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इंजीनियर-नेता गठजोड़ खत्म न हुआ तो ठीक नहीं
Updated Fri, 24 Aug 2018 11:42 PM IST
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yogi aadityanath
- फोटो : अमर उजाला
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बाढ़ राहत और तैयारियों की समीक्षा के दौरान जिले के दो माननीयों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवर तन गए। उन्होंने दो टूक कहा, बाढ़ का हवाई सर्वेक्षण करके आ रहा हूं। हमने हालात देख लिए हैं। जिस तरह के काम होने की उम्मीद थी, वैसे नहीं हुए हैं। मैं सब जानता हूं। ठेका पट्टी चलती है। पहले उसे बंद कराओ। इंजीनियर-नेता गठजोड़ बंद न हुआ तो ठीक होगा। ओएनजीसी हास्पिटल परिसर में बनाए गए अस्थाई सभाकक्ष में समीक्षा बैठक शुरू की। डीएम के जानकारी देने के बाद विधायक रोमी साहनी ने पलिया के जंगल नंबर सात, जगरनाथ टांडा और छंगाटांडा में हो रहे कटान की विभाषिका बताई। विधायक ने कहा कि सिंचाई विभाग ने अब तक कोई काम शुुरू नहीं कराया है। इस पर सीएम ने सिंचाई विभाग के अफसरों को निर्देशित किया। धौरहरा विधायक बाला प्रसाद अवस्थी ने धौरहरा के शहाबदीनपुरवा और सरैंय्या कलां में हो रहे कटान को रोकने के लिए बजट आवंटन की मांग की। इस पर मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग के अफसरों से कटान रोकने के लिए तत्काल काम शुरू कराने को कहा। जिले के विधायकों ने अपने अपने इलाकों में बाढ़ की स्थिति और बचाव कार्य की स्वीकृति की भी मांग की। इस दौरान सीएम भड़क गए। उन्होंने दो माननीयों को निशाना बनाते हुए कहा, मैं सब जानता हूं। ठेका पट्टी चलती है। पहले सभी मिलकर उसे बंद कराओ। इंजीनियर-नेता गठजोड़ कहीं भी चला तो ठीक न होगा।
सीएम ने गोला विधायक से हकीकत जानी, दिए जांच के निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान विधायक गोला अरविंद गिरि ने कहा कि बाढ़ बचाव कार्यों के लिए उनकी डिमांड पर नवंबर 2017 में ही अनुपूरक बजट में मंजूरी मिल गई थी, लेकिन सिंचाई विभाग के तत्काल एई एके सिंह की लापरवाही के कारण बचाव कार्य मई में शुरू हो सके। विधायक ने कहा कि यह वजह रही कि कटान नहीं रोका जा सका और अनेक गांव डूब गए। उन्होंने गांव बझेड़ा, डंबलटांडा, रेवतीपुरवा और जौहरा गुरुद्वारे तक कार्य पर बल दिया। इस पर मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग की ढिलाई की जांच कराने के निर्देश दिए।
पलिया के तीनों गांवों को हर हाल में बचाया जाए
24 एलकेएच 28
पलिया विधायक रोमी साहनी ने कहा कि यदि बाढ़ बचाव कार्य तेजी से न हुआ तो जंगल नंबर सात, जगरनाथ टांडा और छंगाटांडा का अस्तित्व बचाना मुश्किल हो जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, तीनों गांवों को हर हाल में बचाया जाए।
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सौ मीटर दूर रोक दी गई पब्लिक, हाइवे पर ताकते रहे बाढ़ पीड़ित
24 एलकेएच 5
मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर पीलीभीत-बस्ती हाइवे किनारे बने ओएनजीसी हॉस्पिटल में उतरा। यहीं समीक्षा बैठक हुई। अस्पताल परिसर तक कोई बाहरी न पहुंच जाए। इसके लिए कई सुरक्षा घेरा बनाए गए थे। तीन सौ मीटर दूर ही बैरियर लगाकर लोगों को रोका जा रहा था। इतना ही नहीं ओएनजीसी हॉस्पिटल के बाहर सौ मीटर दूर ही हाइवे पर पब्लिक को रोक दिया गया। मुख्यमंत्री को देखने यदि कोई अस्पताल की ओर बढ़ता तो उसे तत्काल रोक दिया जाता। इसमें अनेक बाढ़ पीड़ित भी रोक दिए गए।
