा को ब्राह्मणों से भी कोई खतरा नहीं लगता। जानकारों का कहना है कि जातीय समीकरण के हिसाब से भाजपा को जिले में गणित ठीक लगता है, ऐसे में लोकसभा चुनावों से पहले कम से कम यहां कोई परिवर्तन नहीं होने वाला।
भाजपा की जीत से टेनी को मिली बड़ी राहत
लखीमपुर खीरी। पिछले साल राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में छाये रहे पसगवां और तिकुनिया कांड का भी चुनाव में कोई असर नहीं दिखा। जिस निघासन विधान सभा क्षेत्र के तिकुनिया में हिंसा हुई थी, वहां पर भाजपा के शशांक वर्मा ने जिले भर में 40 हजार वोटों से भी बड़ी जीत हासिल की है। ऐसे में संगठन और सरकार भी जिल में भाजपा की स्थिति मजबूत मानती है। उधर, भाजपा की जीत से ब्राह्मण समाज के केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी को भी बड़ी राहत मिली है। कई बार ऐसे कयास लगे कि तिकुनिया हिंसा की वजह से उनसे मंत्री पद छिन सकता है, लेकिन, चुनाव में तिकुनिया हिंसा का कोई असर नहीं दिखा, जिससे केंद्रीय नेतृत्व से टेनी को भी बड़ी राहत मिली और उनका राजनीतिक कद मजबूत हुआ।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जितिन प्रसाद फिर बने मंत्री
लखीमपुर खीरी। धौरहरा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे जितिन प्रसाद को इस बार फिर योगी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। वह पिछले साल ही कांग्रेस छोड़कर भाजपाई हुए हैं और भाजपा ने उन्हें एमएलसी बनाकर पिछली योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया था। इस बार भी सरकार और संगठन में उनका कद बरकरार रखा गया है। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि धौरहरा से सांसद रहे जितिन प्रसाद को संगठन 2024 में जिले में लोक सभा प्रत्याशी के तौर पर उतार सकता है। लखीमपुर समेत जिले के पड़ोसी जिले में उनकी अच्छी पकड़ है। ऐसे में संगठन ने योगी 2.0 सरकार में हर समीकरण को साधते हुए मंत्री पद से नवाजे हैं और 2024 के लिये अभी से ही लकीर खींच दी है।
जिले में कुल मतदाता 28.7 लाख
जातीय आंकड़े (अनुमानित)
ओबीसी......................900000
दलित......................... 571000
मुस्लिम......................4,20,000
ब्राम्हण...................... 300000
वैश्य.........................280000
सिख..........................112000
क्षत्रिय ......................... 116000
कायस्थ....................77000
थारू...........................30000
अन्य................... 52000
खत्री---------------16000
मंत्री पद के संबंध में संगठन का निर्णय सर्वमान्य है। संगठन बैठकर रणनीति तय करता है कि किसे मंत्री पद दिया जाए। निश्चित ही जिले में माहौल हमारे पक्ष में है। हम 2024 के चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। हमें हर जाति वर्ग के लोगों ने वोट किया है। यह सही है कि चुनाव में भी भाजपा के पक्ष में माहौल रहा और विरो ध का कोई असर नहीं दिखा। जातीय समीकरण सधे होने की वजह से मंत्री पद न मिलना सही बात नहीं है। हमें हर जाति और वर्ग के लोगों ने वोट किया है।
- शेष नारायण मिश्रा, क्षेत्रीय अध्यक्ष, अवध प्रांत,भाजपा
विज्ञापन
जिले में कुल 28.7 लाख मतदाता में सबसे ज्यादा करीब नौ लाख ओबीसी मतदाता
पसगवां से लेकर तिकुनिया कांड तक का नहीं दिखा कोई असर
लखीमपुर खीरी। जिले की आठों विधानसभा सीटों पर लगातार भाजपा की प्रचंड जीत के बावजूद किसी भी विधायक को मंत्री पद न मिलने की ख़बर योगी सरकार के शपथग्रहण के बाद दूसरे दिन शनिवार को भी खूब चर्चा में रही। किसी भी विधायक को मंत्री पद न मिलने के लोग तरह-तरह के कारण गिनाते रहे, जबकि भाजपा इस पर खुलकर कुछ भी बोलने से बचती रही। उधर, जानकारों का कहना है कि चूंकि जिले में जातीय समीकरण और ज्वलंत मुद्दों की तासीर चुनाव में काफी ठंडी रही, लिहाजा खीरी को सरकार में कुछ नहीं मिला। हालांकि 2024 में लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए संगठन अगले चुनाव के दौरान मंत्रिमंडल में जरूर फेरबदल कर सकता है।
जिले में तीन ओबीसी विधायक निघासन से शशांक वर्मा, सदर से योगेश वर्मा और गोला से अरविंद गिरि हैं, तो दो दलित समाज से श्रीनगर (सु) से मंजू त्यागी और कस्ता (सु) से सौरभ सिंह सोनू विधायक हैं। धौरहरा से एक ब्राह्मण विधायक विनोद अवस्थी व मोहम्मदी से क्षत्रिय विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह के नाम शामिल हैं। वहीं, पलिया विधायक रोमी साहनी पंजाबी खत्री समाज से आते हैं।
विज्ञापन
उधर, पार्टी से जुड़े वरिष्ठ सूत्रों का कहना है कि योगी सरकार 2.0 का मंत्रिमंडल का गठन 2024 में आने वाले चुनावों की लकीर खींचता है और जिले में भाजपा को अभी तक कोई खतरा दिखाई नहीं दिया। लिहाजा संगठन ने सरकार में उन जगहों को महत्व दिया है। जहां से 2024 में वोटों की फसल लहलहा सके। क्योंकि, लोकसभा चुनाव में संबंधित मंत्री को अपने क्षेत्र में काम करना पड़ेगा।
