फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   animal bio id work starts

Lakhimpur Kheri News: गैंडों की डीएनए प्रोफाइल और बायो आईडी बनाने का काम शुरू

Sat, 24 Dec 2022 07:30 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 24 Dec 2022 07:30 AM IST
विज्ञापन
animal bio id work starts
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व में चल रही गैंडा पुनर्वासन योजना में आबाद गैंडों की डीएनए प्रोफाइल और बायो आईडी बनाने का काम शुरू हो गया है। इससे पहले वर्ष 2014 में दुधवा के गैंडों की बायो आईडी बनाई गई थी। वर्तमान में दुधवा में 46 गैंडे हैं।
विज्ञापन

दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि दुधवा के गैंडा पुनर्वासन योजना में गैंडों की बायो आईडी वर्ष 2014 में बनाई गई थी। तब से कई गैंडों के पहचान चिह्न बदल गए हैं। कुछ में नए चिह्न बने हैं। इसलिए इनकी नई बायो आईडी बनाने का काम जरूरी हो गया है। वर्ष 2014 से 2022 के बीच आठ वर्षों में गैंडों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। कई नए बच्चे पैदा हुए हैं, जिनकी पहली बार डीएनए प्रोफाइल और बायो आईडी बनेगी। मौजूदा समय में दुधवा के गैंडा पुनर्वासन योजना फेज-1 और फेज-2 में कुल 46 गैंडे हैं।
विज्ञापन

गैंडों की बायो आईडी बनाने में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के डॉ. मुदित गुप्ता, डॉ. रोहित रवि, दुधवा टाइगर रिजर्व की बायोलॉजिस्ट अपूर्वा और विपिन सैनी दुधवा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का सहयोग करेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व के गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में गैंडों की डीएनए प्रोफाइल और बायो आईडी बनाने का काम शुरू हो गया है। डीएनए प्रोफाइल बनाने के लिए गैंडों के मल मूत्र, बाल, लार आदि के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। बायो आईडी और डीएनए प्रोफाइल बनाने में गैंडा विशेषज्ञों और दुधवा के फील्ड स्टाफ की मदद ली जा रही है। इसके लिए बाकायदा टीम को प्रशिक्षित किया गया है।
महावतों की टोली को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने दिए विशेष कैमरे
गैंडों की डीएनए प्रोफाइल और बायो आईडी बनाने में महावत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने महावतों की 12 टोलियों को विशेष कैमरे उपलब्ध कराए हैं। इन कैमरों के जरिये गैंडों की तस्वीरें दूर से ली जा सकेंगी। इन कैमरों से ली गईं तस्वीरों में गैंडों के शरीर पर मौजूद बाल और बारीक से बारीक निशान भी दिखेंगे।
बताया कि कैमरे इतने मजबूत हैं कि हाथी यदि उन पर पैर भी रख दे तब भी कैमरे सुरक्षित रहेंगे। महावतों को इन कैमरों को संचालित करने का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। महावत हाथियों पर सवार होकर एक-एक गैंडे की विभिन्न एंगिल से तस्वीरें लेंगे, जिनके जरिए गैंडों की बायो आईडी बनाई जाएगी। अब गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में भी एम स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग होगी। पेट्रोलिंग टीमें दिखने वाले गैंडों की तस्वीरें एप पर अपलोड करेंगे।

दुधवा टाइगर रिजर्व के गैंडा पुनर्वासन क्षेत्र में आबाद गैंडों की डीएनए प्रोफाइल और बायो आईडी बनाई जा रही है। इसमें डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, विशेषज्ञों और दुधवा के फील्ड स्टाफ और महावतों की मदद ली जा रही है। जल्दी ही इसे गुणवत्ता परक ढंग से यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
- संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed