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बुखार से तप रहे गांव, सीएचसी पर पैरासीटामाल तक नहीं
Updated Thu, 20 Sep 2018 07:52 PM IST
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फोटो- 20एलकेएच502,503
बुखार से तप रहे गांव, सीएचसी पर पैरासिटामाल भी नहीं
बुखार से प्रभावित गांवों में नहीं पहुंच रही डॉक्टरों की टीम
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। अधिकांश गांव बुखार से तप रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। हालात कितने गंभीर हैं इसी से अनुमान लगाए जा सकते हैं कि सीएचसी पर पैरासिटामॉल की भी पर्याप्त गोलियां नहीं हैं। सीएचसी गोला गोकर्णनाथ, बांकेगंज, बिजुआ, फूलबेहड़, पलिया, निघासन, तिकुनियां और रमियाबेहड़ में बुखार की मुख्य दवा और अन्य जरूरी एंटीबायोटिक भी नहीं मिल पा रही है। सीएचसी के जिम्मेदार अधिकारी बताते हैं कि कई बार डिमांड के बाद दवाएं मिल रही हैं। इससे भय बना रहता है कि पैरासिटामॉल जैसी दवा खत्म हो गई तो मरीजों को क्या देंगे।
बांकेगंज। ब्लॉक क्षेत्र के दर्जनों गांव के लोग बुखार से तप रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां तक नहीं पहुंच रही है। आलम यह है कि सीएचसी जाने पर भी न वहां डॉक्टर मिलते हैं और न दवा। यही वजह है कि मौसम में बदलाव के बाद भी बुखार थमने का नाम नहीं ले रहा है।
मौसम के उतार-चढ़ाव और गांवों में फैली भीषण गंदगी के चलते ब्लॉक क्षेत्र के कुकरा, अमीन नगर, खैरताली, दौलतपुर, कोठीपुर, पसियापुर ,बांकेपुर, पहाड़ नगर, जटपुरा, महोलिया, हरदुआ आदि गांवों में सैकड़ों लोग बुखार से पीड़ित है। स्वास्थ्य विभाग को सूचित किए जाने के बावजूद इन गांवों में अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है। खैरताली गांव निवासी किसान मनोज कुमार का कहना है कि बांकेगंज सीएचसी दो बजे के बाद वीरान हो जाती है। आरोप है कि उनकी मां को तेज बुखार आने पर वे उन्हें लेकर सीएचसी पहुंचे, जहां न डॉक्टर मिले न दवा। विवश होकर उन्हें झोलाछाप की शरण में जाना पड़ा।
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सीएचसी में अधीक्षक समेत पांच डॉक्टर, फिरभी नहीं हो रहा इलाज
बांकेगंज सीएचसी में अधीक्षक समेत पांच डॉक्टर तैनात हैं लेकिन अस्पताल में यह नजर नहीं आते। अधीक्षक तो अक्सर गायब रहते हैं। इससे अन्य स्टाफ भी मरीजों की परवाह नहीं करता। अस्पताल में दवाइयों का अभाव है। इसके चलते लोगों को झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
तीन सौ मरीज जूझ रहे बीमारियों से
इस समय क्षेत्र में संक्रामक बीमारियां फैली हैं। करीब 300 मरीज हर रोज सीएचसी पहुंच रहे हैं। आरोप है कि बीमार होने पर सुबह आठ बजे अस्पताल पहुंचने वाले ग्रामीणों को दोपहर 12 बजे तक कोई डॉक्टर नहीं मिलता है। बाद में जैसे तैसे कुछ दवाएं देकर सभी को टरका दिया जाता है।
वर्जन.....
