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जंगल में धरती के फूल बीनने के दौरान ही हुआ था बाघ का हमला
Updated Sat, 29 Sep 2018 11:08 PM IST
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जंगल में धरती के फूल बीनने के दौरान हुआ था बाघ का हमला
पूछताछ में घायल रामपाल ने स्वीकार किया
अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के भीरा रेंज में हीराकुंआ और अंबारा के बीच रामपाल पर जंगल में धरती के फूल बीनने के दौरान ही बाघ ने हमला किया था। यह बात बाघ हमले में घायल रामपाल ने स्वीकार की है। उसके साथी कमलेश ने भी पूछताछ में इस बात की पुष्टि की।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन उप-निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि घटना के कुछ घंटे पहले बुधवार की रात तीन बजे तक भीरा वन विभाग की गश्ती टीम उसी इलाके में मौजूद थी। उस समय तक टीम को वहां बाघ का कोई मूवमेंट नहीं दिखाई पड़ा। बृहस्पतिवार सवेरे चार बजे के बाद कुकरा निवासी रामपाल अपने साथियों के साथ पड़रिया बीट के हीराकुंआ कंपार्टमेंट पांच में धरती के फूल बीनने गया जहां बाघ ने उस पर हमला कर दिया। मौके पर धरती के फूल भी बिखरे मिले। पूछताछ में रामपाल ने अपने फुफेरे भाई कमलेश के साथ धरती के फूल बीनने के लिए जंगल में जाने की बात स्वीकार की है। बाघ हमले की घटना के बाद वन कर्मियों की टीम लगातार बाघ की गतिविधियों नजर रखे हुए है। इस दौरान यह बाघ जंगल से बाहर नहीं निकला।
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उधर दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डाइरेक्टर रमेश कुमार पांडेय का कहना है कि धरती के फूल या कटरुआ बीनने के लिए जंगल में जाना वन अपराध की श्रेणी में है। ऐसे में बाघ हमले का खतरा हो सकता है। उन्होंने जंगल के आसपास रहने वाले लोगों को सलाह दी है कि कि वे जंगल के अंदर घुसपैठ न करें। ऐसी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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