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दुधवा टाइगर फाउंडेशन से विकसित होगा ईकोटूरिज्म
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 12 Apr 2018 08:52 PM IST
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dudhwa
- फोटो : amar ujala
दुधवा टाइगर फाउंडेशन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद जिले में इकोटूरिज्म विकास और बाघ संरक्षण के प्रयासों को नए आयाम मिलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। बाघ संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए अब दुधवा खुद आत्मनिर्भर बन सकेगा। छोटे छोटे काम के लिए सरकार से वित्तीय स्वीकृति आदि लेने के झंझटों से मुक्ति मिलेगी। बाघों के लिए अनुकूल प्राकृतिक आवास, खाद्य श्रंखला और जंगल के इकोसिस्टम के सुधारों को भी अब गति मिल सकेगी।
अब दुधवा नेशनल पार्क में पर्यटन से होने वाली आय सरकार के खाते में न जमा न होकर फाउंडेशन के फंड में आएगी। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और एनजीओ आदि से मिलने वाला अनुदान भी दुधवा टाइगर फाउंडेशन सीधे प्राप्त कर सकेगा। कई बार छोटे-छोटे कामों के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन को वित्तीय स्वीकृति लेने में महीनों लग जाते थे। अब ऐसी समस्याओं से निजात मिलेगी। अब बाघों के संरक्षण कार्यक्रम को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
ग्रासलैंड और वेटलैंड का हो सकेगा विकास
बाघों की आबादी बढ़ाने के लिए वन्यजीवों की खाद्य शृंखला को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसके लिए जंगल के अंदर ग्रासलैंड और वेटलैंड का विकास दुधवा टाइगर फाउंडेशन के जरिए किया जाएगा। घास के मैदानों और जलाशयों के विकास से हिरन आदि शाकाहारी जीवों को पर्याप्त भोजन मिल सकेगा। शाकाहारी जीवों की संख्या बढने से बाघों के लिए भी भोजन की कमी नहीं होगी। इससे बाघों की आबादी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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कम होगा इंसानों और बाघों के बीच संघर्ष
जब बाघों को जंगल के अंदर ही प्रचुर भोजन, पीने का पानी और अनुकूल प्राकृतिक आवास उपलब्ध होगा, तो बाघों को जंगल से बाहर निकलने की घटनाओं में कमी आएगी। इससे इंसानों पर बाघों के हमले का खतरा कम होगा। बाघ और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही बाघों के जंगल से बाहर निकलने पर बाघों के शिकार के खतरों से भी निजात मिलेगी।
थारू आदिवासियों की स्थिति में होगा सुधार
दुधवा टाइगर फाउंडेशन के जरिए जंगल और जंगल से सटे इलाके में बसे थारू जनजाति के लोगों की जंगल पर निर्भरता कम करने के लिए उनका आर्थिक विकास किया जाएगा। इकोटूरिज्म बढ़ने से थारू जनजाति के लोग सैलानियों को भ्रमण कराने के लिए अपनी गाड़ियां लगाकर और गाइड बनकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे। साथ ही उनकी हस्तशिल्प को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
इकोटूरिज्म विकास की बढ़ेंगी संभावनाएं
दुधवा टाइगर फाउंडेशन के जरिए जिले में इकोटूरिज्म का विकास होगा। इससे होटल, रेस्टोरेंट समेत कई व्यवसाय बढ़ने से स्थानीय लोगों की आय में इजाफा होगा। साथ ही पर्यटकों को मिलने वाली सुविधाओं का भी विस्तार हो सकेगा। इसके लिए सरकार का मुंह नहीं ताकना होगा।
यह होगा फाउंडेशन का स्वरूप
फाउंडेशन के कामकाज और वित्तीय संसाधनों पर प्रदेश के वनमंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित होगी जो फाउंडेशन के काम पर नजर रखेगी। फाउंडेशन के कार्यो को स्थानीय स्तर पर संचालित करने के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित होगी। शासनादेश जारी होते ही समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
