फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Bread on the shovel, shelter of the parish, what nothing was done for bread for two times

Lakhimpur Kheri News: फावड़े पर रोटी, पल्ली का बसेरा, दो वक्त की रोटी के लिए क्या कुछ नहीं किया

Sun, 23 Jul 2023 12:35 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jul 2023 12:35 AM IST
विज्ञापन
Bread on the shovel, shelter of the parish, what nothing was done for bread for two times
फावडे पर रोटी सेंकता कल्लू
लखीमपुर खीरी। गुरबत की तेज आग पे अक्सर पकाई भूख, खुशहालियों के शहर में क्या कुछ नहीं किया। इकबाल साजिद का लिखा यह शेर नौधन पटना गांव के कल्लू की कहानी बखूबी बयां कर देता है। गांव से काम की तलाश में आए कल्लू ने सड़क किनारे पल्ली तानकर बसेरा बनाया है। दो ईंटों का चूल्हा है। पेट की आग तेज हुई तो फावड़े पर रोटियां सेंक लीं। भूख मिटी तो ईंटों का तकिया लगाकर सो गए। अगली सुबह फिर मजदूरी।
विज्ञापन

परिवार को दो वक्त की रोटी देने के लिए नकहा ब्लॉक के नौधन पटना गांव के कल्लू को तमाम संघर्षों से जूझना पड़ रहा है। उसका बेटा पिंकू अभी भले ही उम्र से बड़ा न हुआ हो लेकिन पिता की मजबूरी समझता है और उनका पूरा साथ देता है। कल्लू ने बताया कि बरसात होने की वजह से गांव और आस-पास काम नहीं मिला तो दोनों शहर आ गए। यहां उन्हें पीलीभीत-बस्ती हाईवे के किनारे कमला डिग्री कॉलेज के पीछे बन रहे मकान में ईंट-गारा ढोने का काम तो मिल गया लेकिन रहने-खाने का कोई ठिकाना नहीं।
विज्ञापन

दोनों के लिए काम के बाद रोज घर लौटना भी काफी मुश्किल था। पैसा और समय दोनों की बचत के लिए सड़क किनारे ही पल्ली तान कर अपना बसेरा बना लिया। बर्तन के नाम पर दोनों के पास एक थाली और एक लोटा है। भूख लगने पर थाली में आटा गूंथ लिया और मजदूरी में उपयोग होने वाले फावड़े को तवा बना लिया। दो ईंट रखकर बनाए गए चूल्हे पर फावड़ा रखकर रोटी सेंक ली। कल्लू ने बताया कि गांव से आए दस दिन हो गए हैं। तब से इसी तरह अपनी जिंदगी बिता रहे हैं। इस बीच एक बार भी अपने घर नहीं गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


बेटी के हाथ पीले करने की है जिम्मेदारी
नौधन पटना निवासी कल्लू के कंधों पर उसकी बेटी के हाथ पीले करने की जिम्मेदारी है। इसी को लेकर कल्लू काफी परेशान रहता है। उसका कहना था कि जब तक बिटिया के हाथ पीले नहीं हो जाते हैं, कितनी भी मेहनत करनी पड़े, करता रहूंगा। बता दें कि कल्लू के परिवार में एक बेटा, बेटी के अलावा पत्नी है।


100 दिन के रोजगार से नहीं भरता साल भर पेट
ग्रामीणों को रोजगार मिले इसको लेकर मनरेगा योजना की शुरूआत की गई लेकिन आज भी सैकड़ों ग्रामीण काम की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर दूर आते-जाते हैं। ऐसे लोगों का कहना है कि 100 दिन के रोजगार से साल भर पेट नहीं भरता। इसी को लेकर घर परिवार से दूर रहकर मजदूरी करने जाना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed