फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   दूसरे दिन जंगलों में परिंदों को निहारते रहे विशेषज्ञ

दूसरे दिन जंगलों में परिंदों को निहारते रहे विशेषज्ञ

Sat, 19 Jan 2019 11:46 PM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Sat, 19 Jan 2019 11:46 PM IST
विज्ञापन
दूसरे दिन  जंगलों में परिंदों को निहारते रहे विशेषज्ञ
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क में सर्दियों के मौसम में आने वाले प्रवासी पक्षियों की गणना का काम विंटर बर्ड काउंट कार्यक्रम के तहत शनिवार को भी जारी रहा। पक्षी विशेषज्ञों ने अलग-अलग दूरबीनों के माध्यम से यहां पाए जाने वाले पक्षियों को देखा और उनकी तस्वीरें लीं। पक्षियों की प्रजातियों को भी चिह्नित किया। शनिवार को पक्षी गणना के लिए 12 सदस्यीय चार टीमें जंगल के अलग-अलग हिस्सों में गई। मैदानों और जलाशयों में पाए जाने वाले प्रवासी परिंदों को देखकर उनकी विधिवत गणना भी की।
विज्ञापन

दुधवा नेशनल पार्क में करीब 450 प्रजातियों के पक्षी हैं। इनमें दुर्लभ प्रजाति के बंगाल फ्लोरिकन पक्षी भी शामिल हैं। दुधवा पार्क प्रशासन ने वर्ष 2013 में विंटर बर्ड काउंट कराया था। उसके छह साल बाद 2019 में चार दिवसीय विंटर बर्ड काउंट प्रोग्राम शुक्रवार से शुरू किया गया। विंटर बर्ड काउंट का उद्घाटन दुधवा टाइगर रिजर्व के एफडी रमेश पांडेय और डीडी महावीर कौजलगि ने संयुक्त रूप से किया था।
विज्ञापन

शनिवार को अनिल सवाहने, जीवांश सवाहने, पिकेश श्रीवास्तव, असानी भादुड़ी, फजलुर्रहमान, सुरेश चौधरी, रोहित शर्मा, जसविंदर सिंह, काजल दास गुप्ता के साथ ही दुधवा के एफडी रमेश पांडेय, डीडी महावीर कौजलगि और नेचर गाइड सोनू आदि की टीम ने उनकी गणना की। एफडी रमेश पांडेय ने बताया कि प्रवासी और स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की प्रजातियों की गणना की जा रही है ताकि यह अंदाजा लगाया जा सके कि पक्षियों की कितनी प्रजातियां यहां पाई जाती हैं। पक्षियों के प्राकृतिकवास के वैज्ञानिक प्रबंधन करने के लिए गणना कराई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दुधवा में मिलते हैं यह परिंदे
यहां पाई जाने वाले पक्षियों की प्रजातियों में बंगाल फ्लोरिकन, फिसिंग ईगल, लेसर फ्लोरिकन, ग्रेट इंडियन हर्नबिल, इंडियन पाइड हार्न बिल, लैगर फैल्कान, पीफाउल, स्पड विल्ड डक समेत पक्षियों की 450 प्रजातियां यहां मिलती है।

झादीताल प्रवासी पक्षियों का है बसेरा
दुधवा नेशनल पार्क के किशनपुर सेंक्चुरी का झादीताल प्रवासी पक्षियों का सबसे अच्छा बसेरा माना जाता है। यहां दूरदराज से आने वाले प्रवासी पक्षी शरण लेते हैं। इसके कारण ही प्रवासी पक्षियों को देखने की इच्छा रखने वाले सैलानी झादीताल का ही रुख करते हैं।


प्रवासी पक्षियों पर पड़ रहे हैं प्रतिकूल प्रभाव
पलियाकलां। वैसे तो दुधवा नेशनल पार्क में पाए जाने वाली पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां अलग-अलग मिलती हैं लेकिन प्रवासी पक्षियों का बसेरा अलग होता है। खेत-खलिहानों, चारागाहों और तालाबों में यह पक्षी बसेरा बनाते हैं। यहां सबसे अहम बात यह हो गई है कि बीते कई सालों में तालाबों को पाटकर भूमि में बदल दिया गया है। तो शेष बचे तालाबों का पानी अब प्रदूषित हो चुका है जिसके कारण यह प्रवासी पक्षियों के अनुकूल नहीं रह गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed