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टीमें बनी नहीं तो कैसे निपटे गांव का झगड़ा गांव में
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टीमें बनी नहीं तो कैसे निपटें गांव के विवाद
लखीमपुर खीरी। कम्युनिटिंग पुलिसिंग से गांव का झगड़ा गांव में निपटाएं। इसको लेकर पुलिस महानिदेशक लखनऊ (डीजीपी) की शुरू की गई मुहिम तीन महीने बाद भी जिले में शुरू नहीं हो सकी है। बैठक तो दूर थानों की पुलिस गांवों में 10 सदस्यीय टीम भी गठित नहीं कर सकी है।
गांवों और शहरों में विभिन्न बातों को लेकर विवाद होते रहते हैं, जिसके निस्तारण में पुलिस सिर्फ अपनी भूमिका का निर्वाहन करती है। डीजीपी ओपी सिंह ने गांव का झगड़ा गांव में निपटाएं, कोर्ट कचहरी हम क्यों जाएं स्लोगन देते हुए तीन महीने पहले पहल शुरू की थी। इसके तहत प्रत्येक गांवों में 10 सदस्यीय समिति गठित होनी थी। इस समिति में ऐसे संभ्रांति लोग शामिल किए जाने थे जो पुलिस की मदद कर सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य शहरों और गांवों में होने वाले छोटे-मोटे विवादों का आपसी समझौते से निस्तारित कराकर आपसी सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाना था।
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न सदस्य बनाए न हीं बना व्हाट्सएप ग्रुप
डीजीपी की जारी एडवाइजरी के मुताबिक हल्का दरोगा को प्रत्येक महीने गांव-मोहल्ले में गठित 10 सदस्यीय कमेटी के साथ बैठक करना था। बीट इंचार्ज एक गांव के सदस्यों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर संपर्क स्थापित करना था। साथ ही समय समय पर सदस्यों को गांव में झगड़ा आदि होने पर तत्काल सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करना था।
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लखीमपुर खीरी। कम्युनिटिंग पुलिसिंग से गांव का झगड़ा गांव में निपटाएं। इसको लेकर पुलिस महानिदेशक लखनऊ (डीजीपी) की शुरू की गई मुहिम तीन महीने बाद भी जिले में शुरू नहीं हो सकी है। बैठक तो दूर थानों की पुलिस गांवों में 10 सदस्यीय टीम भी गठित नहीं कर सकी है।
गांवों और शहरों में विभिन्न बातों को लेकर विवाद होते रहते हैं, जिसके निस्तारण में पुलिस सिर्फ अपनी भूमिका का निर्वाहन करती है। डीजीपी ओपी सिंह ने गांव का झगड़ा गांव में निपटाएं, कोर्ट कचहरी हम क्यों जाएं स्लोगन देते हुए तीन महीने पहले पहल शुरू की थी। इसके तहत प्रत्येक गांवों में 10 सदस्यीय समिति गठित होनी थी। इस समिति में ऐसे संभ्रांति लोग शामिल किए जाने थे जो पुलिस की मदद कर सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य शहरों और गांवों में होने वाले छोटे-मोटे विवादों का आपसी समझौते से निस्तारित कराकर आपसी सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाना था।
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न सदस्य बनाए न हीं बना व्हाट्सएप ग्रुप
डीजीपी की जारी एडवाइजरी के मुताबिक हल्का दरोगा को प्रत्येक महीने गांव-मोहल्ले में गठित 10 सदस्यीय कमेटी के साथ बैठक करना था। बीट इंचार्ज एक गांव के सदस्यों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर संपर्क स्थापित करना था। साथ ही समय समय पर सदस्यों को गांव में झगड़ा आदि होने पर तत्काल सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करना था।
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