अस्पताल में डॉक्टर नहीं रुकते हैं। इसको लेकर वह चिंतित हैं और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है। सीएचसी में ओरल एंटीबॉयोटिक दवाएं नहीं हैं। बुखार की पैरासिटामाल दवा भी कम है। ओपीडी में रोज 250 से तीन सौ मरीज आ रहे हैं। डॉक्टरों की टीम मौके पर भेजी जा रही है।
- डॉ. केके आदिम, अधीक्षक-सीएचसी, बांकेगंज
पैरासिटामॉल और एंटीबायोटिक दवाओं की कोई कमी नहीं है। स्टोर से निकलने और ट्रांसपोर्टिंग की समस्या हो सकती है। अब इस संबंध में जानकारी हुई है तो समस्या को कल से दूर किया जाएगा।
- डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ
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बुखार से तप रहे गांव, सीएचसी पर पैरासिटामाल भी नहीं
बुखार से प्रभावित गांवों में नहीं पहुंच रही डॉक्टरों की टीम
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। अधिकांश गांव बुखार से तप रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली में कोई बदलाव नहीं हो रहा है। हालात कितने गंभीर हैं इसी से अनुमान लगाए जा सकते हैं कि सीएचसी पर पैरासिटामॉल की भी पर्याप्त गोलियां नहीं हैं। सीएचसी गोला गोकर्णनाथ, बांकेगंज, बिजुआ, फूलबेहड़, पलिया, निघासन, तिकुनियां और रमियाबेहड़ में बुखार की मुख्य दवा और अन्य जरूरी एंटीबायोटिक भी नहीं मिल पा रही है। सीएचसी के जिम्मेदार अधिकारी बताते हैं कि कई बार डिमांड के बाद दवाएं मिल रही हैं। इससे भय बना रहता है कि पैरासिटामॉल जैसी दवा खत्म हो गई तो मरीजों को क्या देंगे।
बांकेगंज। ब्लॉक क्षेत्र के दर्जनों गांव के लोग बुखार से तप रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां तक नहीं पहुंच रही है। आलम यह है कि सीएचसी जाने पर भी न वहां डॉक्टर मिलते हैं और न दवा। यही वजह है कि मौसम में बदलाव के बाद भी बुखार थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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मौसम के उतार-चढ़ाव और गांवों में फैली भीषण गंदगी के चलते ब्लॉक क्षेत्र के कुकरा, अमीन नगर, खैरताली, दौलतपुर, कोठीपुर, पसियापुर ,बांकेपुर, पहाड़ नगर, जटपुरा, महोलिया, हरदुआ आदि गांवों में सैकड़ों लोग बुखार से पीड़ित है। स्वास्थ्य विभाग को सूचित किए जाने के बावजूद इन गांवों में अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची है। खैरताली गांव निवासी किसान मनोज कुमार का कहना है कि बांकेगंज सीएचसी दो बजे के बाद वीरान हो जाती है। आरोप है कि उनकी मां को तेज बुखार आने पर वे उन्हें लेकर सीएचसी पहुंचे, जहां न डॉक्टर मिले न दवा। विवश होकर उन्हें झोलाछाप की शरण में जाना पड़ा।
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सीएचसी में अधीक्षक समेत पांच डॉक्टर, फिरभी नहीं हो रहा इलाज
बांकेगंज सीएचसी में अधीक्षक समेत पांच डॉक्टर तैनात हैं लेकिन अस्पताल में यह नजर नहीं आते। अधीक्षक तो अक्सर गायब रहते हैं। इससे अन्य स्टाफ भी मरीजों की परवाह नहीं करता। अस्पताल में दवाइयों का अभाव है। इसके चलते लोगों को झोलाछाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
तीन सौ मरीज जूझ रहे बीमारियों से
इस समय क्षेत्र में संक्रामक बीमारियां फैली हैं। करीब 300 मरीज हर रोज सीएचसी पहुंच रहे हैं। आरोप है कि बीमार होने पर सुबह आठ बजे अस्पताल पहुंचने वाले ग्रामीणों को दोपहर 12 बजे तक कोई डॉक्टर नहीं मिलता है। बाद में जैसे तैसे कुछ दवाएं देकर सभी को टरका दिया जाता है।
वर्जन.....
अस्पताल में डॉक्टर नहीं रुकते हैं। इसको लेकर वह चिंतित हैं और रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी है। सीएचसी में ओरल एंटीबॉयोटिक दवाएं नहीं हैं। बुखार की पैरासिटामाल दवा भी कम है। ओपीडी में रोज 250 से तीन सौ मरीज आ रहे हैं। डॉक्टरों की टीम मौके पर भेजी जा रही है।
- डॉ. केके आदिम, अधीक्षक-सीएचसी, बांकेगंज
पैरासिटामॉल और एंटीबायोटिक दवाओं की कोई कमी नहीं है। स्टोर से निकलने और ट्रांसपोर्टिंग की समस्या हो सकती है। अब इस संबंध में जानकारी हुई है तो समस्या को कल से दूर किया जाएगा।
- डॉ. मनोज अग्रवाल, सीएमओ