फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   213 crore crops were ruined due to floods

बाढ़ से 213 करोड़ की फसलें हो गईं बर्बाद

Sun, 31 Oct 2021 12:53 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 31 Oct 2021 12:53 AM IST
विज्ञापन
213 crore crops were ruined due to floods
बाढ़ के पानी में खराब हुई फसल दिखाता किसान। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
फसलों की बर्बादी से किसान तबाह, बिखर गए उनके सारे सपने
विज्ञापन

बाढ़ के पानी में डूब गईं 43200 हेक्टेयर में तैयार खड़ी फसलें
लखीमपुर खीरी। पिछले सप्ताह जिले में आई भीषण बाढ़ से जिले की पांच तहसीलों में 213 करोड़ 77 लाख रुपये मूल्य की फसलों के नुकसान का अनुमान है। अभी फसल क्षति का सर्वे नहीं हो सका है सर्वे के बाद ही नुकसान का सही आंकलन हो सकेगा। यह नुकसान अनुमानित नुकसान से कहीं ज्यादा हो सकता है। फसलें बर्बाद हो जाने से किसानों के तो सारे सपने ही बिखर गए, यही नहीं दिवाली भी अंधेरी हो गई है।
बाढ़ से हुए फसलों के नुकसान का अभी तक राजस्व विभाग ने जो अनुमान लगाया है उसके अनुसार पलिया तहसील में 90 करोड़ 75 लाख, निघासन में 74 करोड़ 70 लाख, धौरहरा में 22 करोड़ 50 लाख, लखीमपुर में 19 करोड़ 42 लाख और गोला तहसील में 64 करोड़ रुपये मूल्य की फसलों के नष्ट हो जाने का अनुमान है। हालांकि बाढ़ से फसल के नुकसान का अभी विधिवत सर्वे नहीं हुआ है। सर्वे के बाद इस आंकड़े में और अधिक बढ़ोत्तरी होने की आशंका है।
विज्ञापन

किसानों का कहना है कि सरकारी आंकड़ों के विपरीत कई गुना नुकसान हुआ है। हाल ही में जिले में तेज हवा के साथ हुई बारिश से धान और गन्ने की फसल खेतों में ही बिछ गई थी। जो धान कट चुका था वह खेतों में ही भीग कर खराब हो गया। किसान बेमौसम बारिश से हुई बर्बादी को समेट भी नहीँ पाया था कि बाढ़ ने रही सही कसर पूरी कर दी। इस भीषण बाढ़ से जिले भर में 43200 हैक्टेयर कृषि भूमि में बोई गई फसलें पानी में डूब कर पूरी तरह नष्ट हो गईं। इसके साथ ही किसानों के सारे सपने बिखर गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

भीषण बाढ़ से पलिया में 9075 हेक्टेयर, गोला में 3200 हेक्टेयर, निघासन में 17700 हेक्टेयर, धौरहरा में 11250, और लखीमपुर में 1965.432 हैक्टेयर क्षेत्रफल में बोई गई फसलें तबाह हो गईं। सबसे ज्यादा धान और गन्ने की फसल का नुकसान हुआ है। तराई के अधिकांश किसान पूरी तरह खेती किसानी पर ही निर्भर है। फसलों की तबाही से उनके बच्चों की पढ़ाई, शादी विवाह आदि मांगलिक कार्यों पर तो ग्रहण लगा ही है, दिवाली का त्योहार भी फीका हो गया है। किसानों की जेब खाली है ऐसे में कैसे होगी दिवाली यह एक बड़ा सवाल है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed