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58 साल बाद जन्माष्टमी पर अनूठा संयोग
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 24 Aug 2016 10:03 PM IST
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कृष्ण
- फोटो : अमर उजाला
ज्योतिषियों के अनुसार, ये अत्यंत सुखद और शुभ
इस बार के श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पर्व एक अनूठा संयोग लेकर आया है। ज्योतिषियों के मुताबिक इस पर्व पर माह, तिथिवार और चंद्रमा की स्थिति वैसी ही बनी है जैसी कृष्ण जन्म के समय थी। 58 साल बाद आए इस अनूठे संयोग को ज्योतिषी अत्यंत सुखद और शुभ बता रहे हैं।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि बुधवार रोहणी नक्षत्र और वृषभ के चंद्रमा की स्थिति में हुआ था। ऐसा योग आज से 58 साल पहले सऩ 1958 में बना था। 58 साल बाद ऐसा संयोग दोबारा आया है। गोला के सुप्रसिद्ध ज्योतषी रामदेव के अनुसार कृतिका नक्षत्र का कालक्रम नौ घंटे 32 मिनट का होता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म जन्माष्टमी की रात रोहणी नक्षत्र के आरंभ काल के संयोग से हुआ। केवल रोहणी नक्षत्र की स्थिति में मामूली अंतर आया। ज्योतिषी के मुताबिक इस बार जन्माष्टमी को सूर्योदय के साथ ही अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। अष्टमी तिथि 25 अगस्त की रात 08.13 बजे तक रहेगी। इससे पूरे समय अष्टमी तिथि का प्रभाव रहेगा। मध्यरात्रि भगवान के जन्मोत्सव के समय रोहणी नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। इससे कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी।
ज्योतिषी रामदेव के अनुसार 24 अगस्त बुधवार की रात 10.30 बजे से अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। इस गुरुवार उदयाकाल की तिथि में व्रत जन्मोत्सव मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा। पंडितों के अनुसार ऐसा संयोग बनने से इस बार की जन्माष्टमी खास बन गई है।
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इस बार के श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पर्व एक अनूठा संयोग लेकर आया है। ज्योतिषियों के मुताबिक इस पर्व पर माह, तिथिवार और चंद्रमा की स्थिति वैसी ही बनी है जैसी कृष्ण जन्म के समय थी। 58 साल बाद आए इस अनूठे संयोग को ज्योतिषी अत्यंत सुखद और शुभ बता रहे हैं।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद माह की अष्टमी तिथि बुधवार रोहणी नक्षत्र और वृषभ के चंद्रमा की स्थिति में हुआ था। ऐसा योग आज से 58 साल पहले सऩ 1958 में बना था। 58 साल बाद ऐसा संयोग दोबारा आया है। गोला के सुप्रसिद्ध ज्योतषी रामदेव के अनुसार कृतिका नक्षत्र का कालक्रम नौ घंटे 32 मिनट का होता है। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्म जन्माष्टमी की रात रोहणी नक्षत्र के आरंभ काल के संयोग से हुआ। केवल रोहणी नक्षत्र की स्थिति में मामूली अंतर आया। ज्योतिषी के मुताबिक इस बार जन्माष्टमी को सूर्योदय के साथ ही अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। अष्टमी तिथि 25 अगस्त की रात 08.13 बजे तक रहेगी। इससे पूरे समय अष्टमी तिथि का प्रभाव रहेगा। मध्यरात्रि भगवान के जन्मोत्सव के समय रोहणी नक्षत्र का भी संयोग रहेगा। इससे कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्म के समय बनने वाले संयोगों के साथ विशेष फलदायी रहेगी।
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ज्योतिषी रामदेव के अनुसार 24 अगस्त बुधवार की रात 10.30 बजे से अष्टमी तिथि का आगमन हो रहा है। इस गुरुवार उदयाकाल की तिथि में व्रत जन्मोत्सव मनाना शास्त्र सम्मत रहेगा। पंडितों के अनुसार ऐसा संयोग बनने से इस बार की जन्माष्टमी खास बन गई है।
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