माइक खराब होने पर अउसरों के उड़े होश
समीक्षा बैठक को लेकर अधिकारियों ने पुख्ता इंतजाम किए थे, लेकिन मुख्यमंत्री के पहुंचते ही माइक ने काम करना बंद कर दिया। इससे अधिकारियों के होश उड़ गए। हालांकि अधिकारियों ने माइक के तार हिला ढुला कर देखे, लेकिन अंतत:वह चालू नहीं हो सका।
सीएम के मुखातिब न होने से निराश हुए बाढ़ पीड़ित
मुख्यमंत्री के आने की सूचना से बाढ़ पीड़ितों में खुशी छा गई। बाढ़ पीड़ितों ने सोंचा था कि सीएम उनका दुखड़ा सुनेगें। इसलिए बाढ़ पीड़ित कई किलोमीटर दूर पानी से निकलकर ओएनजीसी अस्पताल पहुंचे, लेकिन मुख्यमंत्री के मुखातिब न होने से बाढ़ पीड़ित मायूस हो गए। सभी का कहना था कि जब उनका दु:ख दर्द सुनना ही नहीं था तो बुलवाया क्यों।
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सीएम ने गोला विधायक से हकीकत जानी, दिए जांच के निर्देश
समीक्षा बैठक के दौरान विधायक गोला अरविंद गिरि ने कहा कि बाढ़ बचाव कार्यों के लिए उनकी डिमांड पर नवंबर 2017 में ही अनुपूरक बजट में मंजूरी मिल गई थी, लेकिन सिंचाई विभाग के तत्काल एई एके सिंह की लापरवाही के कारण बचाव कार्य मई में शुरू हो सके। विधायक ने कहा कि यह वजह रही कि कटान नहीं रोका जा सका और अनेक गांव डूब गए। उन्होंने गांव बझेड़ा, डंबलटांडा, रेवतीपुरवा और जौहरा गुरुद्वारे तक कार्य पर बल दिया। इस पर मुख्यमंत्री ने सिंचाई विभाग की ढिलाई की जांच कराने के निर्देश दिए।
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पलिया के तीनों गांवों को हर हाल में बचाया जाए
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पलिया विधायक रोमी साहनी ने कहा कि यदि बाढ़ बचाव कार्य तेजी से न हुआ तो जंगल नंबर सात, जगरनाथ टांडा और छंगाटांडा का अस्तित्व बचाना मुश्किल हो जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा, तीनों गांवों को हर हाल में बचाया जाए।
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सौ मीटर दूर रोक दी गई पब्लिक, हाइवे पर ताकते रहे बाढ़ पीड़ित
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मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर पीलीभीत-बस्ती हाइवे किनारे बने ओएनजीसी हॉस्पिटल में उतरा। यहीं समीक्षा बैठक हुई। अस्पताल परिसर तक कोई बाहरी न पहुंच जाए। इसके लिए कई सुरक्षा घेरा बनाए गए थे। तीन सौ मीटर दूर ही बैरियर लगाकर लोगों को रोका जा रहा था। इतना ही नहीं ओएनजीसी हॉस्पिटल के बाहर सौ मीटर दूर ही हाइवे पर पब्लिक को रोक दिया गया। मुख्यमंत्री को देखने यदि कोई अस्पताल की ओर बढ़ता तो उसे तत्काल रोक दिया जाता। इसमें अनेक बाढ़ पीड़ित भी रोक दिए गए।
माइक खराब होने पर अउसरों के उड़े होश
समीक्षा बैठक को लेकर अधिकारियों ने पुख्ता इंतजाम किए थे, लेकिन मुख्यमंत्री के पहुंचते ही माइक ने काम करना बंद कर दिया। इससे अधिकारियों के होश उड़ गए। हालांकि अधिकारियों ने माइक के तार हिला ढुला कर देखे, लेकिन अंतत:वह चालू नहीं हो सका।
सीएम के मुखातिब न होने से निराश हुए बाढ़ पीड़ित
मुख्यमंत्री के आने की सूचना से बाढ़ पीड़ितों में खुशी छा गई। बाढ़ पीड़ितों ने सोंचा था कि सीएम उनका दुखड़ा सुनेगें। इसलिए बाढ़ पीड़ित कई किलोमीटर दूर पानी से निकलकर ओएनजीसी अस्पताल पहुंचे, लेकिन मुख्यमंत्री के मुखातिब न होने से बाढ़ पीड़ित मायूस हो गए। सभी का कहना था कि जब उनका दु:ख दर्द सुनना ही नहीं था तो बुलवाया क्यों।