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भूमि क्रेता के नाम ही दर्ज करने का आदेश
Lakhimpur
Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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एसडीएम कोर्ट का फैसला
गोला गोकर्णनाथ। तहसील के ग्राम बजीरनगर में 70 लाख रुपये की कृषि भूमि बिना किसी बैनामे के चीनी मिल गोला के नाम दर्ज होने के मुकदमे में एसडीएम ने भूमि पुन: क्रेता रामेश्वरदयाल के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है।
रामेश्वर दयाल के नाम ग्राम बजीरनगर में 4.954 हेक्टेयर भूमि थी। जिसमें उन्होंने 30 जून 1988 को 10 रुपये के स्टांप पर एक तहरीर लिखी थी। जिसमे उन्होंने कहा था कि वह भूमि क्रय किए जाने पर चीनी मिल के सेक्रेटरी थे जो अब नहीं हैं। जमीन मिल की है इसलिए मिल के नाम दर्ज कर दी जाए। आरोप है कि इसी के आधार पर तहसीलदार ने बिना किसी बैनामे के भूमि मिल के नाम करने का आदेश कर दिया, लेकिन अमलदरामद 10 साल बाद 15 मई 1997 को हुआ। तहसील के पैनल लायर ने तीन अगस्त 2004 को तहसीलदार के न्यायालय में याचिका दायर कर तहसीलदार द्वारा जारी दाखिल खारिज का आदेश निरस्त करने की याचना की। जिस पर 11 अक्तूबर 2006 को तहसीलदार ने एकतरफा सुनवाई कर पूर्व आदेश निरस्त कर भूमि रामेश्वरदयाल के नाम दर्ज करने का आदेश किया।
आदेश के बाद चीनी मिल ने दो जनवरी 2007 को वाद दायर किया, जिस पर तहसीलदार ने तीन सितंबर 2011 को वादायरा स्वीकार कर 23 अप्रैल 2011 को न्यायालय तहसीलदार का पहला आदेश लागू करने का आदेश दिया। इस पर पैनल लायर ने एसडीएम न्यायालय में अपील दायर की। जिस पर एसडीएम आलोक कुमार ने भूमि पुन: रामेश्वर दयाल के नाम दर्ज करने का आदेश दिया।
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दूसरी तहसील में सुनवाई की संस्तुति
इस मामले में अपने आदेश में एसडीएम ने साफ तौर पर लिखा है कि बिना बैनामे के भूमि का दाखिल खारिज का आदेश किया जाना विधि विरुद्ध है। इसलिए तहसीलदार न्यायालय के सभी आदेश निरस्त किए जाते हैं। उन्होंने आदेश की प्रति जिला मजिस्ट्रेट को प्रेषित करते हुए इस मामले की सुनवाई गोला तहसील में न कर न्यायहित में अन्य किसी तहसील में ही कराने की संस्तुति की है।
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गोला गोकर्णनाथ। तहसील के ग्राम बजीरनगर में 70 लाख रुपये की कृषि भूमि बिना किसी बैनामे के चीनी मिल गोला के नाम दर्ज होने के मुकदमे में एसडीएम ने भूमि पुन: क्रेता रामेश्वरदयाल के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है।
रामेश्वर दयाल के नाम ग्राम बजीरनगर में 4.954 हेक्टेयर भूमि थी। जिसमें उन्होंने 30 जून 1988 को 10 रुपये के स्टांप पर एक तहरीर लिखी थी। जिसमे उन्होंने कहा था कि वह भूमि क्रय किए जाने पर चीनी मिल के सेक्रेटरी थे जो अब नहीं हैं। जमीन मिल की है इसलिए मिल के नाम दर्ज कर दी जाए। आरोप है कि इसी के आधार पर तहसीलदार ने बिना किसी बैनामे के भूमि मिल के नाम करने का आदेश कर दिया, लेकिन अमलदरामद 10 साल बाद 15 मई 1997 को हुआ। तहसील के पैनल लायर ने तीन अगस्त 2004 को तहसीलदार के न्यायालय में याचिका दायर कर तहसीलदार द्वारा जारी दाखिल खारिज का आदेश निरस्त करने की याचना की। जिस पर 11 अक्तूबर 2006 को तहसीलदार ने एकतरफा सुनवाई कर पूर्व आदेश निरस्त कर भूमि रामेश्वरदयाल के नाम दर्ज करने का आदेश किया।
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आदेश के बाद चीनी मिल ने दो जनवरी 2007 को वाद दायर किया, जिस पर तहसीलदार ने तीन सितंबर 2011 को वादायरा स्वीकार कर 23 अप्रैल 2011 को न्यायालय तहसीलदार का पहला आदेश लागू करने का आदेश दिया। इस पर पैनल लायर ने एसडीएम न्यायालय में अपील दायर की। जिस पर एसडीएम आलोक कुमार ने भूमि पुन: रामेश्वर दयाल के नाम दर्ज करने का आदेश दिया।
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दूसरी तहसील में सुनवाई की संस्तुति
इस मामले में अपने आदेश में एसडीएम ने साफ तौर पर लिखा है कि बिना बैनामे के भूमि का दाखिल खारिज का आदेश किया जाना विधि विरुद्ध है। इसलिए तहसीलदार न्यायालय के सभी आदेश निरस्त किए जाते हैं। उन्होंने आदेश की प्रति जिला मजिस्ट्रेट को प्रेषित करते हुए इस मामले की सुनवाई गोला तहसील में न कर न्यायहित में अन्य किसी तहसील में ही कराने की संस्तुति की है।