विज्ञापन
ओबीसी समाज के नौ लाख वोटर में तीन विधायक, एक सांसद ओबीसी
लखीमपुर खीरी। जिले में 28.7 लाख वोटर में सबसे ज्यादा ओबीसी समाज का करीब नौ लाख मतदाता है। इसमें ओबीसी नौ लाख, दलित 5 लाख 71 हजार, मुस्लिम चार लाख 20 हजार, ब्राह्मण करीब तीन लाख, वैश्य 2 लाख 80 हजार, सिख 1,12,000, क्षत्रिय 1,20,000 जाति के वोटर हैं। ओबीसी समाज से यहां एक सांसद और तीन विधायक शामिल हैं। ऐसे में भाजपा को जातीय समीकरण के हिसाब से अभी माहौल सुरक्षित लगता है। क्योंकि, धौरहरा से सांसद रेखा वर्मा जहां पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। वहीं, सदर विधायक योगेश वर्मा, निघासन विधायक शशांक वर्मा और गोला विधायक अरविंद गिरि भी ओबीसी समाज से आते हैं।
दूसरे नंबर पर दलित समाज से जुड़ा वोटर है, जो कि बसपा के ठीक से न लड़ने के कारण भाजपाई हो गया है। भाजपा को भरोसा है कि दलित समाज का वोटर उनसे नहीं छिटकेगा। ऐसे में दलित समाज के दो विधायकों को तवज्जो नहीं मिली। तीसरे नंबर पर मुस्लिम समाज का 4.2 लाख वोटर है, जो ध्रुवीकरण के चलते सपा को वोट करता है, जबकि, चौथ नंबर पर करीब तीन लाख ब्राह्मण समाज का मतदाता है। इस समाज से केंद्र में अजय मिश्र टेनी जहां मंत्री हैं, वहीं धौरहरा से विनोद अवस्थी विधायक। टेनी के केंद्र में मंत्री होने से भाजपा को ब्राह्मणों से भी कोई खतरा नहीं लगता। जानकारों का कहना है कि जातीय समीकरण के हिसाब से भाजपा को जिले में गणित ठीक लगता है, ऐसे में लोकसभा चुनावों से पहले कम से कम यहां कोई परिवर्तन नहीं होने वाला।
भाजपा की जीत से टेनी को मिली बड़ी राहत
लखीमपुर खीरी। पिछले साल राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में छाये रहे पसगवां और तिकुनिया कांड का भी चुनाव में कोई असर नहीं दिखा। जिस निघासन विधान सभा क्षेत्र के तिकुनिया में हिंसा हुई थी, वहां पर भाजपा के शशांक वर्मा ने जिले भर में 40 हजार वोटों से भी बड़ी जीत हासिल की है। ऐसे में संगठन और सरकार भी जिल में भाजपा की स्थिति मजबूत मानती है। उधर, भाजपा की जीत से ब्राह्मण समाज के केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी को भी बड़ी राहत मिली है। कई बार ऐसे कयास लगे कि तिकुनिया हिंसा की वजह से उनसे मंत्री पद छिन सकता है, लेकिन, चुनाव में तिकुनिया हिंसा का कोई असर नहीं दिखा, जिससे केंद्रीय नेतृत्व से टेनी को भी बड़ी राहत मिली और उनका राजनीतिक कद मजबूत हुआ।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जितिन प्रसाद फिर बने मंत्री
लखीमपुर खीरी। धौरहरा से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे जितिन प्रसाद को इस बार फिर योगी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। वह पिछले साल ही कांग्रेस छोड़कर भाजपाई हुए हैं और भाजपा ने उन्हें एमएलसी बनाकर पिछली योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया था। इस बार भी सरकार और संगठन में उनका कद बरकरार रखा गया है। पार्टी से जुड़े वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि धौरहरा से सांसद रहे जितिन प्रसाद को संगठन 2024 में जिले में लोक सभा प्रत्याशी के तौर पर उतार सकता है। लखीमपुर समेत जिले के पड़ोसी जिले में उनकी अच्छी पकड़ है। ऐसे में संगठन ने योगी 2.0 सरकार में हर समीकरण को साधते हुए मंत्री पद से नवाजे हैं और 2024 के लिये अभी से ही लकीर खींच दी है।
जिले में कुल मतदाता 28.7 लाख
जातीय आंकड़े (अनुमानित)
ओबीसी......................900000
दलित......................... 571000
मुस्लिम......................4,20,000
ब्राम्हण...................... 300000
वैश्य.........................280000
सिख..........................112000
क्षत्रिय ......................... 116000
कायस्थ....................77000
थारू...........................30000
अन्य................... 52000
खत्री---------------16000
मंत्री पद के संबंध में संगठन का निर्णय सर्वमान्य है। संगठन बैठकर रणनीति तय करता है कि किसे मंत्री पद दिया जाए। निश्चित ही जिले में माहौल हमारे पक्ष में है। हम 2024 के चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। हमें हर जाति वर्ग के लोगों ने वोट किया है। यह सही है कि चुनाव में भी भाजपा के पक्ष में माहौल रहा और विरो ध का कोई असर नहीं दिखा। जातीय समीकरण सधे होने की वजह से मंत्री पद न मिलना सही बात नहीं है। हमें हर जाति और वर्ग के लोगों ने वोट किया है।
- शेष नारायण मिश्रा, क्षेत्रीय अध्यक्ष, अवध प्रांत,भाजपा