‘सत्यमेव जयते’ के रियल हीरो तो ये

Lakhimpur Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। सिने अभिनेता आमिर खान भले ही अपने किरदार से लोगों को भ्रूण हत्या जैसे घिनौने कृत्य को रोकने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, लेकिन अपने शहर में तो ‘सत्यमेव जयते’ के तमाम रियल हीरो मौजूद हैं। ये वे लोग हैं जिनके एक या दो लड़कियां ही हैं, फिर भी उनमें कोई हीन भावना नहीं बल्कि वे खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैंऔर ईश्वर को धन्यवाद देते हैं कि ईश्वर ने उन्हें लड़कियां दी हैं। उनके पास इस बात केतर्क भी हैं कि लड़कियां लड़कों से कम नहीं। यह रियल हीरो आज पूरे समाज के लिए प्रेरणा बने हैं।
विकसित समाज में भी लोगों के मन में कुंठाएं घर किए हैं। भ्रूण हत्या व परीक्षण एक व्यवसाय का रूप ले चुका है। इससे पूरे देश में आबादी का लिंगानुपात गड़बड़ा गया है। बावजूद समाज में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इस सोच को खुली चुनौती दे रहे हैं और बेटी बचाओ अभियान का हिस्सा बने हुए हैं।

केस एक
ईश्वर ने सुन ली

शहर की आफीसर कालोनी में रहने वाले गौरव मिश्रा एक प्राइवेट स्कूल में और उनकी पत्नी प्रिया मिश्रा प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक हैं। एक बिटिया है, नाम दीक्षा है, लेकिन प्रेम से पति-पत्नी इसे ‘मीठा’ कहकर बुलाते हैं। यह दंपति अपनी बिटिया को ही बेटा मानते हैं। ‘मीठा’ कहती है कि स्कूल जाने को अब बड़ा हो गया हूं। गौरव बताते हैं उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की थी कि उन्हें बिटिया ही दे और ईश्वर ने उनकी फरियाद सुन ली।

केस दो
दोनों को खूब पढ़ाएंगे

शहर के मोहल्ला सिकिटहा के रहने वाले गोपाल दीक्षित श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी में मैनेजर हैं। उनकी पत्नी रश्मि दीक्षित सरस्वती विद्या मंदिर में शिक्षिका हैं। इनके यहां तान्या और मान्या दो बिटियां हैं। गोपाल और उनकी पत्नी दोनों खुश हैं। कहते हैं कि बेटियां बेटों से कहीं अच्छी हैं। उनका पूरा ख्याल रखती हैं। फर्क काहे का, दोनों को अच्छा पढ़ाएंगे।

केस तीन

खुशी का ठिकाना न रहा
मोहल्ला काशीनगर के रहने वाले डा. सत्येंद्र दुबे वाईडी डिग्री कालेज केप्राध्यापक हैं। उनकी पत्नी सीमा दुबे ग्रहिणी हैं। इनके मुनल और मिली दो बेटिया हैं। जब बेटियां गर्भ में थीं तो लोगों ने इनसे जांच कराने को भी कहा लेकिन डा. दुबे तैयार न हुए। बोले, ईश्वर पर पूरा भरोसा है। जब बेटियां हुईं तो खुशी का ठिकाना न रहा।

केस चार

जांच क्यों कराते
शहर के मोहल्ला सिकिटहा निवासी आदित्य मिश्रा एक इंश्योरेंस कंपनी में लिपिक हैं, उनकी पत्नी पूनम ग्रहणी हैं। इनकेभी दो पुत्रियां हैं। लेकिन इन्होंने जांच कराने की बात तक नहीं सोचीं। आदित्य मिश्रा कहते हैं, कि आज के युग में लड़काें से लड़कियां हर क्षेत्र में आगे निकल रही हैं। उन्हें गर्व है कि ईश्वर ने उन्हें लड़कियां दी हैं।

केस पांच

हर क्षेत्र में बेटियां आगे
शहर की गंगोत्री कालोनी निवासी सत्येंद्र बहादुर सिंह समाजसेवी हैं, बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देते हैं। उनकी पत्नी गीता सिंह शिक्षिका हैं। इनके सृष्टि और मानसी दो पुत्रियां हैं। सत्येंद्र सिंह कहते हैं, बेटियां हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ रही हैं। सत्येंद्र सिंह स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से बेटी बचाओ अभियान भी चलाते हैं।

केस छह

अल्लाह का शुक्रिया
मोहल्ला ईदगाह निवासी शिक्षिका अंजुमआरा प्राइमरी स्कूल की प्रधानाध्यापक हैं। एक बिटिया अजमी सिद्दीकी है। घर में उसे बेटे जैसा प्यार ही दिया जाता है। अंजुम आरा बताती है कि उनकी बेटी बेटे की तरह ही घर की जिम्मेदारी निभाती है। अंजुम और उनके पति एनए सिद्दीकी बहुत खुश हैं कि अल्लाह ने उन्हें बेटी दी हैं।

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