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Lakhimpur Kheri News: दुधवा के जंगल में दुर्लभ प्रजाति का मृत सांप मिला
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दुधवा में मिला दुर्लभ प्रजाति का मृत सांप। स्रोत दुधवा
पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। दुधवा नेशनल पार्क में सोमवार को पार्क और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने एक मृत सांप को देखा। उसकी पहचान दुर्लभ कोंडानारस सैंड प्रजाति के सांप के रूप में हुई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में इस प्रजाति का सांप पहली बार देखा गया है।
दुधवा नेशनल पार्क के डीडी व वन संरक्षक डाॅ. रंगाराजू टी. ने बताया कि दुधवा के बायोलाॅजिस्ट अपूर्व गुप्ता, जूनियर असिस्टेंट सुशांत सिंह और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रतिनिधि रोहित रवि जंगल के मार्ग पर गश्त कर रहे थे। इस दौरान उनको एक मृत सांप घास के पास दिखाई दिया। सांप पेट की ओर उल्टा लेटा था और उसकी चमकदार धारियां व शरीर संरचना ने टीम का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
सभी तरीके से उसकी तस्वीरें खींचने के बाद वैज्ञानिक पहचान के लिए उसे विशेषज्ञ विपिन कुमार सैनी के पास भेजा गया। यहां हर तरफ से विश्लेषण करते हुए उक्त सांप की पहचान कोंडानारस सैंड प्रजाति के रूप में की गई। डीडी ने बताया कि दुर्लभ प्रजाति के सांप मिलने से दुधवा की निगरानी प्रणाली का कार्य भी बेहतर दर्शाता है। इस प्रजाति के सांप कम चर्चित हैं, लेकिन पारिस्थितिकीय संतुलन के लिए आवश्यक हैं।
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एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि बीते दो सालों में दुधवा की टीम ने संस्थाओं के साथ प्रदेश में चार प्रजातियों का पहला रिकाॅर्ड प्रस्तुत किया है, जिसमें इस प्रजाति का सांप भी शामिल है। ऐसे में प्राथमिकता यह होगी कि केवल बड़ी प्रजाति ही नहीं, बल्कि सभी जीवों का संरक्षण और उनको जैविक तंत्र में जीवित रखने के प्रयास हों।
यह है विशेषता
डीडी डाॅ. रंगाराजू टी ने बताया कि इस प्रजाति का सांप मध्यम विषैला, दिनचर और तीव्रगामी कोलुब्रिड प्रजाति का सांप है। यह मुख्यतः छिपकलियों और छोटे स्तनधारियों का शिकार करता है। यह आमतौर पर शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है और भारत के उत्तर पश्चिमी प्रायद्वीपीय हिस्सों, नेपाल और पाकिस्तान में इसका उल्लेख मिलता है। उत्तर प्रदेश में अब तक इस प्रजाति का कोई फोटोग्राफिक रिकाॅर्ड उपलब्ध नहीं था।
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दुधवा नेशनल पार्क के डीडी व वन संरक्षक डाॅ. रंगाराजू टी. ने बताया कि दुधवा के बायोलाॅजिस्ट अपूर्व गुप्ता, जूनियर असिस्टेंट सुशांत सिंह और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रतिनिधि रोहित रवि जंगल के मार्ग पर गश्त कर रहे थे। इस दौरान उनको एक मृत सांप घास के पास दिखाई दिया। सांप पेट की ओर उल्टा लेटा था और उसकी चमकदार धारियां व शरीर संरचना ने टीम का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
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सभी तरीके से उसकी तस्वीरें खींचने के बाद वैज्ञानिक पहचान के लिए उसे विशेषज्ञ विपिन कुमार सैनी के पास भेजा गया। यहां हर तरफ से विश्लेषण करते हुए उक्त सांप की पहचान कोंडानारस सैंड प्रजाति के रूप में की गई। डीडी ने बताया कि दुर्लभ प्रजाति के सांप मिलने से दुधवा की निगरानी प्रणाली का कार्य भी बेहतर दर्शाता है। इस प्रजाति के सांप कम चर्चित हैं, लेकिन पारिस्थितिकीय संतुलन के लिए आवश्यक हैं।
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एफडी डॉ. एच राजामोहन ने बताया कि बीते दो सालों में दुधवा की टीम ने संस्थाओं के साथ प्रदेश में चार प्रजातियों का पहला रिकाॅर्ड प्रस्तुत किया है, जिसमें इस प्रजाति का सांप भी शामिल है। ऐसे में प्राथमिकता यह होगी कि केवल बड़ी प्रजाति ही नहीं, बल्कि सभी जीवों का संरक्षण और उनको जैविक तंत्र में जीवित रखने के प्रयास हों।
यह है विशेषता
डीडी डाॅ. रंगाराजू टी ने बताया कि इस प्रजाति का सांप मध्यम विषैला, दिनचर और तीव्रगामी कोलुब्रिड प्रजाति का सांप है। यह मुख्यतः छिपकलियों और छोटे स्तनधारियों का शिकार करता है। यह आमतौर पर शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है और भारत के उत्तर पश्चिमी प्रायद्वीपीय हिस्सों, नेपाल और पाकिस्तान में इसका उल्लेख मिलता है। उत्तर प्रदेश में अब तक इस प्रजाति का कोई फोटोग्राफिक रिकाॅर्ड उपलब्ध नहीं था।

दुधवा में मिला दुर्लभ प्रजाति का मृत सांप। स्रोत दुधवा