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प्रदर्शन के बाद भी नहीं चेता प्रशासन
बांकेगंज
Updated Mon, 16 Nov 2015 11:39 PM IST
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छठ पूजन के लिए नहर में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर बांकेगंज कस्बे में रविवार पूर्वांचल जिलों की श्रद्धालु महिलाओं के प्रदर्शन के बावजूद भी शासन-प्रशासन नहीं चेता और न ही जनप्रतिनिधियों ने कोई सुध ली। सोमवार की सुबह इंतजार के बाद भी जब खीरी ब्रांच नहर में पानी नहीं आया तो श्रद्धालु महिलाओं के सब्र का बांध टूट गया।
उन्होंने छठ पूजन के लिए सोमवार अपने घरों के किनारे जमीन में गहरे गड्ढों की खुदाई शुरू कर दी। मंगलवार की सुबह व्रत रखने वाली महिलाएं खोदे गए गड्ढों में हैंडपंप से पानी भरकर उसमें खड़े होकर सूर्यदेव को अर्ध्य देंगी।
बता दें कि कस्बा क्षेत्र में कोई नदी या सरोवर न होने के कारण यहां रहने वाली पूर्वांचल की सैकड़ों महिलाएं छठ पूजन के लिए खीरी ब्रांच नहर जाती है।
पूर्वांचल जिलों की महिलाओं नीतू गुप्ता, सीमा गुप्ता, रीता, गीता देवी, प्रीती जायसवाल, पुष्पा देवी, जानकी गुप्ता, रेखा देवी आदि का कहना है कि धार्मिक रीति-रिवाजों के मुताबिक छठ पूजन के लिए व्रत रखने वाली महिलाएं नदी, सरोवर या नहर के जल में खड़े होकर शाम और भोर में सूर्यदेव को अर्ध्य देने के बाद अपना व्रत तोड़ती हैं। श्रद्धालु महिलाओं का आरोप है कि पिछले दस सालों से ऐन छठ पूजन के मौके पर खीरी ब्रांच नहर का पानी बंद कर दिया जाता है।
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उन्होंने छठ पूजन के लिए सोमवार अपने घरों के किनारे जमीन में गहरे गड्ढों की खुदाई शुरू कर दी। मंगलवार की सुबह व्रत रखने वाली महिलाएं खोदे गए गड्ढों में हैंडपंप से पानी भरकर उसमें खड़े होकर सूर्यदेव को अर्ध्य देंगी।
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बता दें कि कस्बा क्षेत्र में कोई नदी या सरोवर न होने के कारण यहां रहने वाली पूर्वांचल की सैकड़ों महिलाएं छठ पूजन के लिए खीरी ब्रांच नहर जाती है।
पूर्वांचल जिलों की महिलाओं नीतू गुप्ता, सीमा गुप्ता, रीता, गीता देवी, प्रीती जायसवाल, पुष्पा देवी, जानकी गुप्ता, रेखा देवी आदि का कहना है कि धार्मिक रीति-रिवाजों के मुताबिक छठ पूजन के लिए व्रत रखने वाली महिलाएं नदी, सरोवर या नहर के जल में खड़े होकर शाम और भोर में सूर्यदेव को अर्ध्य देने के बाद अपना व्रत तोड़ती हैं। श्रद्धालु महिलाओं का आरोप है कि पिछले दस सालों से ऐन छठ पूजन के मौके पर खीरी ब्रांच नहर का पानी बंद कर दिया जाता है।
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