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जलौनी लकड़ी बीनने गई बुजुर्ग महिला पर बाघ ने किया हमला, जख्मी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 03 Apr 2018 07:17 PM IST
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जंगल में जलौनी लकड़ी बीनने गई एक बुजुर्ग महिला पर झाड़ी में छिपे बाघ ने हमला कर दिया। इससे महिला गंभीर रूप से जख्मी हो गई। काफी शोर मचाने के बाद बाघ महिला को छोड़कर जंगल में वापस चला गया। उधर, घटना के बाद पहुंचे वन अधिकारियों ने लोगों की मदद से महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया। हालत गंभीर होने पर महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
मझगईं पुलिस चौकी क्षेत्र की त्रिलोकपुर निवासी 60 वर्षीय महिला राशिदा खातून पत्नी तौफीक अंसारी मोहल्ले की ही चार-पांच महिलाओं के साथ गुलरा टांडा गांव के पास दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में जलौनी लकड़ी बीनने गई थी। बताया जाता है कि दोपहर 12 बजे के आसपास सभी महिलाएं लकड़ी बीनने में व्यस्त थीं तभी झाड़ी में छिपे बैठे बाघ ने राशिदा पर हमला बोल दिया। बाघ के अचानक हमले से घबराई महिलाओं ने हिम्मत जुटाकर शोर मचाया, जिसके बाद बाघ महिला को छोड़कर जंगल के अंदर चला गया। सूचना पर पहुंचे गुलरा चौकी के दरोगा ने इसकी सूचना जख्मी महिला के परिजनों को दी। महिला के परिजनों ने लोगों की मदद से उसे पलिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। उधर महिला पर बाघ के हमले से ग्रामीणों में हड़कंप मचा हुआ है और ग्रामीणों में बाघ की दहशत फैल गई है।
अस्पताल में अधिकारियों का लगा रहा तांता
हादसे की खबर सुनकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पलिया में अधिकारियों का तांता लगा रहा। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहायक परियोजना अधिकारी राधेश्याम भार्गव भी अपनी टीम के साथ पहुंच गए। उन्होंने जल्द ही रिपोर्ट भेजकर मुआवजा दिलाए जाने का आश्वासन महिला के परिजनों को दिया है। इसके साथ पलिया थाने के इंस्पेक्टर दीपक शुक्ला ने भी अस्पताल पहुंचकर महिला का हालचाल जाना।
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जंगल में न जाने की दी हिदायत
वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को जंगल के अंदर न जाने की हिदायत दी है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से अपील की है कि जंगल के अंदर किसी भी हालत में जलौनी लकड़ी लेने या अन्य कार्य से न जाएं।
लकड़ी बीनने वालों में मचा है हड़कंप
पार्क क्षेत्र से लकड़ी बीनने वाले ग्रामीणों में भी हड़कंप मचा हुआ है। घटना के बाद कुछ महिलाएं तो इतनी डर गई हैं कि वह काफी देर तक मामले की बाबत बोल तक नहीं सकी। किसी तरह से उन्होंने पूरे मामले को बयां किया।
लगातार दूसरे दिन हुई बाघ के हमले की घटना
बाघ के हमले की घटना से इलाका थर्रा उठा है। लगातार दूसरे दिन बाघ के हमले की घटना हुई है। इसमें सोमवार को जहां परसपुर निवासी राजेश कुमार पुत्र बेचूलाल पर बाघ ने उस समय हमला कर दिया था जब वह गन्ने के खेत में गन्ना छीलने गया था। आननफानन में उसे अस्पताल लाया गया था। वहीं अब मंगलवार को फिर बाघ के हमले से बुजुर्ग महिला जख्मी हो गई।
भीरा इलाके में भी बाघ की दहशत बरकरार
पलिया। भीरा इलाके में भी इनदिनों बाघ की दहशत बरकरार है। बाघ इमलिया फार्म के साथ ही भीरा थाना क्षेत्र के कई गांवों में देखा जा रहा है। कुछ ग्रामीणों के मुताबिक एक बाघिन दो शावकों के साथ खेतों में भ्रमण कर रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को कुछ ग्रामीणों ने यहां के प्रधान जसवीर सिंह के खेत में भी बाघ को देखा। अब यह बाघ है या बाघिन यह ग्रामीण सही तरीके से नहीं बता पा रहे हैं। फिलहाल भीरा थाना क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में बाघ की दहशत बरकरार है तथा ग्रामीण अपने खेतों में जाने से कतरा रहे हैं।
कई घटनाओं के बाद भी वन विभाग नहीं हो रहा सचेत
