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प्रधानों-बीडीसी को इलेक्शन एडवांस!
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 18 Nov 2016 11:52 PM IST
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- पुराने नोट खपाने में नेताओं-अफसरों का अपना-अपना मैनेजमेंट
- व्यापारियों-अधीनस्थों ने भी संभाली करेंसी बदलने की जिम्मेदारी
एक हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोट खपाने में नेता और अफसर का अपना-अपना अलग मैनेजमेंट है। हालांकि यह खबर न पुष्ट है और न ही इसकी पुष्टि हो सकती है, लेकिन चर्चाएं जोरों पर हैं। यह चर्चाएं पूरी तरह हवा में नहीं हो सकतीं। सदर सीट के एक प्रत्याशी ने पेट्रोल पंप कारोबारी को दस लाख रुपये डीजल-पेट्रोल आदि पर व्यय के लिए 15 लाख रुपये जमा कर दिए तो एक पार्टी के अलग-अलग विधानसभा सीट से तीन प्रत्याशियों ने प्रधानों और बीडीसी में चुनाव मैनेजमेंट बस्ता आदि के खर्चे के नाम पर लाखों रुपये बांट दिए। इनमें एक प्रत्याशी ने तो 60 लाख रुपये बांट दिए हैं। प्रधानों और बीडीसी से कहा गया है कि चुनाव तैयारियों के लिए दिए जा रहे पांच और हजार के पुराने नोट स्वयं और अपने लोगों के जरिये बदलवा लें और तैयारियों में जुट जाएं। इस तरह नेताओं की ब्लैकमनी ठिकाने लग रही है। इसी तरह अधिकारियों ने भी पुरानी करेंसी को ठिकाने लगाने के लिए व्यापारियों को जिम्मेदारी सौंप दी है। शहर के पेट्रोल पंप स्वामी, खाद-पेस्टीसाइड, ज्वैलर्स सहित अन्य बड़े व्यापारी जहां मजबूरी में करेंसी बदलने की कोशिश में लग गए हैं, वहीं वह इससे हलकान भी है। शहर के एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक पुलिस अधिकारी के परिवार में शादी है। उन्हें नोट बदलकर देना पड़ा। इसी तरह तमाम अधिकारियों के नोट बदलने के लिए फोन आ रहे हैं।
निर्माण कार्य बंद, मिस्त्री-मजदूर सब बैंक की लाइन में
नोट बंदी के कारण इन दिनों अधिकांश निर्माण कार्य बंद हैं। राज-मजदूर सभी सुबह ही साइकिल एक जगह खड़ी कर बैंक की लाइन में लग जाते हैं। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में खड़े मजदूर जैसे दिखने वाले इकबाल, सुरेश, राजेश और बब्लू से बात हुई तो सभी रुपये बदलवाने के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि सेठजी के पैसे बदलवाने आए हैं। ऐसे ही पंजाब नेशनल बैंक में खड़े मजदूर पेशा लोगों ने बताया कि नेताजी ने नोट बदलने के लिए भेजा है।
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- व्यापारियों-अधीनस्थों ने भी संभाली करेंसी बदलने की जिम्मेदारी
एक हजार और पांच सौ रुपये के पुराने नोट खपाने में नेता और अफसर का अपना-अपना अलग मैनेजमेंट है। हालांकि यह खबर न पुष्ट है और न ही इसकी पुष्टि हो सकती है, लेकिन चर्चाएं जोरों पर हैं। यह चर्चाएं पूरी तरह हवा में नहीं हो सकतीं। सदर सीट के एक प्रत्याशी ने पेट्रोल पंप कारोबारी को दस लाख रुपये डीजल-पेट्रोल आदि पर व्यय के लिए 15 लाख रुपये जमा कर दिए तो एक पार्टी के अलग-अलग विधानसभा सीट से तीन प्रत्याशियों ने प्रधानों और बीडीसी में चुनाव मैनेजमेंट बस्ता आदि के खर्चे के नाम पर लाखों रुपये बांट दिए। इनमें एक प्रत्याशी ने तो 60 लाख रुपये बांट दिए हैं। प्रधानों और बीडीसी से कहा गया है कि चुनाव तैयारियों के लिए दिए जा रहे पांच और हजार के पुराने नोट स्वयं और अपने लोगों के जरिये बदलवा लें और तैयारियों में जुट जाएं। इस तरह नेताओं की ब्लैकमनी ठिकाने लग रही है। इसी तरह अधिकारियों ने भी पुरानी करेंसी को ठिकाने लगाने के लिए व्यापारियों को जिम्मेदारी सौंप दी है। शहर के पेट्रोल पंप स्वामी, खाद-पेस्टीसाइड, ज्वैलर्स सहित अन्य बड़े व्यापारी जहां मजबूरी में करेंसी बदलने की कोशिश में लग गए हैं, वहीं वह इससे हलकान भी है। शहर के एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक पुलिस अधिकारी के परिवार में शादी है। उन्हें नोट बदलकर देना पड़ा। इसी तरह तमाम अधिकारियों के नोट बदलने के लिए फोन आ रहे हैं।
निर्माण कार्य बंद, मिस्त्री-मजदूर सब बैंक की लाइन में
नोट बंदी के कारण इन दिनों अधिकांश निर्माण कार्य बंद हैं। राज-मजदूर सभी सुबह ही साइकिल एक जगह खड़ी कर बैंक की लाइन में लग जाते हैं। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में खड़े मजदूर जैसे दिखने वाले इकबाल, सुरेश, राजेश और बब्लू से बात हुई तो सभी रुपये बदलवाने के लिए आए थे। उन्होंने बताया कि सेठजी के पैसे बदलवाने आए हैं। ऐसे ही पंजाब नेशनल बैंक में खड़े मजदूर पेशा लोगों ने बताया कि नेताजी ने नोट बदलने के लिए भेजा है।
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