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22 साल से वनवास पर हैं मां आशापूर्णा

Wed, 20 Sep 2017 11:28 PM IST
प्रेम जायसवाल, धौरहरा खीरी।
प्रेम जायसवाल, धौरहरा खीरी। Updated Wed, 20 Sep 2017 11:28 PM IST
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22 साल से वनवास पर हैं मां आशापूर्णा
22 साल से वनवास पर हैं मां आशापूर्णा - फोटो : लखीमपुर खीरी, अमर उजाला
धौरहरा खीरी।
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त्रेतायुग में 14 बरस बाद तो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम वनवास काटकर अयोध्या लौट आए थे, मगर कलयुग की लीला ही न्यारी है, तभी तो मां आशापूर्णा देवी 22 साल बाद भी अपने घर यानी मंदिर दुबारा न लौट सकीं। 22 साल पहले चोरी हुई मूर्ति आज भी कानूनी दांवपेंच के चलते कोतवाली के मालखाने में कैद है। करोड़ों भक्तों की आस्था की देवी माल मुकदमाती बनकर रह गई हैं, जिसके चलते माता के भक्तों को इस बार भी उनके दर्शन नहीं हो सकेंगे।
जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर तहसील धौरहरा का कफारा गांव ईसानगर स्टेट के जागड़ा वंश की रियासत में आता था। जागड़ा वंश के राजा जोत सिंह ने करीब दो सौ वर्ष पहले कफारा गांव में लाल पत्थर से रानी महल मंदिर बनवाया था। इस मंदिर में महिषासुर मर्दनी काली स्वरूप मां आशापूर्णा की मूर्ति की स्थापना कराई। यह मूर्ति अष्टधातु से बनी थी। बुजुर्गों की मानें तो यह मूर्ति काली कामिक्षा कलकत्ता की मूर्ति के सांचे में ढली थी। राजा जोत सिंह के मान्य रिश्तेदार राजा सुरेन्द्रवीर विक्रम सिंह, महारानी अंबरि कुंवरि के साथ मंदिर में ही निवास करते थे। 1857 में राजा को सुरेन्द्रवीर विक्रम सिंह को अंग्रेज अंग्रेजी हुकूमत से बगावत और राजा जोत सिंह का साथ देने के आरोप में पकड़कर काला पानी ले गए। महारानी अंबरि कुंवरि अकेली रह र्गइं। कुछ अंतराल के बाद राजा की मौत की सूचना आई। सदमा न बर्दाश्त कर सकी रानी की मौत हो गई, लेकिन इस रानी महल में स्थापित मां आशापूर्णा के प्रति करोड़ों भक्तों की अपार श्रद्धा बनी रही। इस मंदिर महल को रानी साहेब मंदिर से लोग जानने लगे। भक्त नवरात्र में जागरण के अलावा रंगारंग कार्यक्रम भी करते रहे। मगर खीरी जनपद का दुर्भाग्य तो देखें, यह बरसों पुरानी ऐतिहासिक धरोहर इनसे नहीं संभल सकी और कुछ लोगों ने अक्तूबर 1995 में मूर्ति को चुरा लिया। मंदिर में प्राचीन मूर्ति चोरी से हड़कंप मच गया। ग्रामीणों और पुलिस की चौकसी के चलते मूर्ति बरामद भी कर ली गई। चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ। आरोपी जेल गए। जमानत पर छूटे पर आस्था पर कानून भारी पड़ गया और आस्था की देवी मां आशापूर्णा की मूर्ति मालखाने में ही जमा हो गई। तारीख पर तरीख अदालतें देती रहीं पर जाने कब वह तारीख आएगी जब मां अपना वनवास पूरा कर अपने घर यानी मंदिर लौटेंगी। उनके इंतजार में लाल पत्थर से बना यह ऐतिहासिक रानी महल अब खंडहर सा हो चुका है।
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प्रभारी कोतवाल बृजेश त्रिपाठी बताते हैं कि किसी ने अभी तक मूर्ति रिलीज कराने के लिए अदालत में दावा ही नहीं किया। यदि पक्षकार अदालत में दावा करें तो मूर्ति रिलीज हो सकती है।
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