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यहां पानी तक पर होता है कब्जा
Lakhimpur
Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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आखिर ऐसे हालात मे कैसे टेल तक पहुंचेगा पानी
अलीगंज ब्रांच और बस्तौली रजबहा पर आम हैं यह बात
बिजुआ (लखीमपुर खीरी)। जमीन-जायदाद पर कब्जे तो आपने सुने होंगे, लेकिन सिंचाई के पानी पर कब्जेदारी वाकई अचंभे की बात है। जी हां! यहां सिंचाई के लिए नहरों में पानी तो खूब है, लेकिन उस पर यहां कुछ लोगों का कब्जा रहता है। बिजुआ इलाके की नहरों की तस्वीर तो हमें कुछ यही दिखाती हैं। नहर के पानी से सिंचाई को लेकर यहां कई बार लाठियां तक चटख चुकी हैं।
यहां नहरों में पानी तो है, लेकिन टेल तक पहुंचे भी? यह बात जरूरी नहीं। क्योंकि ब्रांच नहर के शुरू होते ही इसके पानी पर कुछ लोगों का कब्जा हो जाता है। ऐसे में नहर के पानी के भरोसे खेती करने वाले छोटे किसानों के लिए यहां पानी मिलना किसी सौगात से कम नही होता। नहर के पानी को रोके बांस और गन्ने की पत्ती के सूखे बोझ साफ देखे जा सकते हैं। ऐसा नहीं है कि ये हालात एक ही जगह पर हैं। बस्तौली गांव के पास से निकली अलीगंज मुख्य नहर और बस्तौली रजबहा समेत जिले की तमाम नहरों पर कुछ लोग अपने तरीके से पानी पर कब्जा करते हैं। नहर के बीच में बांस बल्लियों को लगाकर उसमें सूखी पत्ती का बोझा डाल देते हैं, जिससे पानी आगे नहीं बढ़ पाता, इन हालात में टेल तक पानी का पहुंचना तो दूर दो फर्लांग के किसान तक पानी को तरसते हैं। वहीं पानी को रोके इन लोगों का अपना तर्क भी है। वह कहते हैं कि विभाग से नहर खुदाई में गहरी हो गई है, वहीं नहर किनारे पक्की सड़क निकलने से पानी का स्तर नीचा हो गया है। जिससे वे अपने खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नहर के जलस्तर को ऊंचा करते हैं। जबकि विभाग कहता है कि पानी को रोकने की शिकायत नहीं मिली है।
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सूख रही है फसल
कई किसानों की फसल पानी के अभाव में प्रभावित हो रही हैं। गर्मी के मौसम को देखते हुए किसान अपनी फसल बचाने के लिए सिंचाई के तमाम जतन कर रहे हैं। नहर के भरोसे खेती करने वाले किसानों की हालत तो काफी खराब है। क्योंकि यहां नहर में अगर पानी आ भी गया तो उस पर रसूखदार किसानों का पहला हक होता है, जब इन बड़े किसानों के खेतों की सिंचाई पूरी हो पाती है, तब तक नहर बंद हो जाती है।
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दोनों ब्रांच नहरों के हालात एक जैसे
बिजुआ ब्लाक में नहर मैलानी जंगल के पास बड़ी नहर से प्रवेश करती है। जो कि भीरा के किनारे से होकर बस्तौला साइफन तक पहुंचती है। बस्तौला से इस नहर में से दो ब्रांच नहरें निकलती है, एक लगभग 51 किमी लंबी अलीगंज ब्रांच कहलाती है जो कि बन्नी गांव होकर दुबग्गा टेल तक जाती है तो दूसरी ब्रांच बस्तोली रजबहा है, जिसका टेल सैदीपुर में हैं। इसके अलावा इस मुख्य नहर से तमाम माइनर हैं। इन दोनों ब्रांच नहरों में जगह-जगह पानी पर कब्जे की तस्वीर साफ नजर आती है।
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अलीगंज ब्रांच और बस्तौली रजबहा पर आम हैं यह बात
बिजुआ (लखीमपुर खीरी)। जमीन-जायदाद पर कब्जे तो आपने सुने होंगे, लेकिन सिंचाई के पानी पर कब्जेदारी वाकई अचंभे की बात है। जी हां! यहां सिंचाई के लिए नहरों में पानी तो खूब है, लेकिन उस पर यहां कुछ लोगों का कब्जा रहता है। बिजुआ इलाके की नहरों की तस्वीर तो हमें कुछ यही दिखाती हैं। नहर के पानी से सिंचाई को लेकर यहां कई बार लाठियां तक चटख चुकी हैं।
यहां नहरों में पानी तो है, लेकिन टेल तक पहुंचे भी? यह बात जरूरी नहीं। क्योंकि ब्रांच नहर के शुरू होते ही इसके पानी पर कुछ लोगों का कब्जा हो जाता है। ऐसे में नहर के पानी के भरोसे खेती करने वाले छोटे किसानों के लिए यहां पानी मिलना किसी सौगात से कम नही होता। नहर के पानी को रोके बांस और गन्ने की पत्ती के सूखे बोझ साफ देखे जा सकते हैं। ऐसा नहीं है कि ये हालात एक ही जगह पर हैं। बस्तौली गांव के पास से निकली अलीगंज मुख्य नहर और बस्तौली रजबहा समेत जिले की तमाम नहरों पर कुछ लोग अपने तरीके से पानी पर कब्जा करते हैं। नहर के बीच में बांस बल्लियों को लगाकर उसमें सूखी पत्ती का बोझा डाल देते हैं, जिससे पानी आगे नहीं बढ़ पाता, इन हालात में टेल तक पानी का पहुंचना तो दूर दो फर्लांग के किसान तक पानी को तरसते हैं। वहीं पानी को रोके इन लोगों का अपना तर्क भी है। वह कहते हैं कि विभाग से नहर खुदाई में गहरी हो गई है, वहीं नहर किनारे पक्की सड़क निकलने से पानी का स्तर नीचा हो गया है। जिससे वे अपने खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नहर के जलस्तर को ऊंचा करते हैं। जबकि विभाग कहता है कि पानी को रोकने की शिकायत नहीं मिली है।
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सूख रही है फसल
कई किसानों की फसल पानी के अभाव में प्रभावित हो रही हैं। गर्मी के मौसम को देखते हुए किसान अपनी फसल बचाने के लिए सिंचाई के तमाम जतन कर रहे हैं। नहर के भरोसे खेती करने वाले किसानों की हालत तो काफी खराब है। क्योंकि यहां नहर में अगर पानी आ भी गया तो उस पर रसूखदार किसानों का पहला हक होता है, जब इन बड़े किसानों के खेतों की सिंचाई पूरी हो पाती है, तब तक नहर बंद हो जाती है।
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दोनों ब्रांच नहरों के हालात एक जैसे
बिजुआ ब्लाक में नहर मैलानी जंगल के पास बड़ी नहर से प्रवेश करती है। जो कि भीरा के किनारे से होकर बस्तौला साइफन तक पहुंचती है। बस्तौला से इस नहर में से दो ब्रांच नहरें निकलती है, एक लगभग 51 किमी लंबी अलीगंज ब्रांच कहलाती है जो कि बन्नी गांव होकर दुबग्गा टेल तक जाती है तो दूसरी ब्रांच बस्तोली रजबहा है, जिसका टेल सैदीपुर में हैं। इसके अलावा इस मुख्य नहर से तमाम माइनर हैं। इन दोनों ब्रांच नहरों में जगह-जगह पानी पर कब्जे की तस्वीर साफ नजर आती है।