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Lakhimpur Kheri News: बदलती तस्वीर... महिलाएं बन रहीं संपत्ति की मालिक, उद्यमी और चालक

Sat, 07 Mar 2026 11:23 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Sat, 07 Mar 2026 11:23 PM IST
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A changing landscape... Women are becoming property owners, entrepreneurs and drivers
लखीमपुर खीरी। जिले में महिलाओं की तस्वीर तेजी से बदल रही है। जो महिलाएं कभी केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित मानी जाती थीं, वही अब संपत्ति की मालकिन बन रही हैं। कारोबार शुरू कर रही हैं और खुद वाहन चलाकर नई पहचान बना रही हैं। सरकारी योजनाओं से रियायत और बदलती सामाजिक सोच ने खीरी की महिलाओं को आर्थिक व सामाजिक रूप से मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
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जिले में सबसे ज्यादा बदलाव संपत्ति के क्षेत्र में दिख रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पिछले 34 महीनों में 57,905 महिलाओं ने जमीन, मकान सहित अन्य संपत्तियां अपने नाम कराई हैं। वर्ष 2023-24 में 20,640, वर्ष 2024-25 में 20,182 व वर्ष 2025-26 में जनवरी तक 17,083 महिलाएं बैनामों के जरिए संपत्ति की मालकिन बनी हैं। इससे परिवारों को स्टांप शुल्क में छूट का लाभ तो मिला ही। साथ ही महिलाओं की सामाजिक स्थिति भी मजबूत हुई है।
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एआईजी स्टांप अमिताभ कुमार ने बताया कि सरकार ने महिलाओं के पक्ष में बैनामे में मिलने वाली छूट की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये तक कर दी है। एक करोड़ तक की रजिस्ट्री पर एक प्रतिशत की छूट मिलने से महिलाओं के नाम संपत्ति कराने का चलन तेजी से बढ़ा है।
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----खुद संभाल रही वाहनों की स्टीयरिंग--------
जिले की महिलाएं अब सड़क पर भी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हैं। पिछले 34 महीनों में 2,045 महिलाओं ने ड्राइविंग लाइसेंस बनवाए हैं और अब खुद वाहन चला रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में 646, वर्ष 2024-25 में 747 व वर्ष 2025-26 में अब तक 652 महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए हैं।
------3,203 महिलाएं बनीं उद्यमी----
सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की मदद से जिले में 3,203 महिलाएं उद्यमी बन चुकी हैं। महिलाएं दूध उत्पादन, सिलाई-कढ़ाई, मशरूम उत्पादन, अचार, अगरबत्ती, धूपबत्ती, ब्यूटीशियन, शहद उत्पादन जैसे कार्यों से आत्मनिर्भर बन रही हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में 718, वर्ष 2024-25 में 1,011 व वर्ष 2025-26 में अब तक 1,480 महिलाओं को उद्यमी बनाया गया है। उपायुक्त उद्योग रूपेश कुमार आनंद ने बताया कि विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जाए और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए। कई महिलाओं को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान भी मिल चुका है।

---60 हजार बन चुकीं लखपति दीदी----
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी बड़ा काम हुआ है। सालाना एक लाख रुपये या उससे अधिक आय करने वाली महिलाओं को लखपति दीदी का दर्जा दिया जा रहा है। जिले में 28 हजार स्वयं सहायता समूह से 3.25 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। इनमें से 1.32 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 60 हजार महिलाएं अब तक यह मुकाम हासिल कर चुकी हैं। डीसी एनआरएलएम जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि जल्द ही 70 हजार और महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य है।
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