दुधवा टाइगर फाउंडेशन इकोटूरिज्म के विकास और बाघों के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे जंगल और आसपास रहने वाले लोगों को भी लाभ होगा। शासनादेश जारी होते ही फाउंडेशन गठन करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
- सुनील चौधरी, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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अब दुधवा नेशनल पार्क में पर्यटन से होने वाली आय सरकार के खाते में न जमा न होकर फाउंडेशन के फंड में आएगी। इसके अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और एनजीओ आदि से मिलने वाला अनुदान भी दुधवा टाइगर फाउंडेशन सीधे प्राप्त कर सकेगा। कई बार छोटे-छोटे कामों के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व प्रशासन को वित्तीय स्वीकृति लेने में महीनों लग जाते थे। अब ऐसी समस्याओं से निजात मिलेगी। अब बाघों के संरक्षण कार्यक्रम को भी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।
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ग्रासलैंड और वेटलैंड का हो सकेगा विकास
बाघों की आबादी बढ़ाने के लिए वन्यजीवों की खाद्य शृंखला को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसके लिए जंगल के अंदर ग्रासलैंड और वेटलैंड का विकास दुधवा टाइगर फाउंडेशन के जरिए किया जाएगा। घास के मैदानों और जलाशयों के विकास से हिरन आदि शाकाहारी जीवों को पर्याप्त भोजन मिल सकेगा। शाकाहारी जीवों की संख्या बढने से बाघों के लिए भी भोजन की कमी नहीं होगी। इससे बाघों की आबादी बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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कम होगा इंसानों और बाघों के बीच संघर्ष
जब बाघों को जंगल के अंदर ही प्रचुर भोजन, पीने का पानी और अनुकूल प्राकृतिक आवास उपलब्ध होगा, तो बाघों को जंगल से बाहर निकलने की घटनाओं में कमी आएगी। इससे इंसानों पर बाघों के हमले का खतरा कम होगा। बाघ और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी। साथ ही बाघों के जंगल से बाहर निकलने पर बाघों के शिकार के खतरों से भी निजात मिलेगी।
थारू आदिवासियों की स्थिति में होगा सुधार
दुधवा टाइगर फाउंडेशन के जरिए जंगल और जंगल से सटे इलाके में बसे थारू जनजाति के लोगों की जंगल पर निर्भरता कम करने के लिए उनका आर्थिक विकास किया जाएगा। इकोटूरिज्म बढ़ने से थारू जनजाति के लोग सैलानियों को भ्रमण कराने के लिए अपनी गाड़ियां लगाकर और गाइड बनकर अपनी आय बढ़ा सकेंगे। साथ ही उनकी हस्तशिल्प को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
इकोटूरिज्म विकास की बढ़ेंगी संभावनाएं
दुधवा टाइगर फाउंडेशन के जरिए जिले में इकोटूरिज्म का विकास होगा। इससे होटल, रेस्टोरेंट समेत कई व्यवसाय बढ़ने से स्थानीय लोगों की आय में इजाफा होगा। साथ ही पर्यटकों को मिलने वाली सुविधाओं का भी विस्तार हो सकेगा। इसके लिए सरकार का मुंह नहीं ताकना होगा।
यह होगा फाउंडेशन का स्वरूप
फाउंडेशन के कामकाज और वित्तीय संसाधनों पर प्रदेश के वनमंत्री की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित होगी जो फाउंडेशन के काम पर नजर रखेगी। फाउंडेशन के कार्यो को स्थानीय स्तर पर संचालित करने के लिए दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी गठित होगी। शासनादेश जारी होते ही समितियों के गठन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
दुधवा टाइगर फाउंडेशन इकोटूरिज्म के विकास और बाघों के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे जंगल और आसपास रहने वाले लोगों को भी लाभ होगा। शासनादेश जारी होते ही फाउंडेशन गठन करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
- सुनील चौधरी, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व