फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   सावन का तीसरा सोमवार आज मंदिरों में उमड़ेंगे शिवभक्त

सावन का तीसरा सोमवार आज मंदिरों में उमड़ेंगे शिवभक्त

Mon, 28 Jul 2014 05:31 AM IST
Lakhimpur
Lakhimpur Updated Mon, 28 Jul 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन

विज्ञापन
छोटी काशी में रविवार से पहुंचने लगे कांवड़ियों के जत्थे
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। सावन का तीसरा सोमवार आज है। शिव मंदिरों में श्रद्धालु उमड़ेंगे। छोटी काशी के नाम से विख्यात नगर गोला गोकर्णनाथ में रविवार से ही कांवड़ियों के जत्थे पहुंचने लगे। सोमवार को यहां कांवड़ियों का रेला चलेगा। सावन के तीसरे सोमवार पर शिव पूजा के महत्व और श्रद्धालुओं के उमड़ने के कारण पुलिस ने भी यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए रूट डाइवर्जन कर दिया है। इससे यातायात व्यवस्था बनी रहेगी और कांवड़ियों को भी कोई दिक्कत नहीं होगी।
00

शिव मंदिर पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी के प्राचीन शिव मंदिर पर रविवार को भी श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ी। भक्तों के जयकारों और घंटा निनाद से नगरी गुंजायमान रही। सुबह से ही कांवड़ियों और अन्य श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर पर जुटी रही। जलाभिषेक और शिव की पूजा करने के लिए भक्तों को देर तक इंतजार करना पड़ा।
विज्ञापन

00

चमत्कारी हैं बूढ़े बाबा और त्रिलोकी नाथ शिव
गोला गोकर्णनाथ। भोले बाबा की प्रिय नगरी छोटी काशी में प्राचीन गोकर्णनाथ मंदिर के अलावा भी कई शिव मंदिर हैं। इनमें दो देवालय काफी प्राचीन और सिद्धि देने वाले हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पहला बूढ़े बाबा का मंदिर गोकर्णनाथ मंदिर के समीप है और दूसरा एक फर्लाग दूर त्रिलोकीनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। बूढ़े बाबा का मंदिर धरातल से लगभग छह फुट ऊंचाई पर पुराने टीले पर बना है, जिसमें करीब चार फुट व्यास का शिवलिंग स्थापित है।
किवदंती है कि मुगल शासक औरंगजेब ने हमला कर इस शिवलिंग को फरसे से काटने का प्रयास किया था। तब समीप के कैमी के पेड़ से हजारों की संख्या में भौंरों ने औरंगजेब की सेना पर आक्रमण कर दिया था, विवश होकर सेना सहित औरंगजेब को वापस भागना पड़ा। कैमी के लगभग 30 फुट गोलाई वाले पेड़ में बिल और भौंरे अब भी देखने को मिलते हैं। शिवलिंग में काटने के निशान भी मौजूद हैं। इस मंदिर में मांगी गई मनौती अवश्य पूरी होती है, इस कारण चमत्कारी शिवलिंग के दर्शनों के लिए भीड़ उमड़ती है।
त्रिलोकीनाथ शिव मंदिर बाबा द्वारिकानाथ मठ में स्थित है। वैष्णव संत द्वारिकादास और शैव संत त्रिलोक गिरि की यह तप स्थली है। त्रिलोकगिरि ने इस टीले पर तंत्रशास्त्र पर आधारित शिव जी का मंदिर बनवाया था। इस देवालय में गुंबद के नीचे चारों ओर खुली खिड़कियां बनाई गई हैं। इनके नीचे प्रवेश और निकास द्वार है।

00
सावन में ऐसे करें महादेव जी की पूजा
पुराणों में वर्णित हैं शिव प्रसन्नता के विधान
गोला गोकर्णनाथ। सावन में भगवान शंकर की प्रसन्नता के लिए वामन पुराण में पूजन अर्चन का विधान बताया गया है। इस पुराण में कहा गया है कि शिव को अत्यन्त प्रिय धतूरे का वृक्ष उन्हीं के हृदय से और बेलवृक्ष लक्ष्मी जी के हाथ से उत्पन्न हुआ है। श्रावण मास में जटामासी के जल से स्नान करवाकर फल से युक्त बेलपत्रों से महादेव जी की पूजा करने, अगुरु की धूप दे घृतयुक्त पूप, लड्डू, दही, मक्खन, उड़द की दाल, भुने जौ एवं कचौड़ी का भोग लगाने से भगवान शिव अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। पूजन के बाद ब्राह्मण को श्वेत बैल, भूरी गौ, स्वर्ण एवं लाल रंग के वस्त्र की दक्षिणा देने को कहा गया है। स्कन्द पुराण में स्वयं भगवान माहेश्वर ने कहा है कि लिंग स्थापना व मंदिर निर्माण से शिवलोक प्राप्ति, शिव मंदिर की सफाई और शिव का दूध, दही, घी, जल स्नान से शरीर निरोग, दीपदान से उत्तम नेत्र, चंवर भेंट से राजसुख, शंख, घंटा दान से विद्वता, शीतल चंदन लगाने से दुखों से मुक्ति, शिव की रथयात्रा निकालने से शोक मुक्ति और आरती करने से सर्वपीड़ा से मुक्ति मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed