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Lakhimpur Kheri News: कॉरिडोर में परिक्रमा पथ की नींव की खोदाई में मिला प्राचीन संकरा मार्ग
Mon, 22 Sep 2025 11:34 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 22 Sep 2025 11:34 PM IST
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कॉरिडोर निर्माण स्थल पर परिक्रमा पथ की नींव की खोदाई के दौरान मिले प्राचीन निर्माण के अवशेष। सं
गोला गोकर्णनाथ। निर्माणाधीन शिव मंदिर कॉरिडोर में परिक्रमा पथ निर्माण के लिए नींव की खोदाई में धरातल से करीब छह फुट गहराई में गोलाकार आकृति में संकरे मार्ग नुमा अवशेष मिले हैं।
प्राचीन निर्माण के इस अवशेष के फोटो और वीडियो सुरंग मिलने की चर्चा के साथ वायरल होने लगे। जानकारी होने पर उत्सुकता वश देखने के लिए लोग एकत्र होने लगे। सोमवार को पौराणिक शिव मंदिर के दक्षिण ओर के द्वार वाले स्थान पर परिक्रमा पथ की नींव खोदाई की जा रही थी। तभी अचानक धरातल से करीब छह फुट गहराई में गोलाकार आकृति में संकरा मार्ग नुमा निर्माण मिला, जो दोनों ओर से काफी दूरी तक प्रतीत हो रहा है। निर्माण प्राचीन चौड़ी ईंटों का है। हालांकि इस मामले में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष या आसपास के किसी भी व्यक्ति को इससे अधिक कोई जानकारी नहीं है।
शिव मंदिर कमेटी के अध्यक्ष जनार्दन गिरि ने बताया कि काफी समय पहले तीर्थ कुंड में एक ओर से अल्पिका नहर के माध्यम से जल भरने और दूसरी ओर से तीर्थ के गंदे जल के निकासी की व्यवस्था थी। हो सकता है कि तीर्थ कुंड में जल भरने के लिए नहर से तीर्थ तक पुराने नाले के अवशेष हों। सुरंग होने का कोई औचित्य नहीं है।
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यूपीपीसीएल के जेई नितिन सिंह ने बताया कि जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। इस मामले में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष और अन्य लोगों से भी जानकारी की गई है। प्राचीन नाला भी हो सकता है।
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प्राचीन निर्माण के इस अवशेष के फोटो और वीडियो सुरंग मिलने की चर्चा के साथ वायरल होने लगे। जानकारी होने पर उत्सुकता वश देखने के लिए लोग एकत्र होने लगे। सोमवार को पौराणिक शिव मंदिर के दक्षिण ओर के द्वार वाले स्थान पर परिक्रमा पथ की नींव खोदाई की जा रही थी। तभी अचानक धरातल से करीब छह फुट गहराई में गोलाकार आकृति में संकरा मार्ग नुमा निर्माण मिला, जो दोनों ओर से काफी दूरी तक प्रतीत हो रहा है। निर्माण प्राचीन चौड़ी ईंटों का है। हालांकि इस मामले में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष या आसपास के किसी भी व्यक्ति को इससे अधिक कोई जानकारी नहीं है।
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शिव मंदिर कमेटी के अध्यक्ष जनार्दन गिरि ने बताया कि काफी समय पहले तीर्थ कुंड में एक ओर से अल्पिका नहर के माध्यम से जल भरने और दूसरी ओर से तीर्थ के गंदे जल के निकासी की व्यवस्था थी। हो सकता है कि तीर्थ कुंड में जल भरने के लिए नहर से तीर्थ तक पुराने नाले के अवशेष हों। सुरंग होने का कोई औचित्य नहीं है।
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यूपीपीसीएल के जेई नितिन सिंह ने बताया कि जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है। इस मामले में मंदिर कमेटी के अध्यक्ष और अन्य लोगों से भी जानकारी की गई है। प्राचीन नाला भी हो सकता है।