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सरकार के गेम प्लान से किसानों के सपने धराशायी
Lakhimpur
Updated Fri, 20 Dec 2013 05:50 AM IST
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धान और गन्ने की खरीद में बिचौलिए हावी
गन्ने के बाद धान किसानों का 99 लाख बकाया
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। सरकारी धान क्रय केंद्रों पर सन्नाटा बीत रहा है, तो मंडियों में बिचौलियों के यहां धान के अंबार लगे हैं। सरकारी खरीद के देर से शुरू होने के कारण लघु एवं सीमांत किसानों को धान का उचित मूल्य नहीं मिल सका है। अब किसान गन्ना सेंटरों पर गन्ना आपूर्ति के प्रयास में जुट गए हैं, लेकिन पर्चियां न मिलने और सेंटर पर व्याप्त अनियमितताओं के चलते किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों के तमाम दावे भी किसानों की मुश्किलों का समाधान नहीं कर पा रहे हैं।
बाक्स....
धान खरीद में कई पेच आज भी बरकरार
जिले में धान खरीद का कुल लक्ष्य 78 हजार एमटी निर्धारित है, जिसके सापेक्ष सरकारी एजेंसियों द्वारा 32716 एमटी धान खरीद का दावा विभागीय अधिकारी कर रहे हैं। जबकि आढ़तियों ने 3008 एमटी धान खरीद की है। यह खरीद 3257 किसानों से की गई है। सूत्रों की माने तो यह आंकड़े हकीकत से ज्यादा कागजी हैं, क्योंकि अधिकांश खरीद बड़े किसानों और बिचौलियों के माध्यम से की गई है। जबकि लघु एवं सीमांत किसानों को धान बेचने का मौका नहीं मिला, क्योंकि उनका धान सरकारी मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। वहीं खरीद एजेंसी पीसीएफ पर किसानों का 99 लाख रुपये भुगतान बकाया है। एफसीआई की नीतियों ने अप्रत्यक्ष तौर पर किसानों का शिकार किया है। एफसीआई ने अभी तक 3968 एमटी सीएमआर का उतार किया है। एक गोदाम पर अभी तक उतार शुरू नहीं हो सका है। राइस मिलर्स एसोसिएशन की मांग पर केंद्र सरकार ने डैमेज मानक में एक प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर मानक चार फीसदी किया गया है, फिर भी समझ के फेर का पेच फंसा हुआ है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी सीबी उत्तम ने बताया कि सीएमआर चावल का उतार धीमा होने के कारण एजेंसिंयों की खरीद धीमी हुई है। वहीं आढ़तियों के लिए लेवी नीति के कुछ नियमों ने उनके सामने मुश्किलें पैदा की हैं।
बाक्स.......
मिलें तो चलीं, नहीं मिल रहा पुराना भुगतान
जिले की सभी चीनी मिलें तो चल गईं हैं, लेकिन किसानों का निजी क्षेत्र की अधिकांश चीनी मिलों पर पिछले पेराई सत्र 2012-13 का अभी भी दो अरब से अधिक गन्ना मूल्य बकाया है। तो इस पेराई सत्र में करीब एक माह बाद मिलों में पेराई सत्र चालू होने से तमाम किसानों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है। फिर भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। अभी भी चीनी मिलों के कई सेंटरों पर पूर्णतया तौल शुरू नहीं हो सकी है और तमाम किसानों को पर्चियां नहीं मिल पाईं हैं। जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि बकाया भुगतान कराने केप्रयास जारी हैं। देर से पेराई सत्र शुरू होने के कारण कुछ सेंटरों पर दिक्कतें हो सकती हैं, जिन्हें दूर कराने केप्रयास किए जा रहे हैं।
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गन्ने के बाद धान किसानों का 99 लाख बकाया
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। सरकारी धान क्रय केंद्रों पर सन्नाटा बीत रहा है, तो मंडियों में बिचौलियों के यहां धान के अंबार लगे हैं। सरकारी खरीद के देर से शुरू होने के कारण लघु एवं सीमांत किसानों को धान का उचित मूल्य नहीं मिल सका है। अब किसान गन्ना सेंटरों पर गन्ना आपूर्ति के प्रयास में जुट गए हैं, लेकिन पर्चियां न मिलने और सेंटर पर व्याप्त अनियमितताओं के चलते किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकारियों के तमाम दावे भी किसानों की मुश्किलों का समाधान नहीं कर पा रहे हैं।
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धान खरीद में कई पेच आज भी बरकरार
जिले में धान खरीद का कुल लक्ष्य 78 हजार एमटी निर्धारित है, जिसके सापेक्ष सरकारी एजेंसियों द्वारा 32716 एमटी धान खरीद का दावा विभागीय अधिकारी कर रहे हैं। जबकि आढ़तियों ने 3008 एमटी धान खरीद की है। यह खरीद 3257 किसानों से की गई है। सूत्रों की माने तो यह आंकड़े हकीकत से ज्यादा कागजी हैं, क्योंकि अधिकांश खरीद बड़े किसानों और बिचौलियों के माध्यम से की गई है। जबकि लघु एवं सीमांत किसानों को धान बेचने का मौका नहीं मिला, क्योंकि उनका धान सरकारी मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। वहीं खरीद एजेंसी पीसीएफ पर किसानों का 99 लाख रुपये भुगतान बकाया है। एफसीआई की नीतियों ने अप्रत्यक्ष तौर पर किसानों का शिकार किया है। एफसीआई ने अभी तक 3968 एमटी सीएमआर का उतार किया है। एक गोदाम पर अभी तक उतार शुरू नहीं हो सका है। राइस मिलर्स एसोसिएशन की मांग पर केंद्र सरकार ने डैमेज मानक में एक प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर मानक चार फीसदी किया गया है, फिर भी समझ के फेर का पेच फंसा हुआ है। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी सीबी उत्तम ने बताया कि सीएमआर चावल का उतार धीमा होने के कारण एजेंसिंयों की खरीद धीमी हुई है। वहीं आढ़तियों के लिए लेवी नीति के कुछ नियमों ने उनके सामने मुश्किलें पैदा की हैं।
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मिलें तो चलीं, नहीं मिल रहा पुराना भुगतान
जिले की सभी चीनी मिलें तो चल गईं हैं, लेकिन किसानों का निजी क्षेत्र की अधिकांश चीनी मिलों पर पिछले पेराई सत्र 2012-13 का अभी भी दो अरब से अधिक गन्ना मूल्य बकाया है। तो इस पेराई सत्र में करीब एक माह बाद मिलों में पेराई सत्र चालू होने से तमाम किसानों को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा है। फिर भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। अभी भी चीनी मिलों के कई सेंटरों पर पूर्णतया तौल शुरू नहीं हो सकी है और तमाम किसानों को पर्चियां नहीं मिल पाईं हैं। जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि बकाया भुगतान कराने केप्रयास जारी हैं। देर से पेराई सत्र शुरू होने के कारण कुछ सेंटरों पर दिक्कतें हो सकती हैं, जिन्हें दूर कराने केप्रयास किए जा रहे हैं।
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