{"_id":"6a2af48532f052be2b0d009b","slug":"ayush-mohan-mishra-a-young-writer-from-gola-honored-with-an-honorary-doctorate-in-new-delhi-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1002-177308-2026-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: गोला के युवा लेखक आयुष मोहन मिश्रा नई दिल्ली में मानद डॉक्टरेट से सम्मानित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: गोला के युवा लेखक आयुष मोहन मिश्रा नई दिल्ली में मानद डॉक्टरेट से सम्मानित
Thu, 11 Jun 2026 11:16 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 11 Jun 2026 11:16 PM IST
विज्ञापन
दिल्ली में सम्मानित युवा लेखक आयुष मोहन मिश्रा। स्रोत : स्वयं
गोला गोकर्णनाथ। नगर निवासी युवा लेखक आयुष मोहन मिश्रा को नई दिल्ली में आयोजित समारोह के दौरान मानक डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया गया।
आयुष मोहन मिश्रा ने बताया कि 7 जून को नई दिल्ली के भारत मंडपम में नीति आयोग संस्था की ओर से समारोह आयोजित किया गया था।
इसमें उन्हें 21 वर्ष की आयु में पहली पुस्तक द सीक्रेट ऑफ योर स्पिरिचुअल पावर के लिए मानक डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया गया है। इस पुस्तक का अनुवाद सात भारतीय भाषाओं में किया गया। इस पुस्तक की विश्वभर में एक लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।
उनकी दूसरी पुस्तक फिलॉसफी ऑफ कलियुग भी प्रकाशित हो चुकी है। यह पुस्तक भगवान श्रीकृष्ण द्वारा वर्णित कलियुग की अवधारणाओं पर आधारित है और यह बताती है कि आधुनिक युग में मनुष्य स्वयं अपने पतन और समस्याओं का कारण कैसे बनता जा रहा है। आयुष मोहन मिश्रा की उपलब्धि पर पिता विजय प्रकाश मिश्रा सहित परिवार में खुशी का माहौल है।
विज्ञापन
आयुष मोहन मिश्रा ने बताया कि 7 जून को नई दिल्ली के भारत मंडपम में नीति आयोग संस्था की ओर से समारोह आयोजित किया गया था।
इसमें उन्हें 21 वर्ष की आयु में पहली पुस्तक द सीक्रेट ऑफ योर स्पिरिचुअल पावर के लिए मानक डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया गया है। इस पुस्तक का अनुवाद सात भारतीय भाषाओं में किया गया। इस पुस्तक की विश्वभर में एक लाख से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।
उनकी दूसरी पुस्तक फिलॉसफी ऑफ कलियुग भी प्रकाशित हो चुकी है। यह पुस्तक भगवान श्रीकृष्ण द्वारा वर्णित कलियुग की अवधारणाओं पर आधारित है और यह बताती है कि आधुनिक युग में मनुष्य स्वयं अपने पतन और समस्याओं का कारण कैसे बनता जा रहा है। आयुष मोहन मिश्रा की उपलब्धि पर पिता विजय प्रकाश मिश्रा सहित परिवार में खुशी का माहौल है।
विज्ञापन