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कटान ने पकड़ी तेजी, छह आवास नदी में समाए
Updated Sun, 19 Aug 2018 05:28 PM IST
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छह घर शारदा में समाए
मंझरी जंगल और नकहा में नदी का कहर जारी
अमर उजाला ब्यूरो
महेवागंज/सुंदरवल। शारदा नदी का जलस्तर घटते ही भू कटान में अचानक तेजी आ गई है। नदी ने ग्रंट नंबर 12 जंगल किनारे स्थित छह पक्के घर अपने आगोश में समेट लिए। शारदा का रुख देख मंझरी गांव के लोगों को चिंता सताने लगी है। वहीं प्रशासन स्तर से कटान रोकने के अब तक कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
बैजनाथपुरवा का वजूद मिटने के बाद वहां के बाशिंदे गांव छोड़कर मंझरी जंगल के किनारे बस गए थे। उन्हें उम्मीद थी की यहां उनके आशियाने सुरक्षित रहेंगे। पिछले दिनों गूम गांव के किनारे परकोपाइन लगने के बाद नदी ने अपना रुख उत्तर-पूरब की ओर कर लिया। जिससे मंझरी, पारसपुरवा और गोदापुरवा गांव नदी के निशाने पर आ गए। नदी अभी बाहरी इलाके में कटान कर रही है। मंझरी जंगल किनारे बसे दो दर्जन घरों में से आधे घर नदी में समा चुके हैं।
बीते चौबीस घंटे में जगजीवन, रामाधार, अजय कुमार, पुष्पा, विजय और सरीखा देवी के घर नदी में समा गए हैं। बचे खुचे घर भी नदी की जद में हैं। इससे भयभीत ग्रामीण गृहस्थी का सामान समेट कर पलायन करने में ही भलाई समझ रहे हैं। कमोवेश यही हालात नकहा ब्लॉक के रेहरिया कलां गांव में है। प्रशासन वहां पीड़ितों को राशन और राहत सामग्री देकर कुछ हद तक मुसीबतें कम करने में जुटा है।
मंझरी जंगल और नकहा में नदी का कहर जारी
अमर उजाला ब्यूरो
महेवागंज/सुंदरवल। शारदा नदी का जलस्तर घटते ही भू कटान में अचानक तेजी आ गई है। नदी ने ग्रंट नंबर 12 जंगल किनारे स्थित छह पक्के घर अपने आगोश में समेट लिए। शारदा का रुख देख मंझरी गांव के लोगों को चिंता सताने लगी है। वहीं प्रशासन स्तर से कटान रोकने के अब तक कोई उपाय नहीं किए गए हैं।
बैजनाथपुरवा का वजूद मिटने के बाद वहां के बाशिंदे गांव छोड़कर मंझरी जंगल के किनारे बस गए थे। उन्हें उम्मीद थी की यहां उनके आशियाने सुरक्षित रहेंगे। पिछले दिनों गूम गांव के किनारे परकोपाइन लगने के बाद नदी ने अपना रुख उत्तर-पूरब की ओर कर लिया। जिससे मंझरी, पारसपुरवा और गोदापुरवा गांव नदी के निशाने पर आ गए। नदी अभी बाहरी इलाके में कटान कर रही है। मंझरी जंगल किनारे बसे दो दर्जन घरों में से आधे घर नदी में समा चुके हैं।
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बीते चौबीस घंटे में जगजीवन, रामाधार, अजय कुमार, पुष्पा, विजय और सरीखा देवी के घर नदी में समा गए हैं। बचे खुचे घर भी नदी की जद में हैं। इससे भयभीत ग्रामीण गृहस्थी का सामान समेट कर पलायन करने में ही भलाई समझ रहे हैं। कमोवेश यही हालात नकहा ब्लॉक के रेहरिया कलां गांव में है। प्रशासन वहां पीड़ितों को राशन और राहत सामग्री देकर कुछ हद तक मुसीबतें कम करने में जुटा है।
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