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Lakhimpur Kheri News: ठगी की घटनाएं बढ़ी तो हट गए एफआईआर से पीड़ितों के नंबर
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लखीमपुर खीरी। लोगों को साइबर ठगी से बचाने के लिए यूपी पुलिस ने यूपी कॉप एप पर दिखाई देने वाली एफआईआर में दर्ज मोबाइल नंबरों के कुछ अंकों को हटा दिया गया है। यह एप कोई भी इंस्टाल करके दर्ज मुकदमों से जानकारी, नाम और मोबाइल नंबर को देखकर उसके साथ ठगी कर सकता है। इसलिए एहतियातन यह कदम उठाया गया है।
पुलिस में शिकायत करने और मुकदमा दर्ज होने के बाद पीड़ित को कोतवाली और थाने के चक्कर न काटने पड़ें, इसको लेकर यूपी काॅप नाम से एक एप बनाया गया। एप के माध्यम से कोई कहीं से भी बैठकर किसी भी जिले के थाने और कोतवाली में दर्ज होने वाली एफआईआर की जानकारी ले सकता है।
बीते कुछ दिनों से दर्ज एफआईआर में मोबाइल नंबरों के कुछ अंकों को छुपा दिया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल नंबर से ठग लोगों की निजी जानकारी चुरा सकते हैं। इससे ठगी की घटनाएं भी हो सकती हैं। इसी को देखते हुए यह कवायद शुरू की गई है।
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करीब बीस दिन पहले से शुरू हुई यह प्रक्रिया में अब एफआईआर कापी में लिखे गए मोबाइल नंबर को कुछ इस तरह से 98396XXXXX दर्शाया जा रहा है।
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पुलिस बनकर ठगी की घटना को अंजाम देने की कोशिश
कुछ महीने पहले बांकेगंज चौकी क्षेत्र में एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। मारपीट की घटना में पुलिस जांच कर रही थी। इसी दौरान एक ठग से इसका फायदा उठाते हुए महिला को फोन करते हुए मामले को सुलटाने के लिए रुपयों की डिमांड की थी। महिला सजगता का परिचय देते हुए तत्काल चौकी पहुंची, जहां उसने पूरी बात बताई और ठगी की घटना टाली जा सकी।
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ठग रखते हैं सटीक जानकारी
ठगी की घटना को अंजाम देने से पहले सारी जानकारी एकत्र कर लेते हैं। ठग कुछ इस तरह से लोगों को अपनी बातों में उलझा देते हैं कि वह उनके झांसे में आसानी से आ जाता है और वह ठग से वह निजी जानकारियां साझा कर देते हैं। ठग के झांसे में आते ही वह पूरा खाता खाली कर देते हैं। इस बात का एहसास काफी देर से होता है।
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ठगी से बचने के लिए यह करें
आने वाली अनचाही काल से बचें।
किसी अनजान के साथ निजी जानकारी साझा न करें।
मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी को न बताएं।
अनजाने लिंक पर न करें क्लिक, ठगी का हो सकते हैं शिकार
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पुलिस में शिकायत करने और मुकदमा दर्ज होने के बाद पीड़ित को कोतवाली और थाने के चक्कर न काटने पड़ें, इसको लेकर यूपी काॅप नाम से एक एप बनाया गया। एप के माध्यम से कोई कहीं से भी बैठकर किसी भी जिले के थाने और कोतवाली में दर्ज होने वाली एफआईआर की जानकारी ले सकता है।
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बीते कुछ दिनों से दर्ज एफआईआर में मोबाइल नंबरों के कुछ अंकों को छुपा दिया गया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल नंबर से ठग लोगों की निजी जानकारी चुरा सकते हैं। इससे ठगी की घटनाएं भी हो सकती हैं। इसी को देखते हुए यह कवायद शुरू की गई है।
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करीब बीस दिन पहले से शुरू हुई यह प्रक्रिया में अब एफआईआर कापी में लिखे गए मोबाइल नंबर को कुछ इस तरह से 98396XXXXX दर्शाया जा रहा है।
पुलिस बनकर ठगी की घटना को अंजाम देने की कोशिश
कुछ महीने पहले बांकेगंज चौकी क्षेत्र में एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। मारपीट की घटना में पुलिस जांच कर रही थी। इसी दौरान एक ठग से इसका फायदा उठाते हुए महिला को फोन करते हुए मामले को सुलटाने के लिए रुपयों की डिमांड की थी। महिला सजगता का परिचय देते हुए तत्काल चौकी पहुंची, जहां उसने पूरी बात बताई और ठगी की घटना टाली जा सकी।
ठग रखते हैं सटीक जानकारी
ठगी की घटना को अंजाम देने से पहले सारी जानकारी एकत्र कर लेते हैं। ठग कुछ इस तरह से लोगों को अपनी बातों में उलझा देते हैं कि वह उनके झांसे में आसानी से आ जाता है और वह ठग से वह निजी जानकारियां साझा कर देते हैं। ठग के झांसे में आते ही वह पूरा खाता खाली कर देते हैं। इस बात का एहसास काफी देर से होता है।
ठगी से बचने के लिए यह करें
आने वाली अनचाही काल से बचें।
किसी अनजान के साथ निजी जानकारी साझा न करें।
मोबाइल नंबर पर आने वाले ओटीपी को न बताएं।
अनजाने लिंक पर न करें क्लिक, ठगी का हो सकते हैं शिकार