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Lakhimpur Kheri News: चांद के साथ उतरी रहमतें, माह-ए-रमजान का आगाज
Thu, 19 Feb 2026 11:28 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 19 Feb 2026 11:28 PM IST
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मौलाना मोहम्मद रईस नदवी
लखीमपुर खीरी। इस्लामी कैलेंडर का पवित्र महीना रमजान बुधवार शाम चांद दिखने के साथ शुरू हो गया। रमजान को रहमत, बरकत और बख्शीश का मुकद्दस महीना माना जाता है, जिसमें हर मुसलमान पर रोजा फर्ज किया गया है।
हिदायतनगर स्थित हुदा मस्जिद के पेश इमाम व मदरसा महादुल ईमान के मोहतमिम मौलाना मोहम्मद रईस नदवी ने बताया कि इस महीने में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। नेकी का सवाब सत्तर गुना तक बढ़ जाता है। नफ्ल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब कई गुना अधिक मिलता है।
उन्होंने पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के कथन का हवाला देते हुए कहा कि अगर लोगों को रमजान की वास्तविक अहमियत मालूम हो जाए तो वे पूरे साल रमजान की ख्वाहिश करें। रोजेदारों को सहरी करने की ताकीद की गई है, क्योंकि सहरी करने वालों पर अल्लाह की विशेष रहमत बताई गई है।
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आखिरी अशरों की अहमियत
मौलाना ने बताया कि रमजान तीन अशरों में बंटा है। पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा दोजख से निजात का। आखिरी दस दिनों की ताक रातों में शब-ए-कद्र की तलाश करने की बात कही गई है, जो हजार महीनों से अफजल मानी गई है। 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं रात को शब-ए-कद्र तलाश करने की सलाह दी गई है। अधिकांश आलिम 27वीं रात को खास अहमियत देते हैं।
तरावीह का सिलसिला शुरू
चांद नजर आते ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो गई। शहर की जामा मस्जिद, मीनार मस्जिद, सुनहरी मस्जिद, कचहरी मस्जिद, गोटय्याबाग, हुदा मस्जिद, ईदगाह मस्जिद और महाराज नगर समेत जिले की अन्य मस्जिदों में कुरान की तिलावत का सिलसिला शुरू हो गया है। तरावीह में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंच रहे हैं।
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हिदायतनगर स्थित हुदा मस्जिद के पेश इमाम व मदरसा महादुल ईमान के मोहतमिम मौलाना मोहम्मद रईस नदवी ने बताया कि इस महीने में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। नेकी का सवाब सत्तर गुना तक बढ़ जाता है। नफ्ल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब कई गुना अधिक मिलता है।
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उन्होंने पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के कथन का हवाला देते हुए कहा कि अगर लोगों को रमजान की वास्तविक अहमियत मालूम हो जाए तो वे पूरे साल रमजान की ख्वाहिश करें। रोजेदारों को सहरी करने की ताकीद की गई है, क्योंकि सहरी करने वालों पर अल्लाह की विशेष रहमत बताई गई है।
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आखिरी अशरों की अहमियत
मौलाना ने बताया कि रमजान तीन अशरों में बंटा है। पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा दोजख से निजात का। आखिरी दस दिनों की ताक रातों में शब-ए-कद्र की तलाश करने की बात कही गई है, जो हजार महीनों से अफजल मानी गई है। 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं रात को शब-ए-कद्र तलाश करने की सलाह दी गई है। अधिकांश आलिम 27वीं रात को खास अहमियत देते हैं।
तरावीह का सिलसिला शुरू
चांद नजर आते ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो गई। शहर की जामा मस्जिद, मीनार मस्जिद, सुनहरी मस्जिद, कचहरी मस्जिद, गोटय्याबाग, हुदा मस्जिद, ईदगाह मस्जिद और महाराज नगर समेत जिले की अन्य मस्जिदों में कुरान की तिलावत का सिलसिला शुरू हो गया है। तरावीह में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंच रहे हैं।