बाघ के हमले की कोई नई घटना नहीं है। लगातार बाघ ग्रामीणों पर हमला कर रहा है। इसमें कुछ घटनाएं जहां जंगल के अंदर की है वहीं कुछ घटनाएं आबादी की तरफ की हैं, लेकिन इसके बाद भी वन विभाग की तरफ से कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। घटना के बाद ही वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंच रहे हैं लेकिन उसके बाद मामला फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। न ही बाघ की लोकेशन और न ही कांबिंग कराई जाती है। जिससे बाघ के हमले बढ़ते जा रहे हैं।
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मझगईं पुलिस चौकी क्षेत्र की त्रिलोकपुर निवासी 60 वर्षीय महिला राशिदा खातून पत्नी तौफीक अंसारी मोहल्ले की ही चार-पांच महिलाओं के साथ गुलरा टांडा गांव के पास दुधवा नेशनल पार्क के जंगल में जलौनी लकड़ी बीनने गई थी। बताया जाता है कि दोपहर 12 बजे के आसपास सभी महिलाएं लकड़ी बीनने में व्यस्त थीं तभी झाड़ी में छिपे बैठे बाघ ने राशिदा पर हमला बोल दिया। बाघ के अचानक हमले से घबराई महिलाओं ने हिम्मत जुटाकर शोर मचाया, जिसके बाद बाघ महिला को छोड़कर जंगल के अंदर चला गया। सूचना पर पहुंचे गुलरा चौकी के दरोगा ने इसकी सूचना जख्मी महिला के परिजनों को दी। महिला के परिजनों ने लोगों की मदद से उसे पलिया के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद महिला को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया है। उधर महिला पर बाघ के हमले से ग्रामीणों में हड़कंप मचा हुआ है और ग्रामीणों में बाघ की दहशत फैल गई है।
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अस्पताल में अधिकारियों का लगा रहा तांता
हादसे की खबर सुनकर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पलिया में अधिकारियों का तांता लगा रहा। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहायक परियोजना अधिकारी राधेश्याम भार्गव भी अपनी टीम के साथ पहुंच गए। उन्होंने जल्द ही रिपोर्ट भेजकर मुआवजा दिलाए जाने का आश्वासन महिला के परिजनों को दिया है। इसके साथ पलिया थाने के इंस्पेक्टर दीपक शुक्ला ने भी अस्पताल पहुंचकर महिला का हालचाल जाना।
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जंगल में न जाने की दी हिदायत
वन विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को जंगल के अंदर न जाने की हिदायत दी है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से अपील की है कि जंगल के अंदर किसी भी हालत में जलौनी लकड़ी लेने या अन्य कार्य से न जाएं।
लकड़ी बीनने वालों में मचा है हड़कंप
पार्क क्षेत्र से लकड़ी बीनने वाले ग्रामीणों में भी हड़कंप मचा हुआ है। घटना के बाद कुछ महिलाएं तो इतनी डर गई हैं कि वह काफी देर तक मामले की बाबत बोल तक नहीं सकी। किसी तरह से उन्होंने पूरे मामले को बयां किया।
लगातार दूसरे दिन हुई बाघ के हमले की घटना
बाघ के हमले की घटना से इलाका थर्रा उठा है। लगातार दूसरे दिन बाघ के हमले की घटना हुई है। इसमें सोमवार को जहां परसपुर निवासी राजेश कुमार पुत्र बेचूलाल पर बाघ ने उस समय हमला कर दिया था जब वह गन्ने के खेत में गन्ना छीलने गया था। आननफानन में उसे अस्पताल लाया गया था। वहीं अब मंगलवार को फिर बाघ के हमले से बुजुर्ग महिला जख्मी हो गई।
भीरा इलाके में भी बाघ की दहशत बरकरार
पलिया। भीरा इलाके में भी इनदिनों बाघ की दहशत बरकरार है। बाघ इमलिया फार्म के साथ ही भीरा थाना क्षेत्र के कई गांवों में देखा जा रहा है। कुछ ग्रामीणों के मुताबिक एक बाघिन दो शावकों के साथ खेतों में भ्रमण कर रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को कुछ ग्रामीणों ने यहां के प्रधान जसवीर सिंह के खेत में भी बाघ को देखा। अब यह बाघ है या बाघिन यह ग्रामीण सही तरीके से नहीं बता पा रहे हैं। फिलहाल भीरा थाना क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में बाघ की दहशत बरकरार है तथा ग्रामीण अपने खेतों में जाने से कतरा रहे हैं।
कई घटनाओं के बाद भी वन विभाग नहीं हो रहा सचेत
बाघ के हमले की कोई नई घटना नहीं है। लगातार बाघ ग्रामीणों पर हमला कर रहा है। इसमें कुछ घटनाएं जहां जंगल के अंदर की है वहीं कुछ घटनाएं आबादी की तरफ की हैं, लेकिन इसके बाद भी वन विभाग की तरफ से कोई इंतजाम नहीं किए जा रहे हैं। घटना के बाद ही वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंच रहे हैं लेकिन उसके बाद मामला फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। न ही बाघ की लोकेशन और न ही कांबिंग कराई जाती है। जिससे बाघ के हमले बढ़ते जा रहे हैं।