फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   बाघ के साथ जंगल से सटे गांव में बढ़ा मगरमच्छ का खतरा

बाघ के साथ जंगल से सटे गांव में बढ़ा मगरमच्छ का खतरा

Sat, 31 Mar 2018 11:07 PM IST
Updated Sat, 31 Mar 2018 11:07 PM IST
विज्ञापन
बाघ के साथ जंगल से सटे गांव में बढ़ा मगरमच्छ का खतरा
बांकेगंज।
विज्ञापन

बाघों की दहशत से जूझ रहे जंगल से सटे गांवों में गर्मी बढ़ने के साथ ही मगरमच्छों का खतरा भी बढ़ गया है। नहरों, तालाबों, कुलाबों और नालों में पानी कम हो जाने से मगरमच्छ के लिए भोजन और आवास का संकट पैदा हो गया है। इससे मगरमच्छ नहरों, तालाबों और नाले से निकलकर आबादी क्षेत्र में पालतू पशुओं का शिकार कर रहे हैं।
कड़ी धूप और गर्मी से नदियों का जलस्तर तेजी से घट रहा है। तालाब, नाले और नहरें सूख रही हैं। इससे मगरमच्छों का भोजन मछलियां और दूसरे जलीय जीव की कमी हो गई है। पानी कम होने से मगरमच्छों के आवास का भी संकट हो गया है। ऐसे में मगरमच्छ इन जलाशयों से निकलकर दूसरे जलाशयों को जाने के लिए आबादी क्षेत्र में आ रहे हैं। भूख मिटाने के लिए ये पालतू पशुओं का शिकार करने लगे हैं। हाल ही में बांकेगंज के निकट गिरधरपुर गांव के तालाब से निकलकर आए एक मगरमच्छ ने एक बछड़े पर हमला कर दिया था। हालांकि वह बछड़े को निवाला नहीं बना सका, बाद में ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए उसे रस्से से जकड़कर जंगल छोड़ आए।
विज्ञापन

इससे पहले मझगई के निकट मगरमच्छ ने एक गाय को अपना निवाला बनाया था। चार दिन पहले शाहजहांपुर जिले के अल्हागंज क्षेत्र के गांव जेरा रहीमपुर में मगरमच्छ ने तालाब किनारे शौच को गए 40 वर्षीय लाखन नामक युवक को निवाला बनाया था। तालाबों से मगरमच्छों के निकलने के कारण जंगल से सटे इलाके के लोग दहशत में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

जंगल से सटे इलाकों के लोग बाघों के दहशत से पहले ही जूझ रहे हैं। आए दिन जंगल से निकलकर बाघ कभी इंसान तो कभी उनके पालतू जानवरों को निवाला बनाते रहते हैं, अब मगरमच्छों की नई मुसीबत से यहां के लोग खतरे में पड़ रहे हैं। इन दिनों लोग तालाबों के पास आपने मवेशी चराने, पानी पिलाने और शौच को जाने से भी डरने लगे हैं।

गर्मी, बारिश के बाद बढ़ता है मगरमच्छों का खतरा
आबादी क्षेत्र में मगरमच्छों का खतरा सबसे ज्यादा गर्मियों में होता है। जब तालाबों, नालों और नहरों में पानी कम हो जाता है। तब ये मगरमच्छ दूसरे जलाशयों में शरण लेने के लिए निकलते हैं और रास्ते में पड़ने वाले किसी मवेशी या इंसान को निशाना बना लेते हैं। इसके बाद बरसात के मौसम में जब नदी, नाले और तालाब उफनाते हैं, और पानी दूर-दूर तक फैल जाता है तब यह मगरमच्छ पानी के साथ बाहर आ जाते हैं। उन्हें फिर जलाशयों में पहुंचने में जो समय लगता है उस बीच वह इंसानों और पालतू पशुओं के लिए खतरा बने रहते हैं।


गर्मियों में नदी नालों और जलाशयों में पानी कम हो जाने के कारण मगरमच्छ के भोजन और आवास की समस्या पैदा होती है। तब ये वहां से निकलकर अधिक पानी वाले तालाबों की तलाश करते हैं। ऐसे में आबादी में भी आ सकते हैं। इस दौरान जलाशयों के निकट बसे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।
- डॉ. अनिल पटेल, उप-निदेशक, दुधवा टाइगर रिर्जव, बफरजोन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed