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हादसे में सब्जी विक्रेता की मौत

Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
Lakhimpur
Lakhimpur Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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मृतक के भाई सहित दो गंभीर रूप से घायल
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लखीमपुर खीरी। भीरा थाना क्षेत्र के ग्राम रुद्रपुर गुलरिया से सब्जी विक्रेताओं से भरी एक पिकप शाहजहांपुर जाते समय महेशपुर के निकट अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराई। इस हादसे में पिकप के केबिन में सवार एक सब्जी विक्रेता की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उनके एक भाई सहित दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें यहां जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दुर्घटना के बाद चालक फरार हो गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा है।
भीरा थाना क्षेत्र के ग्राम रुद्रपुर गुलरिया से करीब आधा दर्जन सब्जी विक्रेता किराए की एक पिकप लेकर शाहजहांपुर सब्जी लेने जा रहे थे। पिकप के केबिन में चालक रामू के अलावा गांव निवासी अब्बास अली (35) और उनके छोटे भाई इरशाद (25) दोनों पुत्रगण मदारबक्श बैठे थे। जबकि वीरेंद्र कुमार (25), नसरू (22), तोताराम (21) तथा कल्लू (24) पिकप में पीछे सवार थे। बताया जाता है कि चालक शाहजहांपुर जल्दी पहुंचने के लिए तेज गति में पिकप चला रहा था। उसे उन लोगों ने टोका भी, लेकिन वह नहीं माना। बताया जाता है कि इसी बीच महेशपुर से आगे गोमती मोड़ पर अनियंत्रित होकर पिकप सड़क से उतरने के बाद पेड़ से जा टकराई। इस हादसे में पिकप के केबिन में सवार अब्बास अली की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उनके छोटे भाई इरशाद तथा पिकप के पीछे सवार वीरेंद्र कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। राहगीरों की मदद से पिकप में पीछे सवार साथियों ने घटना की सूचना परिवार वालों और पुलिस को देने के साथ उन्हें जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया। जहां दोनों की दशा गंभीर बनी हुई है।
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मां-बाप की लाठी तो बच्चों के सिर से छिन गया साया
एक के बाद एक मुसीबतों से लड़ता चला आ रहा अब्बास का परिवार
लखीमपुर खीरी। दुर्घटना में भीरा थाना क्षेत्र के ग्राम गुलरिया निवासी अब्बास की मौत के बाद उसके छह नाबालिग बच्चों के सिर से तो पिता का साया उठ ही गया है साथ ही पहले से ही चलने-फिरने से माजूर उनके वृद्ध माता-पिता पर तो मुसीबतों का पहाड़ ही टूट पड़ा है। सभी का रो-रो कर बुरा हाल है।
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भूमिहीन अब्बास अली व उनके भाई इरशाद सहित पूरा परिवार सब्जी बेचकर परिवार का पेट पालते आ रहे हैं। अब्बास के तीन लड़के और तीन लड़कियां हैं। हाड़तोड़ मेहनत के बाद वह छह बच्चों व पत्नी के लिए दो जून की रोटी का खर्च चलाने के बाद थोड़ा बहुत धन अपने चलने-फिरने से माजूर माता-पिता के इलाज और खानपान पर भी खर्च करता था। उनकी मौत की खबर से उनकी पत्नी और बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल है। पत्नी को बच्चों की परवरिश व पढ़ाई-लिखाई के साथ अपनी जिंदगी कैसे बिताएगी यह सोच कर अचेत हो जा रही है।

वृद्ध पिता मदारबक्श व मां जाहिदा का तो हाल उससे भी बुरा है। 2002 में आंधी के दौरान घर की दीवार गिर जाने के कारण जाहिदा दब कर ऐसे घायल हुईं कि आज तक चलने-फिरने तक से माजूर हैं। पिता मदारबक्श को भी पिछले साल साइकिल से जाते समय एक बाइक सवार ने ऐसी टक्कर मारी कि वह पैदल चलने तक से मोहताज हो गए। अब्बास तो अब इस दुनिया में रहे नहीं, दूसरा बेटा इरशाद भी इस दुर्घटना में घायल हो मौत-जिंदगी से जूझ रहा है। हालांकि इस परिवार पर संकट के बादल तो पहले से ही छाए थे, लेकिन अब्बास की मौत ने इस परिवार की जिंदगी को और मुश्किल कर दिया है।
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